बुधवार, 10 अप्रैल 2013

दावे दार को आईना दिखाया भूरिया ने


-अल्पसंख्यक नेता बोले पहले टिकट तो दो, फिर फिर भीड़ देखो 
भोपाल। 
कमला पार्क वार्ड-20 से कांग्रेस की पार्षद रही और फिर बगावत के चलते २०१० में पार्टी से ६ वर्षों के लिए निष्कासित महिला नेत्री के पति जिन्हें प्रदेश कांग्रेस में भारी दबाव के चलते कार्यकारिणी में लिया गया है। उन्होंने मंगलवार को मध्य विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी सुनिश्चित करने बायोडाटा दिया, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने उल्टा दावेदार को उनकी जमीनी हकीकत से अवगत करा दिया। 
कांग्रेस से इस सीट के लिए टिकट की जुगत कई अल्पसंख्यक नेता अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें शहर के कई दिग्गजों का नाम शामिल है, किन्तु कांग्रेस के शीर्षस्थों ने किसी का नाम लिस्ट में अब तक फाइनल नहीं किया है। रोज की तरह 45 बंगले स्थित कांतिलाल भूरिया के बी-19 में कार्यकर्ताओं उनका मिलना जुलना चल रहा था। करीब १० बजे प्रदेश कांग्रेस कमेटी और कांग्रेसियों में अपनी कंजूसी के लिए प्रसिद्ध छवि रखने वाले यह अल्पसंख्यक नेता पहुंचे। चंद मिनटों बाद श्री भूरिया से अल्पसंख्यक नेता ने कान में धीमें अल्फाजों में अकेले में बात करने को कहा। भूरिया दो कदम पीछे हटते हुए बात बताने को कहा। जैसे ही श्री भूरिया ने यह शब्द कहे। अल्पसंख्यक नेता ने अपनी जेब से बायोडाटा निकाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के हाथों में रख दिया और मध्य विधानसभा सीट से टिकट पक्का करने को कहा। 
अल्पसंख्यक नेता की बातें सुनते ही भूरिया ने धीरे से बायोडाटा को चौखाना घड़ी करते हुए नेताजी के कुर्ते के उपरी जेब में रख दिया। भूरिया बोले मैंने कभी आपके साथ चार समर्थक नहीं देखे। लोग टिकट पाने सर्मथकों की भीड़ और ढोल-ढमाकों के साथ आते हैं। आप पहले हैं, जो अकेले आए। जाईए महोदय पहले आरिफ मसूद, नासिर इस्लाम, मुन्वर कुरैशी, सैयद कमर अली सईद अहमद सुरूर, अब्दुल रज्जाक और शाजित अली जैसे नेताओं की तरह जन व कार्यकर्ताओं में जमीनी पकड़ बनाईए। कांगे्रस के किसी भी कार्यक्रम में मैंने आपके साथ गिने-चुने समर्थक भी नहीं देखे। इस दौरान उन्होंने संबंधों की दुहाई भी दी, लेकिन भूरिया ने एक नहीं सुनी। उल्लेखनीय है पीसीसी और अपनों के बीच भी ये अल्पसंख्यक नेता कंजूसी के लिए जाने जाते हैं। वहीं सभी को ये उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी और भूरिया का बहुत करीबी बताते हैं। महोदय जिस मध्य विधानसभा सीट से टिकट चाह रहे हैं। वह सीट बीजेपी के दिल फेंक विधायक ध्रुवनारायण सिंह के कब्जे में है। यहां बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से नासिर इस्लाम को टिकट दिया गया था। 
अल्पसंख्यक नेता भोपाल में बीते 30 सालों से राजनीति कर रहे हैं। इनकी धर्मपत्नी को जब पार्षद का कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलिय मैदान में उतर आईं। आलम ये रहा कि उन्हें महज 100 वोट ही मिले। पार्टी से इस बगावत के चलते 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। वहीं अल्पसंख्यक नेता ने 1994 में कोहेफिजा वार्ड-5 से निर्दलिय चुनाव लड़ा। उन्हें मात्र १०० वोट मिले। यहां से उस समय सूनिल सूद विजयी हुए थे। खैर, इन अल्पसंख्यक नेता को भूरिया द्वारा इतने के बाद भी शांति नहीं मिली। गेट से बाहर आते-आते उन्होंने भूरिया से ही कह दिया, 'एक बार टिकट तो देकर देखिए फिर मेरे साथ कितनी भीड़ होती है'। 

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