शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने राहुल के समक्ष निकाली मन की भड़ास

नेता सुधर जाएंगे तो राज्य के हालात बदल जाएंगे
चीफ रिपोर्टर, भोपाल 
मप्र के दो दिवसीय दौरे के दौरान भोपाल पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पार्टी के कार्यकर्ता जमीनी हकीकत बताने से नहीं हिचकें। सभी ने एक ही बात कही कि नेता सुधर जाएंगे तो राज्य के हालात बदल जाएंगे। मप्र प्रवास के दूसरे दिन गुरुवार को भोपाल पहुंचे गांधी ने पहले दौर में पार्टी के 15 संसदीय क्षेत्रों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, चुनाव में हारे उम्मीदवारों व पदाधिकारियों से अलग-अलग चर्चा की। इस बैठक में प्रतिनिधियों ने साफ  तौर पर पार्टी में हावी गुटबाजी का जिक्र किया। उनका कहना था कि पार्टी पूरी तरह गुटों में बंटी है। नेता अपने लोगों को आगे बढ़ाते हैं, उन्हें इससे मतलब नहीं होता कि उनके इस कदम से पार्टी को क्या नुकसान होगा। असली कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती है। 
असलम शेर खां ने उठाया गुटबाजी का मुद्दा 
हाकी खिलाड़ी व पूर्व सांसद असलम शेर खां ने भी पार्टी में गुटबाजी का मुद्दा उठाया। उन्होंने अल्पसंख्यकों की उपेक्षा की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य में नौ जिले ऐसे हैं, जहां अल्पसंख्यक नतीजे तय करते हैं। लिहाजा, पार्टी को इस वर्ग में अपनी पैठ बनानी चाहिए। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हजारीलाल रघुवंशी ने भी पार्टी में व्याप्त गुटबाजी की चर्चा की। उन्होंने उम्मीद जताई है कि राहुल गांधी राज्य में कांग्रेस में जो चल रहा है उसे बदल देना चाहते हैं। उनकी कोशिश है कि राज्य में कांग्रेस सत्ता में आए और इसके लिए उनके तेवर भी बदले हुए हैं। 
प्रतिनिधियों से अलग-अलग चर्चा 
बैठक में हिस्सा लेकर लौटे प्रतिनिधि इस बात से खुश हैं कि राहुल गांधी ने उनकी बात सुनी और भरोसा दिलाया कि अब उम्मीदवारी नेता नहीं निचले स्तर के पदाधिकारी तय करेंगे। जो जीत का दावेदार होगा वही पार्टी का उम्मीदवार बनेगा। सात करोड़ जनता का प्रतिनिधि कुछ लोग तय नहीं करेंगे। राहुल ने दो से तीन संसदीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों से अलग-अलग चर्चा की है। इस दौरान राज्य का कोई बड़ा नेता मौजूद नहीं रहा। राहुल के साथ प्रदेशाध्यक्ष कांति लाल भूरिया व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के अलावा प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद ही चर्चा में मौजूद रहे। उन नेताओं को दूर रखा गया है जिन पर गुटबाजी बढ़ाने के आरोप हैं। 

सभी को मिला बात का मौका 
मानस भवन में कई घंटों तक राहुल ने सिर्फ कार्यकर्ताओं की सुनी। सभी पदाधिकारियों की बात को जहां एक ओर राहुल गांधी सुन रहे थे, वहीं दूसरी ओर उनके साथ आई टीम इस पूरी वार्तालाप की रिकार्डिंग करने के साथ ही पदाधिकारियों द्वारा कही गई बात को नोट भी कर रहे थे। कुछ पदाधिकारियों ने लिखित में सुझाव दिए। अधिकांश पदाधिकारियों ने मोहनखेड़ा की तरह ही अपनी बातें कहीं। बताते हैं कि पदाधिकारियों की चिंता प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की मतभिन्नता को लेकर थी। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि आप तो सिर्फ  इन नेताओं के मन-मुटाव दूर करवा दीजिए। वहीं, कई पदाधिकारियों ने विधानसभा चुनाव में अच्छे प्रत्याशी चयन पर जोर दिया। यह सुझाव भी आया कि आने वाले 6 माह में सभी बड़े नेता एक साथ प्रदेशभर का दौरा करें। 
स्थानीय नेता को तवज्जो नहीं 
महिला पदाधिकारियों ने उनकी उपेक्षा की बात कही। यह भी बात उठी कि जो नेता दिल्ली दरबार में पहुंच रखते हैं, लाभ भी उन्हीं को मिलता है। स्थानीय कार्यकर्ता भले ही क्षेत्र में अपना प्रभाव रखता हो, उसे कोई तव्वजों नहीं दी जाती। कुछ पदाधिकारियों ने नाम लेकर गुटबाजी की बात भी कहने की कोशिश की, लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें सिफ सुझाव देने की समझाइश दी। कुल मिलाकर सभी पदाधिकारियों की चिंता यह थी कि किसी भी तरह बड़े नेताओं को एकजुट करा दीजिए।

