शनिवार, 3 अगस्त 2013

आफत की बारिश, फसलें बर्बाद

-जिले के खेतों में तीन फीट तक भरा पानी 
भोपाल। 
जिले में लगातार हो रही बरसात ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। अधिकतर खेतों में दो से तीन फीट पानी ारा हुआ है। किसान उस पानी को अब निकालने भी नहीं जा रहा है, क्योंकि पानी निकालने के बाद भी फसल नहीं बचेगी। इधर केवल उन्हीं किसानों की फसलें बची हुई हैँ, जिन्होंने केवल धान बो रखा है वह भी पहले। जिन्होंने लगातार हो रही बरसात के दौरान धान लगाई है, उनके भी बुरे हाल हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में भरा पानी निकलने के बाद ही पता चल सकेगा कि फसल की स्थिति क्या है। जिन किसानों ने धान छोड़कर सोयाबीन आदि की फसलें लगा रखीं है, उन्होंने फसल आने की उ मीद ही छोड़ दी है।

-दो दिन रूके पानी ने दी थोड़ी राहत 
तालाब की शक्ल ले चुके खेतों से पानी निकालने के लिए किसान दिन रात मेहनत कर रहा है। इधर दो दिनों से रुक रुककर हो रही बरसात व खिल रही धूप ने भी किसानों को थोड़ी राहत जरूर है। फिर ाी खेतों में भरे पानी से खरीफ की फसलों में नुकसान होने का खतरा बना हुआ है। हालांकि शुक्रवार को जरूर किसानों के चेहरे  िाले हुए थे। कारण खरीफ की फसलों में हजारों रुपए की लागत और मेहनत लगाकर बैठे किसान धूप  िालने की दुआएं जो मांग रहे थे।

-अधिकांश फसलें बर्बाद 
भारी बारिश से सोयाबीन व उड़द फसल खराब हो रही है। फंदा ब्लाक के संतोष पाटीदार ने बताया कि बारिश से अधिकांश फसलें खराब हो रही हैं। किसान बारिश थमने और धूप खिलने की दुआं मांग रहे हैं। मुगालिया छाप निवासी प्रदीप विश्वकर्मा ने बताया कि यह बारिश आफत लेकर आई है। ऐसे कोई खेत नहीं बचे हैं जहां पानी न भरा हो। सोयाबीन के पौधे गल गए हैं।  सब्जियों की फसलें भी खराब हो गई हैं। बताया जा रहा है कि बेर ोड़ी, ईंटखेडी, ल ाापुर बरखेड़ा, खजूरी सड़क, आमला, सलैया, गोल, अमरावत खुर्द, बासिया, अमझरा, बर ोड़ा नाथू सहित अन्य क्षेत्रों में सबसे अधिक नुकसान हो गया है। 

-अफसर उदासीन 
किसान बर्बाद हो रहा है और कृषि विभाग के अधिकारी विभाग के अधिकारियों का रवैया पूरी तरह से लापरवाही का है। जिले में अभी तक कितना नुकसान हुआ है, इस संबंध में कृषि विभाग के अधिकारी जमीनी स्तर पर जानकारी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। उनसे जब नुकसान के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि राजस्व और कृषि विभाग के अमले की रिपोर्ट के बाद ही नुकसान की वस्तु स्थिति
सामने आएगी। 


बुधवारा-इतवारा में नहीं बिकेगी रेत-गिट्टी,भोपाल

पुराने भोपाल के बुधवारा और इतवारा क्षेत्र में रेत, गिट्टी और सीमेंट नहीं बिकेगी। कलेक्टर ने यहां विक्रय और भंडारण पर पूरी तरह प्रतिबंधित लगा दिया है। 
कलेक्टर निशांत वरवड़े ने भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-144 के तहत रोक लगाई है। निर्देश में कहा गया है, इन क्षेत्रों में रेत, र्इंट, सीमेंट, गिट्टी एवं अन्य निर्माण सामग्री का क्रय-विक्रय व भंडारण नहीं किया जाएगा। आदेश में बताया गया कि इसके चलते यहां वायु व ध्वनि प्रदूषण हो रहा था। साथ ही चक्का जाम की स्थिति भी बनी रहती है। आदेश के तहत शासकीय कार्य में लगी एजेंसियों नगर निगम, लोक निर्माण विभाग को छूट रहेगी। वहीं अन्य को आदेश   का उल्लंघन होने पर धारा-188 के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। 

