मंगलवार, 7 जनवरी 2014

महाविद्यालय में पहुंची विवेकानन्द यात्रा, भोपाल

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् द्वारा स्वामी विवेकानंद के 150वें जन्मोत्सव के तहत निकाली जा रही संदेश यात्रा सोमवार को पुराने शहर के प्रमुख महाविद्यालयों में पहुंची। यहां संदेशवाहकों ने स्वामीजी के जीवन और युवाओं को दिए संदेश से अवगत कराया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने संदेश यात्रा का स्वागत किया। 
विद्यार्थी परिषद् के महानगर मंत्री रूपेश दीक्षित ने बताया, जिले में यह यात्रा 3 जनवरी से चल रही है। 6 जनवरी को संदेश यात्रा सुबह 11 बजे गीतांजली कन्या महाविद्यालय पहुंची। यहां छात्राओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। इसके बाद 11:30 बजे सरस्वती शिशु मंदिर नारियल खेड़ा में और 12 बजे एमएलबी गर्ल्स कॉलेज, नवीन महाविद्यालय से बेनजीर कॉलेज से एमवीएम कॉलेज होते हुए यात्रा गांधी मेडिकल कॉलेज पहुंची। यहां जूनियर डाक्टर्स ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। यहीं गांधी मेडिकल कॉलेज परिसर में यात्रा का समापन किया गया। यात्रा में मुख्य रूप से विभाग संगठन मंत्री शिव पंडित, महानगर संगठन मंत्री भगवान सिंह राजपूत, महानगर मंत्री रूपेश दीक्षित, प्रांत छात्रा प्रमुख मंजू कुशवाह, सुश्री मनू सिंह, सुश्री भगवती मालवीय, सुलवंत मोर्य, राजकुमार जाट सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। 

संध्या जाट पार्षद रहेंगी या नहीं, अब आएगा फैसला

 - वार्ड -29 की पार्षद के जाति के मामले में संभागायुक्त कोर्ट  में हुई बहस पूरी 
भोपाल। 
वार्ड-29 की भाजपा पार्षद संध्या जाट पार्षद रहेंगी या उनकी यह पार्षद छिन जाएगी। इसको लेकर अब फैसला आएगा। संभवत: यह फैसला मंगलवार को भी आ सकता है। इस मामले में संभागायुक्त कोर्ट में चल रही पेशी में अंतिम बहस सोमवार को पूर्ण हो चुकी है। हालांकि कोर्ट में श्रीमती जाट के वकील ने अपने तर्क में कहा है कि  जांच में अभी तक यह तय नहंी हो सका है कि आखिर वह किस जाती में आती हैं। ज्ञात हो कि अनुसूचित जाति की होने के बाद भी पिछडावर्ग का जाति प्रमाण पत्र बनवाकर पार्षद का चुनाव लड?े के खिलाफ शिकायत की जांच करने के बाद राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने पार्षद संध्या जाट का जाति प्रमाण पत्र करने करने तथा जाति प्रमाण पत्र निरस्त करके आपराधिक कारर्वाई की अनुशंसा की थी। यहीं नहीं संभागायुक्त व कलेक्टर को समिति के निर्देश से भी अवगत कराते हुए आगामी कायर्वाही करने को कहा था।

 संभागायुक्त कोर्ट में सोमवार को हुई पेशी में पार्षद संध्या जाट और शिकायतकर्ता एवं कांग्रेस प्रत्याशी रहीं गीता राठौर की ओर से बहस पेश की गई। राठौर की ओर से तर्क पेश किया गया कि, पहले पुलिस और फिर राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने संध्या जाट के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी प्रमाणित किया है। संध्या जाट की वास्तव में अनुसूचित जाति हैं और जाटव के बजाय धोखाधड़ी करके जाट जाति का प्रमाण पत्र बनवाया गया। ऐसे में उनकी पाषर्दी शून्य घोषित करके मतगणना में दूसरे स्थान पर रहने वाली कांग्रेस प्रत्याशी गीता राठौर को पार्षद घोषित किया जाए। इसके जवाब में श्रीमती जाट की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने तर्क पेश किया कि अलग-अलग जांच के बाद भी यह निश्चित नहीं हो सका है कि आखिर वह कौन सी जाति में आती हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट में भी छानबीन समिति के फैसले और अनुशंसा के खिलाफ याचिका पेश की जा चुकी है। ऐसे में संभागायुक्त अभी फैसला करने के बजाय हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करें।