नेताजी उवाच 
राहुल गांधी ने पूरे देश में छात्र संगठनों, युवा इकाइयों को विशेष रूप से एकत्र करने का काम किया है। राहुल की यह पहल सराहनीय है। गुटबाजी तो परिवार में भी जब ज्यादा लोग बैठते हैं तो उनमें भी हो जाती हैं। प्रदेश में सभी नेता एक हैं।
- दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री 

राहुल गांधी जिस तरह से कार्यक्रम में प्रदेश के पार्टी नेताओं, पदाधिकारियों से सीधा संवाद कर रहे हैं, इसका फायदा कांग्रेस को चुनाव में मिलेगा। पार्टी में किसी तरह की कोई गुटबाजी नहीं है। कांग्रेस आम लोगों की पार्टी है।। 
- ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री 

राहुल गांधी सभी नेताओं को एकजुट करें, तभी उनकी मेहनत सफल हो पाएगी। मप्र में जिस तरह से गुटबाजी है, उसे दूर किया जाना जरूरी है अन्यथा प्रदेश में कांग्रेस के जो हालात आज हैं, वहीं आगे भी रहेंगे। 
- हजारीलाल रघुवंशी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता 

बताते है कि जब युवराज के समक्ष कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के नेताओं की गुटबाजी बयान करना शुरू की तो राहुल गांधी को भी यह कहना पड़ा कि यह नेताओं में नहींए बल्कि कांग्रेस के सिस्?टम का एक हिस्?सा है। विधानसभा चुनाव की बात हुई तो उन्?होंने कहा कि इसकी रणनीति जल्?द ही सामने आएगी। मेरी इच्?छा है कि दिसंबर में चुनाव हैए तो टिकट वितरण की शुरूआत जून माह से हो और जुलाई तक टिकिट बंट जाए। उन्?होंने कहा कि 7 करोड़ लोगों के प्रतिनिधियों के उम्?मीदवारों का चयन  प्रदेश के कुछ नेता तय करें यह ठीक नहीं। कार्यकर्ताओं की सहमति इसमें शामिल होगी।

दरिंदगी फिर आई सामने

-छह वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म 
सीहोर। 
जिले की तहसील आष्टा के ग्राम मैना की एक छह वर्षीय मासूम को दरिंदे ने अपनी हवस का शिकार बनाया। मामला सामने आने पर पुलिस ने मासूम का आष्टा अस्पताल मे मेडिकल करवाया। मासूम की हालत खराब होने पर उसे भोपाल के शा. हमीदिया अस्पातल में भर्ती कराया गया है। सीहोर कलेक्टर कवीन्द्र कियावत बच्ची के परिजनों से मिलने पहुंचे। 
मामले में अभी तक आरोपी की शिनाख्त नहीं हो सकी है। मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम पांच बजे के आसपास ग्राम मैना में एक पेड़ के नीचे दो बच्चों के साथ खेल रही छह वर्षीय मासूम को अज्ञात आरोपी चाकलेट का लालच देकर सुनसान जगह ले गया। यहां मासूम को अपनी वासना का शिकार बनाकर रोता-बिलखता छोड़ दिया। रोती मासूम को देखकर कुछ ग्रामीण उसे गांव लाए। मामला सामने आने पर मासूम को आष्टा अस्पताल लाया गया जहां से उसे सीहोर अस्पताल रैफर कर दिया गया। बच्ची की हालत इतनी खराब है कि वह कुछ बोल भी नहीं पा रही है। इधर पुलिस उन दो मासूमों से भी पूछताछ कर रही है जो उस समय इस बच्ची के साथ खेल रहे थे। 