दो कार और 4 हजार लीटर शराब राजसात ,भोपाल

कलेक्टर कोर्ट ने अवैध परिवहन करते पाए जाने पर एक ट्रक, दो कार और करीब 4 हजार लीटर अवैध शराब को भी राजसात करने के आदेश दिए हैं। इसका पालन आबकारी विभाग को करना होगा। राजसात किए गए वाहन व शराब को नीलाम कर राशि वसूल कर शासन के खजाने में राशि जमा की जाएगी। 2002 में आबकारी अमले ने होशंगाबाद रोड पर तलाशी अभियान के दौरान एक ट्रक को पकड़ा था। इस ट्रक में 272 पेटियां मिली थी, जिसमें 3 हजार 456 लीटर विदेशी तथा 78 लीटर देशी शराब मिली थी। ट्रक ड्रायवर से शराब के संबंध में जानकारी ली गई तो वह शराब परिवहन का न तो परमिट दिखा सका और न ही शराब कहां से ला रहा था कि जानकारी दी। इस कारण ट्रक सहित पूरी शराब जब्त कर ली गई। यह ट्रक इंदौर निवासी मनोज कुमार का था। 

सोमवार से खत्म होगा बड़े स्टॉम्पों का टोटा

 - 5000 के स्टॉम्पों से चल रहा था काम 
भोपाल। 
शहर में चल रहा बड़े स्टॉम्पों का टोटा सोमवार को खत्म हो जाएगा। जिला कोषालय ने बड़े स्टॉम्प मांगा लिए हैं। यह सोमवार से स्टॉम्प वेंडरों को स्टॉम्प जारी करेगा। बड़े स्टॉम्पों के आने के बाद से रजिस्ट्रियां तेजी से होंगी। 
कोषालय से वेंडरों को 10 से 25 हजार तक के स्टॉम्प मिलेंगे। इन्हीं स्टॉम्पों की अधिक डिमांड भी है। उल्लेखनीय है कि भोपाल जिले के कोषालय में 10, 15, 20 व 25 हजार रुपए के नॉन ज्यूडिशियल स्टॉम्प जून माह में खत्म हो गए थे। इसके बाद से जमीनों की रजिस्ट्रियां होना कम हो गया था। दूसरी ओर स्टॉम्प वेंडरों ने भी चालान कोषालय में लगाना बंद कर दिया था। आईजी पंजीयन ने इंदौर ट्रेजरी आफिसर को नासिक भेजकर बड़े स्टॉम्प लाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इंदौर से गए अधिकारी जुलाई माह के अंत में बड़े स्टॉम्प लेकर इंदौर पहुंचे। इसके साथ ही भोपाल भी स्टॉम्प भेजे गए हैं। 

-गड़बड़ाया गणित 
बीत छह माह में बड़े स्टॉम्प खत्म होने की स्थिति तीसरी बार बनी है। फरवरी में पहली बार ऐसा हुआ। इसके बाद मार्च में ऐसी स्थिति दो बार बनी। मार्च में सबसे ज्यादा जमीन की रजिस्ट्रियां होने से गणित गड़बड़ाया था। इसके बाद अप्रैल में फिर स्टॉम्प खत्म हुए। इसके बाद फिर जून माह में यही स्थिति निर्मित हुई। 

-ये बचे थे केवल 
50, 100, 500, 1000 व 5000 रुपए के स्टॉम्प। 

-वर्जन 
जिला कोषालय से सोमवार को स्टॉम्प वेंडरों को स्टॉप दिए जाएंगे। नासिक से बड़े स्टॉम्प आ गए हैं। 
एनएस तोमर, वरिष्ठ जिला पंजीयक 