 नहीं दिया समय - श्रीमती जाट के वकील ने इस मामले में और समय दिए जाने की मांग की। संभागायुक्त एसबी सिंह ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद मामले में और समय बढ़ाने से साफ इंकार कर दिया। आयुक्त ने कहा कि मंगलवार को फैसला सुना दिया जाएगा। आयुक्त ने यह भी कहा कि, हाईकोर्ट में पेश की गई याचिका के बाद स्टे आर्डर नहीं है और न ही किसी भी तरह से आगे की कारर्वाई पर रोक लगाई गई है।

जिला प्रशासन पहुंचा कोर्ट, मांगी मोहलत

 - मामला कोच फैक्ट्री के लिए अधिगृहीत की गई 400 एकड़ जमीन का
 - प्रस्तुत किया आवेदन, दी प्रकरण की जानकारी
भोपाल। 
कोच फैक्ट्री के निर्माण के लिए तीस साल पहले अधिगृहीत की गई 400 एकड़ जमीन के मामले में कुर्की की कारर्वाई से बचने अब जिला प्रशासन ने एडीजे कोर्ट की शरण ले रहा है। सोमवार को कोर्ट में एक आवेदन लगाकर किसानों को मुआवजे की राशि दिलाने के लिए समय मांगा है। सूत्र बताते हैं कि आवेदन में बताया गया है कि इस मामले में सेंट्रल रेलवे से राशि उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भेज दिया गया है। इसके अतिरिक्त किसानों को दी जाने वाली राशि को लेकर भी रेलवे प्रशासन से लगातार चर्चा चल रही है। रेलवे से जैसे ही राशि प्राप्त होगी, किसानों को उपलब्ध करा दी जाएगी। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन को इस राशि को उपलब्ध कराने के लिए समय दिया जाए। इधर किसानों ने वकील  बीएल रघुवंशी ने इस बात की पुष्टि की है। उनका कहना है कि मंगलवार को जिला प्रशासन के तहसीलदार व अन्य अधिकारी कोर्ट में एक आवेदन प्रस्तुत करके आए हैं। जिसकी सुनवाई 23 जनवरी को पूर्व निर्धारित पेशी के समय होगी। 

चल संपत्ति कुर्क की जाने करेंगे मांग - किसानों के वकील श्री रघुवंशी ने बताया कि एडीजे कोर्ट के आदेश के बाद भी न्यायालय के अमले को कुर्की करने से रोका जा रहा है। अधिकारी वाहन लेकर निकल जाते हैं। वाहन रोकने पर एफआईआर दर्ज कराई जाती है। इन सभी बातों से एडीजे कोर्ट को आगामी पेशी में अवगत कराया जाएगा। यही नहीं न्यायालय की कायर्वाही में बाधा डालने तथा कोर्ट की आदेश की अवमानना करने संबंधी आवेदन भी प्रस्तुत किया जाएगा और न्यायालय से मांग की जाएगी कि वह जिला प्रशासन के अधिकारियों पर भी कारर्वाई करें। इसके अतिरिक्त कोर्ट से गुहार लगाई जाएगी कि वह इस बार चल संपत्ति को कुर्क करने के आदेश दें, ताकि कलेक्टर कार्यालय में ताला लगा दिया जाए और पूरी संपत्ति कुर्क हो सके।

 अब रेलवे को ला रहे समाने - कोच फैक्ट्री के लिए दी गई जमीन, जिला प्रशासन ने किसानों से अधिगृहण करके दी थी। जब 2004 में एडीजे कोर्ट से जमीन की अतिरिक्त राशि देने के लिए फैसला हुआ, उस समय कोर्ट में केवल जिला प्रशासन ही पार्टी थी। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी रेलवे को इस मामले में पार्टी बनाना उचित नहीं समझा था। अब जिला प्रशासन के उपर कुर्की जैसी आफत आई, तब कहीं जाकर अधिकारी रेलवे को इस मामले में सामने ला रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कोर्ट में दिए जा रहे आवेदन में बताया जा रहा है कि किसानों की जमीनों का अधिगृहण रेलवे के लिए किया गया था। एडीजे कोर्ट के फैसल के बाद राशि को लेकर रेलवे को राशि उपलब्ध कराने कई बार नोटिस दिए गए हैं। एक नोटिस वतर्मान में भी दिया गया है। इसके आधार पर जमीन के अतिरिक्त मुआवजे की राशि को शीघ्र उपलब्ध कराए जाने को लेकर चर्चा चल रही है।