कलेक्टर-एसपी पहुंचे अस्पताल
मामले की जानकारी मिलते ही मासूम के जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही कलेक्टर कविन्द्र कियावत व एसपी केबी शर्मा अस्पताल पहुंच गए थे। कलेक्टर कियावत ने पूरी गोपनीयता बरतने व मासूम के पुख्ता उपचार के निर्देश चिकित्सकों को दिए, इधर एसपी शर्मा ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई टीमों को क्षेत्र में सर्चिग के लिए रवाना किया है।  

एयरपोर्ट एरिया परमीशन देने से पहले सोचें

-कमिश्नर ने ली राजाभोज विमानपत्त पर्यावरण प्रबंधन समिति की बैठक 
भोपाल। 
विमानतल क्षेत्र में किसी प्रकार की परमिशन अधिकारी सोच समझकर दें। खास तौर पर भवन अनुज्ञा। यह परमिशन कानून और व्यावहारिक तौर पर जायेज होने चाहिए। बिना मापदण्डों के किसी प्रकार की न दें। संभागायुक्त एसबी सिंह ने गुरुवार को यह निर्देश राजाभोज विमानतल पर्यावरण प्रबंधन समिति की बैठक में दिए। 
वे बोले एयरपोर्ट अथारिटी एरिया में अनाधिकृत निर्माण, आतिशबाजी प्रदर्शन, कचरे के निष्पादन और अनाधिकृत बूचडख़ानों को हटाने पर भी शीघ्र कार्रवाई करें। यहां भवन निर्माण की अनुमति तभी दें जब वह पूरे माप दंड पर खरा हो। इसमें निर्धारित ऊंचाई, आकार प्रकार आदि स्पष्ट हों। बैठक में वन विभाग, पुलिस और स्टेट हैंगर के अधिकारियों से भी चर्चा की गई। बैठक में पक्षियों के विमान से टकराने का मामला भी उठा। इस पर उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को खुले में मांस विक्रय पर रोक लगाने तथा दुकानें हटाने के निर्देश दिए।
 

राजधानी के पास होंगी चार टीएसएम मशीनें

-४ पटवारियों को भेजा ट्रेनिंग पर 
भोपाल।
 जिले आरआई-पटवारी अब हाई टेक तरीके से जमीनों का सीमांकन करेंगे। दरअसल, जिले को ४ टोटल स्टेशन मशीनों (टीएसएम) मिल रही हैं, जिसके जरिए यह काम होगा। वहीं इन्हें ऑपरेट करने जिले के ४ पटवारियों को ट्रेनिंग लेने ग्वालियर भेजा है। यहां वे २९ अप्रैल तक मशीन की तकनीक का गुर सीखेंगे। 
दूसरे चरण की ट्रेनिंग भोपाल जिले के लाभदायक साबित हुई है। अधिकारियों के अनुसार जिन पटवारियों को ग्वालियर ट्रेनिंग पर भेजा गया है। वे जब वापस लौटेंगे तो टीएसएम मशीनें लेकर आएंगे। 
ेजानकारी के अनुसार आयुक्त भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त ने टीएसएम मशीनों की दूसरे चरण की ट्रेनिंग के लिए एक बार फिर भोपाल जिले के पटवारियों को ग्वालियर बुलाया था। बुलावा पत्र 24 अप्रैल को भोपाल कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। हालांकि ट्रेनिंग की जानकारी भू-अभिलेख अधीक्षक को पहले ही मिल गई थी। इसके चलते उन्होंने पहले ही चार पटवारियों को 22 से 29 मार्च तक होने वाली टीएसएम की ट्रेनिंग के लिए रवाना कर दिया। पत्र में स्पष्ट किया गया था, जो कर्मचारी ट्रेनिंग पर जाएंगे, उन्हें प्रशिक्षण के साथ टीएसएम मशीनें सौंप रवानगी दी जाएगी। इसी के साथ चार पटवारियों के ट्रेनिंग के साथ टीएसएम मशीनों के मिलने का रास्ता खुल गया है। अधिकारियों ने अब मन बनाया है जैसे ही मशीनें भोपाल आएंगी, इसका प्रशिक्षण अन्य पटवारियों को दिलाया जाएगा। 