नगर निगम दर्ज कराएगा एफआईआर

 - मामला एमपी नगर पार्किंग की शिकायत का
एमपी नगर की पार्किंग के ठेके को लेकर ईओडब्ल्यू में चल रही जांच में नया मोड़
आ गया है। निगम अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार पार्किंग संबंधित जो
अनुबंध पत्र ईओडब्ल्यू को सौंपा गया है वह फर्जी है। निगम अधिकारियों का कहना
है कि जो अनुबंध पत्र ईओडब्ल्यू में प्रस्तुत किया गया है, उक्त दिनांक को कोई
भी अनुबंध पत्र नगर निगम के रिकार्ड में दर्ज ही नहीं है। इस संबंध में वार्ड
अधिकारी, जोनल अधिकारी अनिल शर्मा के साथ  मिलकर पूरा मामला अपर आयुक्त जीपी
माली के सामने रखने की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद नगर निगम ईओडब्ल्यू में
मामला दर्ज कराने वाले मनोज त्रिपाठी के खिलाफ झूठे दस्तावेज जमा करने शिकायत
करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराएगा।
कमिश्नर को भेजी थी जानकारी
जानकारी के मुताबिक चंद्रशेखर नामक व्यक्ति ने निगम कमिश्नर विशेष गढ़पाले को
निगम की पार्किंग में हो रहे फर्जीवाडेÞ की जानकारी डाक से भेजी थी। इस शिकायत
में एक अनुबंध पत्र भी शामिल था। शिकायत में पार्किंग ठेकेदार राजेंद्र सिंह
के अकाउंट में पार्किंग के पैसे जमा होने की जानकारी से संबंधित बैंक
ट्रांजिक्शन की कॉपी भी थी।
ऐसे पकड़ाया झूठ
कमिश्नर कार्यालय से शिकायत संबंधी कागजात जीपी माली को मार्क किए गए। फिर
राजस्व उपायुक्त प्रदीप वर्मा कौ और बाद में अनिल शर्मा से होते हुए वार्ड
अधिकारी जीपी वर्मा तक यह कागजात पहुंचे। इस संबंध में जीपी वर्मा ने जब
रिकार्ड से मिलान किया तो पाया कि अनुबंध पत्र तो फर्जी है। इसकी जानकारी
उन्होंने निगम के आला अधिकारियों को दी। अब पूरे मामले में निगम शिकायतकर्ता
के खिलाफ मामला दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
यह है हैराफेरी
जानकारी के मुताबिक जिस अनुबंध पत्र के आधार पर शिकायत दर्ज की गई है उसमें
जोनल अधिकारी अनिल शर्मा और ठेकेदार राजेंद्र के बारे में पूरी जानकारी और
ब्यौरा शामिल है, लेकिन अंत में जो दस्तखत और टीप है वो दूसरे अनुबंध पत्र से
उठाई गई है। हैरत की बात यह है कि पूरे मामले में अनिल शर्मा को घेरा गया है,
जबकि अंत में जोनल अधिकारी के दस्तखत के रुप में डीके जैन के हस्ताक्षर है, जो
इसकी विश्वसनियता को खत्म करते है। आपको बता दें इस साल की शुरुआत में डीके
जैन रिटायर्ड हो गए है। इसके अलावा दस्तावेज के साथ  जिस अकाउंट की जानकारी दी
गई है वो राजेंद्र सिंह का है। गौरतलब है कि राजेंद्र सिंह भाजपा के नेता है
और उन्होंनें गोपाल शर्मा की और से पिछले साल पार्किंग का ठेका लिया था जो कि
जून में ही खत्म हो गया है। वर्तमान में नए ठेके के अनुसार दूसरा ठेकेदार
वसूली कर रहा है।
जल्द तय होगी कारर्वाई
हमे जैसे ही निगमायुक्त की तरफ से निर्देश मिलेंगे, वैसे ही हम आगे की
कार्रवाई करेंगे। फिलहाल जोन अधिकारी को जांच कर प्रतिवेदन सौंपने को कहा गया
है।
प्रदीप वर्मा, राजस्व उपायुक्त

शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

सरकार ही नहीं चाहती साफ हो यूका का कचरा

-गैस पीड़ितों को लेकर गंभीर नहीं है सरकार 
-सेंटर फॉर साइंस इनवायरमेंट की रिपोर्ट में चौकाने वाला खुलासा 
-बैठक में ही नहीं पहुंचे जन प्रतिनिधि
कृष्णा पांडे, भोपाल। 
3 दिसंबर 1984 का दर्दनाक हादसा अब भी लोगों के जहन में और कई इसकों सोचने भर से सिहर जाते हैं। लेकिन देखिए हमारी ही सरकार गैस पीड़ितों को स्वस्थ्य जीवन जीने नहीं देना चाहती। यूनियन कार्बाइड के कचरे के निष्पादन (खत्मे) और जमीन को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सेंटर फॉर साइंस इनवायरमेंट एनजीओं ने 24 अपै्रल को दिल्ली में बैठक की थी। जिसमें प्रदेश सरकार का कोई नुमाइदा बैठक में नहीं पहुंचा। इस बैठक में यूका से संबंधित सभी स्वयं सेवी संगठन, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) और कचरा उन्मूलन उद्योगों के विशेषज्ञ शामिल हुए। बैठक में युका से संक्रमित जमीन और भू-जल को यूका के कचरे मुक्त बनाने और वहां पडे जहरीले कचरे को समाप्त करने। प्लांट की मशीनरी और क्षेत्र के भविष्य की चर्चा हुई। इसमें यूका के कचरे को समाप्त करने के लिए एक रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट पेश की सेंटर फॉर साइंस इनवायरमेंट (सीएसई) ने। इसमें प्रदेश की राजधानी की यूका संक्रमित जमीन को संक्रमण मुक्त करने की योजना थी। बैठक में मप्र सरकार के प्रतिनिधियों, मंत्रियों और विधायकों को बुलाया गया था। लेकिन एक भी प्रतिनिधि उसमें नहीं पहुंचा। 
इनको बुलाया था
यूका से जुड़ी गैर-सरकारी और सरकारी संगठन, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी), काउंसिल फार साइंटिफिक एंड इड्रस्टीयल रिसर्च (सीएसआईआर), नेशनल इनवायरमेंटल इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट(एनईईआरआई), नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनजीआरआई), इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ कैमिकल टेक्नोलॉजी (आईआईसीटी) और इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च, मप्र भोपाल गैस त्रासदी विभाग, मप्र स्वास्थ्य विभाग, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड मप्र। 
यह है रिपोर्ट
सीएसई गौर-सरकारी संगठन ने गौर-सरकारी संगठन ने युका के क्षेत्र में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठन, कचरा उन्मूलन उद्योगों के विशेषज्ञ शामिल, आईआईटी और केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड से 30 लोगों का पैनल बनाकर युका के कचरे का अध्यन किया। अध्यन में पता चला कि इन छोटी जगहों में पड़ 350 टन का कचरा है। इससे इस क्षेत्र की भूमि-जल और वायु में आज भी मरकरी, बैंजीन हेक्सा क्लोराइट, क्लोरिनेटिड बैंजीन, एल्टीकर्ब जैसे तत्वो का प्रभाव है। 
एक्शन प्लान में 
युका के कचरे को खत्म करने के लिए सरएसई ने एक्शन प्लान बनाया। इसमें संगठन ने प्लान को दो चरणों में विभाजित किया। पहल जिन पर तुरंत काम किया जाना है। दूसरा मध्य एवं लम्बी अवधी की योजना। पहले में पूरे क्षेत्र और सोलर पांड को अधिग्रहणकर उसमें तार बाणी लगाना। ताकि वहां लोग और खसतौर पर बच्चे न जा सके। क्षेत्र में जमा कचरे को निकारकर इसमें मौजूद रसायन को उनकी प्रकृति के अनुसार नष्ट करना। एक जगह में एकत्रित कचरे को नष्ट करना। वहीं दूसरे चरण में भूजल में जहरीले रसायनों का असर जानने के लिए अध्यप और प्रयोगशाला परीक्षण किए जाए। यका के प्लांट में वेंट,वेंट स्क्रबर, स्टोरेज टैंक और कंट्रोल रूम सहित एमआईसी प्लांग को प्रदूषण मुक्त करना। फिर उसमें पूरी बिल्डिंग में एक मेमोरियल और सेंटर आॅफ एक्सिलेंस फॉर इंडस्ट्रीयल डिजायर मैनेजमेंट की स्थापना। 
युका प्लांट से 365 मोटर गायब
जहां एक ओर सरकार ने युका प्लांट में लोगों के जाने में पूरी तरह से प्रतिवंधित किया है। वहीं, युकां प्लांट में उपयोग होने वाली 370 में से 365 मोटरें चोरी हो चुकी हैं। इससे यह बात स्पष्ट होती है। कि युका में हर किसी का प्रवेश है

