राजधानी सहित प्रदेश भर के जिलों में मंजरे-टोलों को राजस्व ग्राम की शक्ल देने का काम ठप हो गया है। इसके लिए गांवों की सीट तो तैयार कर ली गई है, इसके बाद इन्हें मंजरे-टोलों को गांव का रूप देने का काम अट गया। इसका कारण मप्र भू-राजस्व सहिता की धारा-108 सहित अन्य सुसंगत शक्तियों का न मिलना है।
शक्तियों का आधार कितना तथ्य पूर्ण है, इसकी पुष्टि की आला अधिकारी ने नहीं है। हालांकि हालांकि इन शक्तियों के लिए वल्लभ भवन से एक मॉडल अधिसूचना भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त आयुक्त (सीएलआर) को भेजी गई है। यह फाईल भी पास होकर नहीं आ पाई है। दूसरी ओर भू-अभिलेख अधीक्षकों का कहना है, जब शक्तियां ही नहीं है तो मंजरे-टोलों को गांव का रूप कैसे दिया जाए।
गौर करने वाली बात ये है कि मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि प्रदेश के मंजरे-टोलों को जल्द ही गांव बनाया जाएगा। इसका पालन राजधानी सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी तेजी से नहीं हो पा रहा है। भोपाल जिले में 15 मंजरे-टोलों को राजस्व ग्राम बनाए जाने की प्रक्रिया का काम लगभग 50 प्रतिशत पूरा हो चुका है। 15 मंजरे-टोले व इससे प्रभावित होने वाले 11 गांवों सहित कुल 26 गांवों की सीट भी बनकर तैयार हो गई है। यहीं नहीं अधिकार अभिलेख निर्माण का कार्य भी लगभग 40 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है।
-अधिसूचना होगी जारी
मप्र भू-राजस्व संहिता की धारा-108 सहित अन्य सुसंगत शक्तियों के प्रदाय की जानकारियों की अधिसूचना जारी की जाएगी। यह शक्तियां शिवपुरी जिले में मॉडल् वर्क को आधार मानकर तैयार की गई हैं। इसे भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त आयुक्त को भी भेज दिया गया है। यदि अधिसूचना को मंजूरी मिलती है तो इसके आधार पर अन्य जिलों को भी एमपी एलआर सी की धारा-108 सहित अन्य सुसंगत शक्तियों को प्रदान किया जाएगा। इसके बाद ही गजट नोटिफिकेशन होगा।
-30 लाख का खर्चा
सूत्रों की माने तो प्रत्येक गांव का अभिलेख तैयार करने में करीब 30 लाख रुपए का खर्चा भी आएगा। वर्तमान में गांव से अलग किए जा रहे मंजरे टोले की सीमाएं नापी जा रही हैं। वहीं अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। इधर सीएलआर की ओर से 14 मंजरे टोलों के लिए 8 लाख 84 हजार रुपए भी इस कार्य के लिए प्राप्त हो चुके हैं।
-मिली शक्ति तो ये होंगे काम
- प्रमुख गांव से नवीन राजस्व ग्राम की भागीदारी अलग होगी। खसरे और नक्शे अलग होंगे। नेट पर भी इसी तरह इनका लेखा जोखा होगा।
-गांव की सीमा तय करने के साथ सीमांकन होगा। यहां की जमीनों के खसरे अलग होंगे। साथ ही गांव का नाम भी अलग तय किया जाएगा।
-दो खसरों के बीच ग्राम का रास्ता निकाला जाएगा। जो सरकारी दर्ज होगा। इससे विवाद की स्थिति न बने।
कहां कितने बनेंगे मंजरे-टोले गांव
तहसील बैरसिया -
गांव - मंजरा-टोला
जमूसरखुर्द - लालूखेड़ी
ललोई - ऊंची ललोई
तहसील हुजूर -
गांव - मंजरा-टोला
तूमड़ा - - राजीव नगर, पाटनिया व अय्यापुर
परवलिया सड़क - शाहपुरा
आदमपुर छावनी - हरिपुरा,अर्जुन नगर व छावनी पठार
पुराछिदवाड़ा - शेखपुर
कान्हासैया - अनंतपुरा व शांतिनगर
अगरिया - छापर
नरोन्हा सांकल - पढरिया सांकल
बालमपुर - देहरी
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