-इसलिए छिनी थीं मशीनें 
आयुक्त भूमि अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर ने मार्च माह में कुछ जिलों को टीएसएम मशीनें आवंटित करने के निर्देश दिए थे। इसमें भोपाल जिले की 4 टीएसएम मशीनें देना शामिल था। इस आदेश में मशीने उपलब्ध कराने से पहले शर्त रखी गई थी कि जिले के सभी राजस्व वृत्तों के करीब एक दर्जन पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों को इस मशीन के प्रशिक्षण के लिए ग्वालियर भेजना होगा। वहां पर टीएसएम से सीमांकन की तकनीक को सिखाया जाएगा और सीमांकन की बारीकियां भी बताई जाएंगी। इस आदेश के आधार पर पटवारियों व राजस्व निरीक्षकों के नाम भी चयन किए गए और उन्हें अवगत भी कराया गया। बाद में कि न्ही कारणों से वे प्रशिक्षण लेने नहीं गए। इससे नाराज सीएलआर ने भोपाल जिले को भेजी जाने वाली चार टीएसएम का आवंटन निरस्त कर दिया था। सीएलआर का कहना है कि जब प्रशिक्षण में ही अधिकारी-कर्मचारी रूचि नहीं ले रहे हैं तो मशीनें देने से भी क्या होगा।

-जल्दी और सटीक होगा सीमांकन 
अधिकारियों की माने तो भोपाल को मिलने जा रही यह टीएसएम मशीनें सीमांकन करने के लिए बहुत ही उपयुक्त है। इससे जल्द और सटीक सीमांकन होता है। इस मशीनों से माइक्रोवेव और इंफ्रारेड किरणें निकलती हैं जो जमीन की नापजोख करने में सहायक होती है। इसमें लैग के समान एक इलेक्ट्रॉनिक डिस्टेंस मीटर होता है। जिस स्थान तक की नपती करनी होती है इसे वहां र ा दिया जाता है। इसके बाद उपकरण से इंफ्रारेड किरणें छोड़ी जाती हैं। यह किरणें दूर रखें उपकरण पर पड़ते ही उस पर दूरी प्रदर्शित होने लगती है। इसे नोट कर लिया जाता है। इसमें किसी प्रकार की कोई गलती की गुंजाइश नहीं रहती है। इस मशीन की सबसे खास बात यह है कि यह गड़बडिय़ां बिलकुल भी नहीं करती हैंं, इसके चलते लोगों को मन में सीमांकन को लेकर आ रही शंकाएं भी दूर हो जाएंगी।

-फायदे जो होंगे 
१. सीमांकन कार्य में गति आएगी।
२. बरसात में सीमांकन रूक जाता था, अब मशीनों से बरसात में भी प्रक्रिया चालू रहेगी।
  

मतदान प्रतिशत बढ़ाने पर अधिकारी विशेष ध्यान दे

-मतदाता-सूची में सुधार और एवीएम का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन हो
-ऐपिक गेप और डुप्लीकेट आई.डी के शीघ्र निराकरण के निर्देश
-उप चुनाव आयुक्त ने की पांच संभाग में चुनाव तैयारियों की समीक्षा
 भोपाल। 
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करने आये उप चुनाव आयुक्त सुधीर त्रिपाठी ने आज भोपाल, जबलपुर, सागर, उज्जैन और इंदौर संभाग के आयुक्तों और कलेक्टरों से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए सीधे चर्चा की। इस दौरान प्रदेश के मु य निर्वाचन पदाधिकारी जयदीप गोविंद और अन्य अधिकारी मौजूद थे।
सुधीर त्रिपाठी ने सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों से आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान का प्रतिशत बढ़ाने को कहा। ऐसे मतदान-केन्द्र, जहां पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान का प्रतिशत काफी कम था, वहां विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिये स्वीप प्लॉन के माध्यम से गतिविधियां संचालित करने और मतदाताओं को जागरूक बनाने को कहा गया। ऐसे मतदान-केन्द्र, जहां मतदान का प्रतिशत अधिक रहा, वहाँ उसे बरकरार रखने के निर्देश दिए गए। श्री त्रिपाठी ने कहा कि मतदाता-सूची का संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्य अब नहीं होगा। मतदाता-सूची में जो त्रुटियां हैं, उसमें यथाशीघ्र सुधार कर लिया जाये। जिन जिलों ने ईवीएम का भौतिक सत्यापन एवं जांच नहीं की है, उसे यथाशीघ्र शत-प्रतिशत पूरा किया जाए। ईवीएम की सुरक्षा के साथ उसके रख-रखाव आदि की ओर भी ध्यान दिया जाए।