 यह भी हो सकती है कायर्वाही - प्रशासनिक सूत्रों की माने तो अधिग्रहित जमीन का मुआवजा प्रकरण मामले में रेलवे जल्द ही अपना फैसला नहीं देता है तो जिला प्रशासन दूसरे तरीके से राशि पाने की कोशिश कर सकता है। यह तरीका रेलवे पर कायर्वाही करने को लेकर भी हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि इसके तहत जिला प्रशासन किसानों को दी जाने वाली मुआवजा राशि जमा करने के लिए रेलवे को पहले एक नोटिस जारी करेगा। इसके बाद ाी राशि जमा नहीं करने पर रेलवे को आरसीसी के तहत नोटिस जारी किए जाएंगे। इसमें राशि जमा कराने के लिए समयसीमा तय होगी। उस समयावधि के बाद भी राशि जमा न होने पर कुर्की की कायर्वाही तक की चेतावनी दी जाएगी। इसके बाद भी मामला नहीं सुलझता है तो प्रशासन या तो रेलवे की संपत्ति की कुर्की के आदेश दे सकता है या फिर अधिगृहीत जमीनों का डी-नोटिफिकेशन कर  किसानों को जमीन वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

 यह है मामला -  सन 1983-84 में प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने भोपाल रेलवे को कोच फैक्ट्री स्थापित करने के लिए करीब 420 एकड़ जमीन किसानों से अधिगृहीत करके दी थी। करारिया, भानपुर व छोला क्षेत्र के करीब 44 किसानों की यह जमीन थी, जिसका भू-अर्जन कर मुआवजा भी दिया गया। इसमें किसानों से एक एकड़ से लेकर 21 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। इन जमीनों का मुआवजा भी 18 हजार रुपए प्रति एकड़ असिंचित व 28 हजार रुपए प्रति एकड़ सिंचित के हिसाब से दिया गया। मुआवजा कम दिए जाने की मांग को लेकर 18 किसानों ने सिविल कोर्ट में जिला प्रशासन केखिलाफ केस लगा दिया। कोर्ट ने वर्ष 2004 में अपना निर्णय सुनाते हुए 1200 रुपए प्रति एकड़ असिंचित व 1800 रुपए प्रति एकड़ सिंचित केहिसाब से किसानों की अतिरिक्त राशि (मुआवजा)   देने के निर्देश दिए। इसके बाद जिला प्रशासन ने किसानों को रेलवे के पास भेज दिया। रेलवे ने अपना मामला न होने की बात कहते हुए किसानों को वापस जिला प्रशासन के पास भेज दिया।

भड़के प्रभारी कलेक्टर, बोले लंबित न रहें प्रकरण

-टीएल की बैठक में की प्रकरणों की समीक्षा 
भोपाल। 
प्रभारी कलेक्टर व एडीएम बीएस जामौद उस समय भड़क गए जब टाईम लिमिट (टीएल) की बैठक में उन्होंने विभिन्न विभागों में लंबित शिकायतों की समीक्षा की। उन्होंने ऐसे विभागों के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई, जिनकी शिकायतों की संख्या बहुत अधिक है। बैठक में उन्होंने उपस्थिति अधिकारियों से स्पष्ट कहा, इस काम में लापरवाही न बरते तो ही ठीक, वर्ना सोच लें? जनसुनवाई के लंबित प्रकरणों को ध्यान से और समय सीमा में निराकृत करना सुनिश्चित करें। बैठक में अपर कलेक्टर बसंत कुर्रे, अपर कलेक्टर अक्षय सिंह, सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी, एसडीएम सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। 

-कागज लाओ, फिर बैठो 
बैठक में जिस समय सामाजिक न्याय विभाग से संबंधित मामला आया तो विभाग के अधिकारी जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा, इस   संबंध में दस्तावेज नहीं हैं। इस पर श्री जामोद ने नाराजगी भरे अंदाज में कहा, पहले कागज लाएं फिर बैठक में बैठें। इसके बाद ही चर्चा की जाएगी। 

निर्देश यह भी दिए 
 - आओ बनाएं अपना मप्र के संबंध में सभी तैयारियां पूरी की जाए, अच्छे कार्यों की प्रदशर्नी लगाने तथा लोकार्पित होने तथा नवीन निर्माण होने वाले कार्यों की सूची जल्द से जल्द प्रस्तुत करें।
 - विजन -2018 दृष्टिपत्र, 100 दिवसीय कार्ययोजना पर भी काम शुरू करें। इसके लिए जो फंड्स मिले हैं, उनको 28 फरवरी तक यूटीलाईज करें।

