बुधवार, 1 मई 2013

सांची विवि के लिए ६ सदस्य चुने गए,भोपाल

राज्य सरकार ने सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय की साधाराण परिषद् का गठन कर दिया है। कुल छह सदस्यों को विवि अधिनियम, २०१२ की शक्तियों को प्रयोग में लेते हुए शामिल किया गया है। इसमें डॉ. कपिल कपूर, पूर्व प्रति कुलपति जवाहरलाल विवि, नई दिल्ली, प्रो. सिद्धेश्वर रामेश्वर भट्ट, बुद्धिस्थ एसोसिएशन ऑफ नार्वे। डॉ. अरविंद शर्मा, संकाय सदस्य धार्मिक अध्ययन मैकगिल विवि, सेंट मानट्रियल, कनाडा। प्रो. जेएस राजपूत, पूर्व डॉयरेक्टर एनसीईआरटी, ग्रेटर नोयडा और प्रो. सुमन पाल, स्नातकोत्तर इंस्टीट्यूट ऑफ पाली एंड बुद्धिष्ट अध्ययन, केलानिया विवि, श्रीलंका शामिल हैं

त्रिपाठी बने सहायक संचालक ,भोपाल

राज्य शासन ने सोमवार को हरदा के विकासखंड टिमरनी में बतौर कृषि विकास अधिकार कार्य कर रहे चंद्रकेश बाबू त्रिपाठी को पदोन्नति दी है। उन्हें सहायक संचालक, किसान कल्याण व कृषि विकास के पद पर पदोन्नत किया गया है। इस दौरान सिरोंज जिला विदिशा में पद संभालेंगे। 
 

मप्र के स्वास्थ्य व्यवस्था को 'इंजेक्शन' देने की तैयारी

-४५ दिन में ५० जिलों की जमीनी हकीकत देखेगी टीम 
ेभोपाल। 9893711147.
प्रदेश भर के ५० जिलों में स्वास्थ्य की जमीनी हकीकत जांच ने और सुविधाओं में कसावट लाने 1 मई से राज्य स्तरीय दल निकलेगा। निरीक्षण की शुरुआत रीवा संभाग से हो रही है। 45 लोगों की यह टीम बेड (अस्पताल में बिस्तर) को मानक मान सुविधाएं देखेगा। 
प्रदेश के इतिहास में संभत: यह पहली बार होगा, जब दौरे के दौरान मिलने वाले शिकायत-सुझावों पर तत्काल अमल में किया जाएगा। इसको लेकर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रवीरकृष्ण सिन्हा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं। ब्लाक, विकासखंड और ग्रामीण अंचलों के अस्पतालों से लगातार मिल रही शिकायत के बाद एक न्यूनतम पैमाने के आधार पर यहां दी जा रहीं सेवाओं को देखेंगे। जिला मुयालय एवं अंचलों में यह दल स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए निकल रहा है। डेढ़ माह तक यह भ्रमण करेगा। खास बात ये है कि इसमें खास तौर जिले के अस्पताल और डिलेवरी सेंटरों का निरीक्षण किया जाएगा। यह मातृत्व और शिशु मृत्यु दर को कम करने का एक अभिनव प्रयास है। 

-सब की सेवाएं निर्धारित 
प्रवीरकृष्ण ने बताया, निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जिला चिकित्सालय एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को मानक स्तर पर लाना है। उन्होंने कहा, हर स्वास्थ्य कर्मचारी एवं चिकित्सव के लिए न्यूनतम सेवा की शर्तंे निर्धारित कर दी गई हैं। निरीक्षण दल के पास एक सूची है, जिसमें वह यह मिलान करगा अस्पताल में क्या है? और इस आधार क्या व्यवस्था होनी चाहिए। मानक अनुसार संसाधन एवं सुविधाएं न मिलने पर दंडत्मक कार्रवाई भी संभव है। वहीं सुझाव-शिकायत मिलने पर मौके पर निराकरण भी किया जाएगा। 