6 माह पहले पूरी हो चुनाव संबंधी तैयारियां
उप चुनाव आयुक्त  ने बताया कि चुनाव आयोग की कोशिश है कि मध्यप्रदेश में 6 माह पूर्व ही निर्वाचन संबंधी सभी तैयारियां कर ली जाये। इसके लिये सभी क्षेत्रों की व्यापक समीक्षा शुरू की गई है। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश में मतदाता-सूची को शत-प्रतिशत ठीक करने की दिशा में काफी कार्य किया गया है। मतदाता-सूची में 85 लाख नये नाम जोड़े गये हैं, जिनमें से लगभग 10 लाख नाम विभिन्न कारण से हटाए गये तथा शेष 75 लाख नाम सही पाए गए। उन्होंने इस बात पर भी प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश में फोटोयुक्त मतदाता-सूची बनाने का कार्य भी बखूबी किया गया है। उन्होंने सभी कमिश्नर और जिला कलेक्टर से चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करने का अनुरोध किया है। उन्होंने इस बात पर भी प्रसन्नता व्यक्त की कि सभी जिले ऐपिक गेप और जेण्डर अनुपात को समाप्त करने में रुचि ले रहे हैं। उन्होंने निर्वाचन ड्यूटी में लगाये गये ऐसे अधिकारियों के नाम शासन को देने को कहा है, जिनकी पद-स्थापना या तो गृह नगर में है अथवा उन्होंने अपनी पद-स्थापना के तीन साल पूरे कर लिये हैं।
संवेदनशील केंद्रों के लिए रणनीति अभी से
प्रदेश के मु य निर्वाचन पदाधिकारी जयदीप गोविंद ने संभागायुक्तों और कलेक्टरों को मतदाताओं के मोबाइल न बर एकत्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गंभीर समस्या एवं गड़बड़ी की आशंका वाले मतदान-केन्द्रों के संबंध में अभी से रणनीति तैयार करने को कहा। स्वीप प्लॉन की गतिविधियां चुनाव तक सतत चलती रहें, यह सुनिश्चित किया जाए। जिन जिलों में डुप्लीकेट ऐपिक कार्ड की सं या अधिक है, वे 15 मई तक स्क्रूटनी कर तत्काल उसे कम करें। आयोग की मंशा के अनुरूप ऐपिक गेप को शत-प्रतिशत समाप्त किया जाए। जिन जिलों ने निर्वाचन प्रबंधन कार्य-योजना अभी तक नहीं भेजी है, उसे वे शीघ्र भेजें। चुनाव अमले की कमी की ओर ध्यान आकर्षित करवाए जाने पर उन्होंने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि उसकी पूर्ति मई माह तक कर दी जाएगी। श्री गोविंद ने शहरी क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत बढ़ाये जाने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने सभी जिलों को क युनिकेशन प्लॉन, परिवहन व्यवस्था, पुलिस बल, स्ट्रांग-रूम, ईवीएम की जांच आदि की ओर भी अधिकारियों को विशेष ध्यान देने को कहा। स्वीप प्लॉन में मीडिया, कॉलेज आदि को पार्टनर बनाने के निर्देश दिए। जिलों को डिजिटल सिग्नेचर के कार्य को भी यथा-समय पूर्ण करवाने के उन्होंने निर्देश दिए।

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मुख्य सचिव से मिले उप चुनाव आयुक्त
मु य सचिव आर. परशुराम से आज मंत्रालय में मध्यप्रदेश प्रवास पर आए भारत निर्वाचन आयोग के उप चुनाव आयुक्त सुधीर त्रिपाठी ने सौजन्य भेंट की । इस अवसर पर मु य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश जयदीप गोविन्द भी उपस्थित थे। 