रजिस्ट्रियों पर रोक हटने पर किसानों ने मनाया जश्न

नीलबड में किसानों की बैठक के बाद बांटी गई मिठाई
भोपाल ..
राजधानी के आस पास के गांवों की जमीन की रजिस्ट्रिी पर लगी रोक को हाईकोर्ट द्वारा हटाने पर किसानों में जश्न का माहौल है। किसानों ने इसे राजधानी के समग्र विकास की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए गांवों को नगर निगम सीमा में शामिल किए जाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई है।
नीलबड़ में मंगलवार को आस पास के करीब 50 गांवों के किसान जुटे और जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण आदि पर लगी रोक को हाईकोर्ट से हटाने का स्वागत किया। इस मौके पर किसानों ने मिठाई बांटी और आपस में एक दूसरे को बधाई दी। किसानों का कहना है कि गांवों की जो जमीन कृषि योग्य नहीं होकर बंजर है, ऐसी जमीन के आवासीय घोषित होने के बाद किसान प्लाट बनाकर या एकमुश्त बेचना चाहते हैं। बावजूद इसके बेचने पर रोक होने से बेटियों की शादी और गंभीर बीमारियों का इलाज तक नहीं करवा पा रहे थे। बैठक में कई सरपंच और पंच के साथ ही प्रभावशाली किसानों ने शिरकत की। बैठक में तय किया गया कि जमीन को आवासीय घोषित करवाने और नगर निगम सीमा में शामिल करवाने की मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव रामस्वरुप सिंह यादव, अवधनारायण कुशवाहा, दिलीप सिंह ठाकुर, सपा नेता रामस्वरुप यादव गुड्डू विश्वकर्मा, दिलीप सिंह जादौन, योगेश कुशवाहा, ददन सिंह यादव, परशुराम, भगवत सिंह, फूल सिंह तोमर, मोतीलाल नागर और कल्लू अहिरवार सहित सैकड़ों किसान मौजूद थे। 

इन गांवों को मिलेगा फायदा
बरखेड़ा नाथू, मुगालिया छाप, बेरखेड़ी बाज्याप्त, कुशलपुरा, लखापुर, र्इंटखेड़ी, सरवर, सेमली, खोकडिया, टीला खेडी, नांदनी, कैकडिया, भानपुर, अमरपुरा, सम्मतपुरा, आंवलाखेड़ा, छोटी झागरिया, कलखेड़ा, खोरी, फंदा, खजूरी, बोरखेड़ी, जाटखेडी, पिपलिया, खरपा खरपी, मिंडोरा, मिंडोरी, आमला, सम्मसगढ़, बकानिया, धमनिया, डोबरा, सिकंदराबाद, रसूलिया, नरेला, मूड़ला, बड़झिरी आदि गांव। 

सपा की सदस्यता ली किसानों ने
कई किसानों ने इस मौके पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव रामस्वरुप यादव का आभार जताते हुए आभार जताया। किसानों ने कहा कि राजधानी के आस पास के 50 गांवों की जमीन को नगर निगम  सीमा में शामिल करवाने के साथ ही आवासीय घोषित करवाने के लिए समाजवादी पार्टी लंबे समय से आंदोलन चला रही है। इस मौके पर सपा के प्रदेश सचिव रामस्वरुप यादव ने कहाकि, भूमाफिया और राजनीतिक गठजोड के चलते नगर निगम सीमा में शामिल नहीं किया जा रहा है। यादव ने कहा कि 50 गांवों के नगर निगम सीमा में शामिल होने से किसानों और मकान बनाने वालों को फायदा होगा। सस्ते प्लॉट और मकान मिलने लगेंगे। भोपाल का विस्तार गांवों तक हो चुका है, लेकिन अभी भी पंचायत क्षेत्र होने से विकास तेज गति से नहीं हो पा रहा है। यादव ने कहा कि गांवों को नगर निगम सीमा में शामिल करवाने के लिए आंदोलन तेज किया जाएगा।