नहीं हुआ पीएचई की संपत्तियों का सत्यापन
भोपाल।
24 नवंबर 1995 को पीएचई के जलकार्य विभाग का विलय नगर निगम में हुआ था। विलय के समय निगम को करोड़ों रुपए की अचल संपत्ति भी मिली थी। परंतु 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी नगर निगम आज तक संपत्तियों का सत्यापन नहीं कर पाया है। निगम के राजस्व विभाग के पास इस संबंध में कोई पु ता जानकारी नहीं है कि पीएचई से मिली संपत्ति कहां-कहां है। उल्लेखनीय है कि सत्यापन की जि मेदारी निगम के राजस्व विभाग की है लेकिन निगम का यह विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।
यह हुआ था प्राप्त
1995 में विलय के समय निगम को पीएचई के करीब 164 मकान तथा 8 कार्यालय भवन मिले थे। साथ ही करीब दर्जन भर टंकियां भी विलय के समय निगम के कब्जे में आई थी। जानकारों के अनुसार,पीएचई से मिले मकानों में आज भी पीएचई के कर्मचारी जमे हुए है,जिसमें कई रिटायर्ड कर्मचारी भी है। यह मकान माता मंदिर,जवाहर चौक,बैरागढ़,कोलार आदि क्षेत्रों में है। पीएचई द्वारा दिए गए इन मकानों के रखरखाव का जि मा भी निगम का है,जिसकी ओर निगम का ध्यान जरा भी नहीं है। मकानों का रखरखाव न होने के कारण अब वह जर्जर अवस्था में पहुंच चुके है।
सत्यापन हेतु कमेटी
बजट सत्र के पहले के निगम परिषद के स मेलन में निगम की संपत्तियों का मुद्दा कांग्रेसी पार्षदों ने उठाया था,जिस पर निगम अध्यक्ष ने निगम की संपत्तियों का सत्यापन करने के लिए एक समिति का गठन करने की घोषणा की थी। सूत्रों के अनुसार,समिति का गठन तो हो गया है लेकिन इसके सदस्यों को भी इन संपत्तियों की जानकारी नहीं है।
इनका कहना
नगर निगम को हस्तांरित संपत्तियों को लेकर कार्ययोजना बनाई जा रही है। इस कार्ययोजना में नगर निवेषक व नगर यंत्री की सलाहों पर भी ध्यान दिया जाएगा। जहां तक समिति की बैठक की बात है उसे भी जल्द ही बुलाया जाएगा।
प्रदीप वर्मा,राजस्व अधिकारी, नगर निगम भोपाल
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