-उप संचालक से लेकर सीएमएचओ तक 
निरीक्षण दल में स्वास्थ्य आयुक्त, डायरेक्टर, संभागायुक्त, कलेक्टर, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) को भी शामिल रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा ये अभियान 'ममता एवं आस्थाÓ अभियान की हकीकत को जानेगा। ब्लॉक खंड और विकासखंड स्तर पर इसे दल निरीक्षण जांचेगा। इस दौरान मौके से जो भी मिलेगा उसकी एक रिपोर्ट भी बनाई जाएगी। इसमें कहां, क्या मिला और किन सुविधाओं का आभाव है तथा इसमें बदलाव किस तरह संभव की तरीके शामिल होंगे। 

-एक संकल्प 
4-4 दिन के अंतराल में 17 लोगों का निरीक्षण दल ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में कसावट लाने निरीक्षण करेगा। हम एक संकल्प के साथ इस काम में जुट रहे हैं। 
प्रवीर कृष्ण सिन्हा, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य सेवाएं

अरेरा हिल्स से हटाई 4४ झुग्गियां

-एक सप्ताह में दूसरी बार हुई कार्रवाई 
भोपाल।
दिसंबर 2012 तकजो गरीब जहां रह रहा है, उसे वहीं रहने दिया जाएगा। उसे उसी जगह का पट्टा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इस घोषणा के बाद से लगातार झुग्गियां तन रही हैं। जिला प्रशासन के लिए ये बड़ी समस्या बन रही है। सोमवार को अल सुबह अमले ने अरेरा हिल्स पर नई ४४ झुग्गियां हटाईं। 
अनुविभागीय अधिकारी शहर वृत्त ने एक सप्ताह में दूसरी बार यहां कार्रवाई की। यहां सात दिन में ही करीब आध सैंकड़ा झुग्गियों का निर्माण हो गया था। कार्रवाई के दौरान हलका विरोध भी हुआ, लेकिन अमले और पुलिस बल की सख्ती के चलते सब सामान्य हो गया। यहां लगभग पहले से 40 करीब झुग्गियां बनी हुई है। 

-अल सुबह पहुंचा अमला 
सुबह 9 बजे जब जिला प्रशासन का अमला यहां झुग्गियां हटाने पहुंचा, तो झुग्गी माफियाओं ने स्थानीय निवासियों को आगे करने हुए विरोध प्रदर्शन किया। कार्रवाई से पहले ही कुछ महिलाओं ने अतिक्रमण अमले का घेराव कर दिया। स्थल पर मौजूद एसडीएम जीएस धुर्वे व तहसीलदार वरुण अवस्थी ने महिलाओं को समझाना का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद प्रशासन ने पुलिस की मदद ली। इसमें महिला पुलिस का भी सहयोग लिया गया। इसके बाद 44 झुग्गियों को हटाया गया। 

-पहले हटाई थीं 35 झुग्गियां 
26 अप्रैल को इसी स्थान से 35 झुग्गियां हटाई गईं थीं। तहसीलदाल वरुण अवस्थी ने बताया, शुक्रवार बीते अभी एक सप्ताह भी नहीं हुआ कि यहां नई झुग्गी तनने की खबर मिली थी। इसके बाद देखा तो यहां 44 झुग्गियां बन गई थीं। इन्हें पुलिस बल के जरिए हटाया गया। झुग्गी माफिया कौन है? और इसके पीछे कौन काम कर रहा है? इसका पता नहीं चल सका है। 

बदल जाते हैं चेहरे
प्रशासन द्वारा कार्रवाई करने के बाद दोबारा वहां अतिक्रमण हो रहा है, लेकिन चेहरे बदल जा रहे हैं। जिसके चलते अफसर भी किसी पर कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। अफसरों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान पैसे के लेन-देन की बात तो सामने आती है, लेकिन पूछने पर न तो पैसे देने वाला सामने आता है और न पैसे देने वाला। यहीं नहीं एक ही स्थान पर कार्रवाई करने पर चेहरे भी  अलग-अलग सामने आते हैं।
आए दिन हो रही है कार्रवाई सभी वृत्तों में अवैध कब्जों को हटाने के लिए अभियान चल रहा है। कलेक्ट्रेट की नाक के नीचे बनी मदर इंडिया कालोनी के पास तो एक दर्जन बार कब्जे हटाने की कार्रवाई हो चुकी है। बावजूद इसके यहां कब्जे करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी तरह बूढ़ाखेड़ा में प्रशासन दो बार कार्रवाई कर चुका है। पहले जहां इस सौ झुग्गियां बनी थी, वहीं दोबारा डेढ़ सौ से अधिक कब्जे हो गए थे। इसके अलावा गांधी नगर, कोलार, अरेरा हिल्स सहित अन्य स्थान जहां अतिक्रमण हटाने के बाद भी कब्जे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
 