ेहाईकोर्ट ने लगाई स्मार्ट कार्ड के टेंडर पर रोक

-परिवहन आयुक्त के साथ अन्य को बनाया पार्टी 
भोपाल/जबलपुर। 
वाहनों के रजिस्ट्रेशन व ड्राइविंग लाइसेंस के लिये निकाले गए स्मार्ट कार्ड के टेंडर (एलओआई) लेटर ऑफ इंटेंड खोलने पर मप्र हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश से रोक लगा दी है। एक्टिंग चीफ जस्टिस केके लाहोटी और जस्टिस एमए सिद्दकी की युगलपीठ ने यह रोक लगाई। इसकी सुनवाई 7 मई को होगी। 
कोर्ट में मामला रोजमेट्रा प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि राज्य शासन के परिवहन विभाग ने 8 मार्च 2013 को वाहनों के रजिस्टे्रशन व ड्राइविंग लाइसेंस के डिजिटलाइजेशन के लिये टेंडर निकाला था। जिसमें सालाना 12 करोड़ के हिसाब से पांच वर्ष का कार्य है। आरोप है कि उक्त टेंडर प्रकिया में ऐसी शर्ते लागू की गई, जिससे कि पुराने ठेकेदारों को लाभ मिल सके। जिसमें कि कंपनी का टर्न ओवर 500 करोड़ होना आवश्यक किया गया है, इसके साथ ही पेरोल 500 आईटी ए पलाइज होना आवश्यक है और कंपनी को प्राथमिकता दी जायेगी जिसने कि पूर्व में राज्य व केन्द्र के लिये कार्य किया होगा। याचिका में कहा गया है कि पिछली मर्तबा वर्ष 2006 में 10 करोड़ रुपये टर्न ओवर की शर्त रखी गई थी, जिसे बढ़ाकर पांच सौ करोड़ कर दिया गया, जो कि अनुचित है। आवेदक का कहना है कि अन्य प्रदेशो में भी 50 करोड़ टर्न ओवर वालो के आवेदन स्वीकार किये जा रहे है। मामले की पिछली सुनवाई दौरान न्यायालय ने अनावदेक बनाये गये परिवहन सचिव, आयुक्त सहित मास्टर चिप प्राइवेट लिमिटेड, स्पेनको प्रा. लि.  व आईएल एंड एफएस प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये थे। मामले में गुरुवार को हुई सुनवाई दौरान न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पराग चतुर्वेदी ने पक्ष रखा।

सुरूर कौनसी बोतल में बिकेगा अंतिम फैसला ३० को

-प्राणी मित्र संस्था ने दायर की है याचिका 
ेभोपाल/जबलपुर। 
देशी शराब कौनसी बोतल में बिकेगी। इसका अंतिम फैसला अब 30 अप्रैल को होगा। गुरुवार को प्राणी मित्र संस्था द्वारा दायर याचिका पर पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। 
प्लास्टिक की बोतल में देशी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध को लेकर संस्था द्वारा लगाई याचिका को जनहित मैं मानते हुए हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस आरएस झा की युगलपीठ ने प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिबंध बैक फुट लिए जाने हेतु राज्य सरकार व शराब व्यापारियों ने हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया था। इस पर याचिकाकर्ता की ने अवमानना याचिका भी दायर की है। युगलपीठ ने  दोनों याचिका की सुनवाई संयुक्त रूप से करने के निर्देश जारी देते हुए याचिका पर 25 अप्रैल को सुनवाई को कहा था। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस केके लाहोटी व जस्टिस एमए सिद्दीकी की युगलपीठ ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद याचिका पर अंतिम सुनवाई 30 अप्रैल को निर्धारत की है। प्राणी मित्र संस्था द्वारा देशी शराब के प्लास्टिक बोतलों में विक्रय पर रोक की याचिका पर १० अप्रैल को प्रतिबंध लगा दिया था। यह रोक वर्तमान में है। दायर याचिका में हवाला दिया गया है कि प्रदेश सरकार एक तरफ प्लास्टिक  का उपयोग कम करने का प्रयास कर रही है। ऐसे में प्लास्टिक की बोटल में शराब बेचा जाना उचित नहीं है। 

-जहरीली हो जाती है शराब 
याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आरएन सिंह पैरवी कर रहे हैं। वहीं सरकार का पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेन्द्र कौरव ने रखा। याचिका तर्क दिया गया है कि एल्कोहल होने के कारण प्लास्टिक की बोतल में शराब अधिक जहरीली हो जाती है। इसके चलते देश के कई प्रदेशों में प्लास्टिक  की बोतल में शराब बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। दूसरा इन बोतलों की रिसायक्लिनिंग नहीं होती, जिसके चलते इसका कचरा-कूड़ा भी फैलता है। यह पर्यावरण की दृष्टि से भी हानिकारक है। कोर्ट द्वारा रोक लगाने पर प्रदेश सरकार व शराब निर्माताओं ने आदेश के परिपालन में होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर स्थगन वापस लेने आवेदन दिया था। इसको लेकर शपथपत्र प्रस्तुत करने निर्देश जारी किए थे।