आज लगेगी कलेक्टोरेट कुर्की की पुनर्याचिका

-निशातपुरा स्थित रेलवे कोच फैक्ट्री की 400 एकड़ जमीन का मामला 
-18 किसानों ने मप्र शासन के खिलाफ लगाई है अर्जी 
भोपाल। 
कलेक्टोरेट की संपत्ति कुर्की के लिए जिला न्यायालय में मंगलवार को पुनर्याचिका लगाई जाएगी। 1984 में किसानों से सवारी डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाना (कोच फैक्ट्री) लिए अधिग्रहित की गई 400 एकड़ भूमि के मुआवजे को लेकर 18 किसानों की तरफ से अधिवक्ता बीएल रघुवंशी यह याचिका लगाएंगे। 
याचिका में मप्र शासन, कलेक्टर भोपाल को पक्षकार बनाया है। इससे पहले 20 दिसंबर को जिला न्यायालय के आदेश पर न्यायालय की कुर्की टीम जिला प्रशासन के अधिकारियों के वाहनों की कुर्की के लिए पहुंची थी। जिसके लिए अधिकारियों ने आठ दिन का समय मांग लिया था। 30 दिसंबर को पुन: अपर कलेक्टर बसंत कुर्रे से अधिवक्ता और किसानों की बातचीत हुई, लेकिन यह बेनतीजा रही। अब 18 किसानों ने अधिवक्ता के माध्यम से कलेक्टर कार्यालय (संपत्ति) की कुर्की की याचिका लगाने को कहा, जो मंगवाल को लगाई जाएगी। 
अधिवक्ता श्री रघुवंशी ने बताया, बीते 28 सालों से किसानों के साथ राज्य सरकार और प्रशासन केवल छलावा करती आई है। इन 28 सालों में 22 कलेक्टर बदल गए। बावजूद अधिग्रहित की गई भूमि की राशि किसानों को नहीं मिली। अफसर रेलवे प्रशासन से मुआवजा राशि देने को कह रही है। वे प्रश्न के लहजे में कहते हैं- जब भूमि अधिग्रहण कलेक्टर और उनकी फैज करे तो मुआवजा देना का दायित्व भी उन्हीं का बनता है। मुआवजा राशि न मिलने पर ही किसानों ने जिला न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिस पर एडीजे बीके द्विवेदी से कलेक्टर कार्यालय के आला प्रशासनिक अफसरों के वाहनों की कुर्की बनाने के आदेश दिए थे। उल्लेखनीय है कि किसान अधिग्रहित की गई भूमि पर 6 करोड़ रुपए मुआवजा राशि मांग रहे हैं। 

-किसान क्या करेंगे आगे? 
अधिवक्ता श्री रघुवंशी ने बताया, मंगलवार को पुन: याचिका लगाई जाएगी। साथ ही न्यायालय से अग्रह किया जाएगा कि पूर्व में दिए उनके आदेश की अव्हेलना की गई है। 20 दिसंबर को जब कुर्की टीम कलेक्टोरेट पहुंची तो अपर कलेक्टर ने गेट में ताला डलवा दिया था, जो कि न्यायालीन कार्रवाही में बाधक है। उन्होंने कहा, भारतीय रेलवे को कोच फैक्ट्री के लिए जिला प्रशासन के तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर ने आगे रहकर 1984 में जमीन अधिग्रहित की थी। यहां से उचित न्याय न मिलने पर हाईकोर्ट का रुक किया जाएगा। 

पुनर्याचिका लगाएंगे 
कलेक्टर कार्यालय की संपत्तियां कुर्की के लिए मंगलवार को पुनर्याचिका लगाई जाएगी। साथ ही आग्रह किया जाएगा कि प्रशासनिक अफसरों पर न्यायालीन कार्रवाई में बाधा डालने पर एक्शन लिया जाएगा, जिससे ऐसा भविष्य में न हो। 
बीएल रघुवंशी, किसानों के अधिवक्ता 