फास्टट्रैक कोर्ट में हो दुष्कर्म मामले की सुनवाई: सरोज

-बच्चियों के साथ कृत्य करने वालों को 15 दिन में मिले सजा
भोपाल। 
महिलाओं पर बढ़ते अपराध चिंता का विषय है। बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 15 दिन में सजा मिलनी चाहिए। इस तरह के प्रकरणों की सुनवाई फास्टट्रैक न्यायालयों में होनी चाहिए। यह बात भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सरोज पाण्डे ने सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा में यह बात कही। वे यहां प्रदेश महिला मोर्चा की बैठक में हिस्सा लेने के लिए आई थी।
सुश्री पाण्डे ने कहा कि न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा आरोपी को सार्वजनिक रूप से दी जानी चाहिए। जिससे अपराधियों में खौफ पैदा हो। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि घोटालों से घिरी यूपीए सरकार महिला सुरक्षा पर घिरी है। स्थिति यह है कि दिल्ली में रात 8 बजे के बाद घर से बाहर निकलने से पहले सोचना पड़ता है। बलात्कार के मामले में मप्र देश में अव्वल होने के सवाल पर वे निरुत्तर रहीं। उन्हें अपने बचाव में यह कहना पड़ा कि मप्र सिर्फ आंकड़ों में अव्वल है। जबकि अन्य राज्यों में तो दुष्कर्म जैसी घटनाओं की रिपोर्ट ही नहीं लिखी जाती है। संगठन को लेकर उन्होंने कहा कि महिला मोर्चा मिशन 2013 और 2014 को फतह करने के लिए अभी से तैयारियों में जुट गया है। मोर्चा की कार्यकर्ताएं ब्लॉक स्तर पर जाकर संगठन के लिए काम करेंगे। 

खतरे में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष कुर्सी, वोटिंग 10 मई को

-जिला पंचायत सदस्यों ने किया अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन, अपर कलेक्टर को बनाया पीठासीन अधिकारी
भोपाल। 
जिला पंचायत अध्यक्ष मीना गोयल और उपाध्यक्ष कल्पना मीणा की कुर्सी छिन सकती है। जिपं के सदस्यों इनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया है। अब 10 मई को वोटिंग होगी। इसके लिए अपर कलेक्टर बसंत कुर्रे को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। 
बीते दिनों बैठक में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्तावा का सोमवार को छह सदस्यों ने एकजुटता दिखाई। कलेक्टर के सामने हुई परेड में सभी ने एक सुर में कहा, अविश्वास प्रस्ताव सोच-समक्षकर लाया गया है। इसके बाद कलेक्टर निकुंज कुमार श्रीवास्तव ने सभी सदस्यों से इस संबंध में जानकारी ली। चुनाव कराया जाए? ये सवाल सदस्यों से कलेक्टर ने पूछा तो सभी ने हां में जवाब दिया। इसके बाद श्री श्रीवास्तव ने वोटिंग की तारीख दस मई नियत कर दी। 

-26 को दिया था ज्ञापन 
२६, अप्रैल शुक्रवार को जिपं सदस्यों ने श्री श्रीवास्तव को अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में सभी छह सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थो। हालांकि मौके पर चार ही सदस्य मौजूद थे। इसके बाद कलेक्टर ने सभी सदस्यों को सोमवार को उपस्थित होने को कहा था। सभी ने उपस्थित हो अपनी हाजरी लगाई। 

पर्यवेक्षक नियुक्त की तैयारी 
वर्तमान में जिला पंचायत में दस सदस्य हैं। अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने से पूर्व जिपं में पांच सदस्य भाजपा के थे और पांच कांग्रेस के। अब कांग्रेस के सदस्यों की संख्या एक बार फिर छह हो गई है। वहीं भाजपा के चार सदस्य बचे हैं। राजनीति की सूत्रों की माने तो कांग्रेस मंगलवार को एक पर्यवेक्षक नियुक्त कर सकता है। कांग्रेस नेताओं ने इसको लेकर मंथन किया है। पूरी स्थिति का ब्यौरा वे मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष के सामने रखेंगे। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस का एक सदस्य उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान  भाजपा खेमाा में शामिल हो गया था। इससे यह बराबरी की स्थिति बनकर सामने आई थी। 

-ये कर रहे समर्थन
कांग्रेस के विष्णु विश्वकर्मा, ममता मीना, नौरंग गुर्जर, पार्वती राजपूत और भाजपा की मधु मनोज वशिष्ठ व भगवती किशनलाल मेहर। इन सभी ने सोमवार को कलेक्टर के सामने अपना पक्ष रखा। सभी ने एक सुर में प्रस्ताव को समर्थन किया। 

-शुरू हुई जोड़-तोड़
अविश्वास प्रस्ताव आने और समर्थन पर एक जुटता दिखाई देने के बाद अब जोड़-तोड़ का गणित शुरू हो गया है। अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले सभी सदस्यों ने जिपं सदस्य सीमा रघुवीर मीना व ठाकुर सुरेन्द्र सिंह सालंकी को अपने पक्ष में वोटिंग के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दी है। दूसरी ओर अविश्वास प्रस्ताव को गिराने जिपं अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने भी दोनों को अपने साथ लेने के लिए पैतरे अपना रहे हैं। 

-यह हैं आरोप
-अध्यक्ष व उपाध्यक्ष हर माह जिला पंचायत की बैठकें नहीं लेते। 
-कर्मचारियों की बेवजह शिकायतें हो रही है। 
-अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के पतियों द्वारा लाल-पीली बत्ती का दुरुपयोग किया जा रहा है। 
-ग्रामीण क्षेत्र की समस्याएं जो बताई जाती हैं, उस पर ध्यान नहीं दिया जाता। 
-जिला पंचायत का वास्तविक बजट वित्तीय वर्ष में प्रस्तुत नहीं किया जाता है जिससे आय-व्यय का ब्यौरा संदिग्ध।

टीएसएम मशीन : राजधानी को करना होगा इंतजार

-ट्रेनिंग से लौटे चारो पटवारी 
-आयुक्त भू-अभिलेख ने कहा, ट्रांसपोर्ट से भेजेंगे मशीनें 
-बाय एयर मशीनें 
भोपाल। 
आधुनिक तरीके से जमीन का सीमांकन करने वाली मशीनों के लिए राजधानी को अभी और इंतजार करना होगा। मशीन के तकनीकी गुर सीखने जिले से 4 पटवारियों को ग्वालियर भेजा गया था, जो लौट आए हैं। राजधानी को ४ 'टोटल स्टेशन मशीनÓ (टीएसएम) मिलना है। 
इसका इंतजार लंबा भी हो सकता है, वहीं अधिकारियों की माने तो मई में कलेक्टोरेट कार्यालय में इनका उपयोग होना शुरू हो जाएगा। यह मशीनें बाय एयर मोड पर आधारित हैं, जिसके जरिए अकेला सीमांकन ही नहीं होगा, बल्कि उक्त सीमांकित भूमि का नक्शा भी निकल आएगा। पटवारियों की यह दूसरे चरण का प्रशिक्षण था, जो भोपाल के लिए लाभदायक सिद्ध हुई है। मशीन मिलते ही जिले के भूमि का भौतिक सत्यापन के साथ मशीनों का सीमांकन के लिए उपयोग भी करेंगे। 
हालांकि पहले कहा जा रहा था कि ट्रेनिंग पर गए पटवारी इन मशीनों को लेकर आएंगे। अब इसकी सुरक्षा, पार्ट्स आदि को लेकर आयुक्त भू-अभिलेख ने ट्रांसपोर्ट के जरिए भेजने का निर्णय लिया है। 