1500 लेते पकड़ाया कोर्ट मुंशी

-पेशी बढ़ाने मांगी भी रिश्वत 
भोपाल। 
लोकायुक्त पुलिस ने सोमवार को नजूल वृत्त गोविंदपुरा से कोर्ट मुंशी सुरेंद्र कुशवाह को 15 सौ रुपए लेते रंगे हाथ पकड़ा। कोर्ट मुंशी ने यह राशि रिश्वत स्वरूप शिकायतकर्ता से पेशी बढ़ाने के लिए मांगी थी। 
पेशी गोविंदपुरा सर्किल के एसडीएम डीसी सिंघी की कोर्ट में लगी थी। बजरिया थाना क्षेत्र निवासी शोभाराम कुशवाह व उनके दो बेटों पर इलाके में शांति व्यवस्था भंग करने का दोषी मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा-1716 (प्रतिबंधात्म) लगाई थी। इसकी पेशी एसडीएम गोविंदपुरा के पास इनकी पेशी लगी थी। किन्हीं कारणों के चलते शोभाराम पूर्व में पेशी पर उपस्थित नहीं हो सका, जिसके लिए उसने कोर्ट मुंशी को अगली तारीख दिए जाने को कहा। इसके लिए कोर्ट मुंशी सुरेंद्र कुशवाह ने उससे 1500 रुपए की मांग की। इसके बाद शोभाराम सोमवार दोपहर लोकायुक्त पुलिस के पास पहुंच अपनी आप बीती सुनाई। लोकायुक्त पुलिस टीम ने सुरेंद्र को रंगे हाथ पकड़ने कैमिकल लगे नोट शोभाराम को देते हुए, सुरेंद्र को बतौर रिश्वत देने को कहा। गोविंदपुरा सर्किल परिसर में पहुंचते ही शोभाराम ने सुरेंद्र को राशि देने बुलाया, जैसे ही सुरेंद्र ने नोट लिए वैसे ही लोकायुक्त की टीम ने उसे दबोच लिया। लोकायुक्त पुलिस ने सुरेंद्र पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध करते हुए निजी मुचलके पर छोड़ दिया। 

सोमवार, 30 दिसंबर 2013

व्यापमं भ्रष्टाचार की हो सीबीआई जांच: आप

-आप के प्रदेश संयोजक अभय वर्मा का अनिश्चित कालीन अनशन जारी 
भोपाल। 
आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश संयोजक अभय वर्मा शाहजहांनी पार्क में व्यापमं के भ्रष्टाचार की सीबीआई से जांच कराने को को लेकर अनिश्चित कालीन अनशन पर बैठे हैं। अनशन के दूसरे दिन करीब 500 से अधिक ‘आप’ के कार्यकर्ता शामिल हुए। 
अनशन में प्रदेश ही नहीं दिल्ली से भी कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। ‘आप’ के प्रदेश प्रवक्ता प्रहलाद पांडेय ने बताया, जब तक सरकार यह निश्चित नहीं कर देती कि सरकार सीबीआई से व्यापमं घोटले-भ्रष्टाचार की जांच करा रही है। तब तक श्री वर्मा का अनशन जारी रहेगा। अभय ने व्यापमं सहित चार मुद्दों पर अनशन शुरू किया है। अभय ने बताया, अब तक सरकार या प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा यहां नहीं आया। वे कहते हैं, व्यापमं की जांच सीबीआई से कराई जाती है तो कई बातें सामने आएंगी। इसमें कई बड़े नेता-मंत्री शामिल हैं। इसमें से 80 लाख छात्रों का भविष्य सवालिया घेरे में है। 2013 में उजागर हुए शिक्षा के इस महा भ्रष्टाचार से मप्र की जनता का भरोसा सरकार से उठ गया है। 

ये हैं चार मुद्दे 
1. 66 वर्ष बाद भी धरातल पर शिक्षा का अधिकार नहीं मिल पाया है। यह सरकार की जिम्मेदार थी। हम चाहते हैं सभी सरकारी स्कूल ऐसे हो जैसे नेता, मंत्री, अफसर अपने बच्चों को जिन स्कूलों में पढ़ने भेजते हैं। जब तक शासकीय स्कूल इन स्कूलों जैसे नहीं हो जाते तब तक वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाएं। इसे राइट-टू-एज्युकेशन नहीं राइट-टू-वर्ल्डक्लास एज्युकेशन बनाया जाए। 
2. व्यापमं की सीबीआई से जांच कराएं। अब तक जितने भी दोषी सामने आए उन्हें तत्काल प्रभाव से सजा दी जाएं। 
3. व्यापमं द्वारा जो भी परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं उन सभी की परीक्षा फीस नि:शुल्क की जाए। 
4. जब तक सरकारी अस्पताल वर्ल्डक्लास के नहीं हो जाते जहां नेता, मंत्री, अफसर, संत्री अपना इलाज करवाते हैं तब तक वह भी शासकीय अस्पतालों में ही इलाज कराएं।