-22 को गए थे टे्रनिंग पर 
ेटीएसएम मशीनों की दूसरे चरण की ट्रेनिंग के लिए एक बार फिर भोपाल जिले के पटवारियों को ग्वालियर बुलाया था। बुलावा पत्र 24 अप्रैल को भोपाल कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। हालांकि ट्रेनिंग की जानकारी भू-अभिलेख अधीक्षक को पहले ही मिल गई थी। इसके चलते उन्होंने पहले ही चार पटवारियों को 22 से 29 मार्च तक होने वाली टीएसएम की ट्रेनिंग के लिए रवाना कर दिया। पत्र में स्पष्ट किया गया था, जो कर्मचारी ट्रेनिंग पर जाएंगे, उन्हें प्रशिक्षण के साथ टीएसएम मशीनें सौंप रवानगी दी जाएगी। इसके बाद ट्रेनिंग के साथ टीएसएम मशीने मिलने का रास्ता खुल गया था, लेकिन अब निर्णय लिया गया है कि अब मशीनों की सुरक्षा को देखते हुए इन्हें ऐसे ही नहीं भेजा जाएगा। 

-पहले छिन चुकी हैं मशीनें 
आयुक्त भूमि अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर ने मार्च माह में कुछ जिलों को टीएसएम मशीनें आवंटित करने के निर्देश दिए थे। इसमें भोपाल जिले को 4 टीएसएम मशीनें देना शामिल था। इस आदेश में मशीनें उपलब्ध कराने से पहले शर्त रखी गई थी कि जिले के सभी राजस्व वृत्तों के करीब एक दर्जन पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों को इस मशीन के प्रशिक्षण के लिए ग्वालियर भेजना होगा। वहां पर टीएसएम से सीमांकन की तकनीक को सिखाया जाएगा और सीमांकन की बारीकियां भी बताई जाएंगी। इस आदेश के आधार पर पटवारियों व राजस्व निरीक्षकों के नाम भी चयन किया गया और उन्हें अवगत भी कराया गया। बाद में कि न्ही कारणों से भोपाल से पटवारी प्रशिक्षण लेने नहीं गए। इससे नाराज सीएलआर ने भोपाल जिले को भेजी जाने वाली चार टीएसएम का आवंटन निरस्त कर दिया था। सीएलआर का कहना है कि जब प्रशिक्षण में ही अधिकारी-कर्मचारी रुचि नहीं ले रहे हैं तो मशीनें देने से भी क्या होगा? 

-ऐसे होगा सीमांकन 
अधिकारियों की माने तो भोपाल को मिलने जा रही यह टीएसएम मशीनें सीमांकन करने के लिए बहुत ही उपयुक्त है। इससे जल्द और सटीक सीमांकन होता है। इस मशीनों से माइक्रोवेव और इंफ्रारेड किरणें निकलती हैं जो जमीन की नापजोख करने में सहायक होती है। इसमें लैग के समान एक इलेक्ट्रॉनिक डिस्टेंस मीटर होता है। जिस स्थान तक की नप्ती करनी होती है इसे वहां रख दिया जाता है। इसके बाद उपकरण से इंफ्रारेड किरणें छोड़ी जाती हैं। यह किरणें दूर रखें उपकरण पर पड़ते ही उस पर दूरी प्रदर्शित होने लगती है। इसे नोट कर लिया जाता है। इसमें किसी प्रकार की कोई गलती की गुंजाइश नहीं रहती है। इस मशीन की सबसे खास बात यह है कि यह गड़बडिय़ां बिलकुल भी नहीं करती हैंं, इसके चलते लोगों को मन में सीमांकन को लेकर आ रही शंकाएं भी दूर हो जाएंगी।

-फायदे जो होंगे 
१. सीमांकन कार्य में गति आएगी।
२. बरसात में सीमांकन रूक जाता था, अब मशीनों से बरसात में भी प्रक्रिया चालू रहेगी। 

-सुरक्षित लाना जरूरी 
मशीनों में कुछ उपकरण बेहद सूक्ष्म हैं, जिसके चलते मशीन का सुरक्षित लाया जाना बेहद जरूरी है। संभव है मई में मशीनें आ जाएंगी। 
आरएस बघेल, अधीक्षक, भू-अभिलेख शाखा भोपाल 

-जल्द मिलेंगी 
भोपाल जिले को जल्द ही मशीनें मिलेंगी। आयुक्त भूमि अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर से आश्वासन मिल गया है। 
चंद्रशेखर श्रीवास्तव, तहसीलदार, हुजूर