गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

मार्कफेड ने हड़पा गेहूं उपार्जन का ब्याज-सोसायटियां भुगत रहीं खामियाजा, किसान नहीं बेचना चाहते अब गेहूं

-मामला बैतूल जिले में हुई गेहूं खरीदी का 
-भुगतान में गड़बड़ी से किसान परेशान
भोपाल 28 मार्च 2013। 
बैतूल जिले में गेहूं उपार्जन के भुगतान में लेतलाली बरते जाने से सोसायटीज के ब्याज व भंडारण के लाखों रुपए अटक गए हैं। जिले की तीन सोसायटीज को भुगतान भी करीब साल भर बाद तब मिल सका जब यह मामला राज्य विधानसभा में गूंजा। ब्याज के खेल के चलते मार्कफेड की ओर से सोसायटीज व किसानों का भुगतान समय पर नहीं किए जाने से किसान अब सरकारी केंद्रों पर अपना अनाज बेचने से बच रहे हैं। इसके चलते जिले में अब तक महज 6हजार मेट्रिक टन गेहंू की ही खरीदी हो सकी। खरीदी कम होने व सोसायटीज का भुगतान लंबित होने से विरोध के चलते गेहूं का परिवहन भी समय पर नहीं हो पा रहा है। ज्ञात हो कि जिले में गेहूं खरीदी के भुगतान में हो रही गड़बड़ी व किसानों की समस्या को देखते हुए जिले के  प्रभारी मंत्री सरताज सिंह व खाद्य मंत्री पारस जैन ने विभाग को अर्धशासकीय पत्र लिख कर जिले में गेहूं उपार्जन का कार्य इस साल नागरिक आपूर्ति निगम को सौंपे जाने की सिफारिश की थीएलेकिन अधिकारियों ने मंत्रीद्वय की बात को तवज्जो न  देते हुए इस बार खरीदी का दायित्व पुनरू मार्कफेड को सौंप दिया है। इससे जिले के किसानों में असंतोष  है। 
 सूत्रों के मुताबिकए बैतूल जिले में बीते दो सालों से गेहूं उपार्जन का कार्य मार्कफेड द्वारा किया जा रहा है। बताया जाता हैएकि मार्कफेड द्वारा बीते साल करीब 98 लाख से अधिक मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी तो की लेकिन सहकारी समितियों को भुगतान समय पर नहीं किया।नतीजतन इन समितियों के माध्यम से गेहूं बेचने वाले किसानों का भुगतान भी अटक गया। तीनों समितियों व कुछ किसानों द्वारा इसकी शिकायत जिले के प्रभारी मंत्री सरताज सिंह से किए जाने पर उन्होंने गत 18जनवरी को पत्र लिखकर नए रबी सीजन में गेहूं उपार्जन का कार्य नागरिक आपूर्ति निगम को सौंपे जाने की सिफारिश की थी। खाद्य मंत्री पारस जैन ने भी प्रभारी मंत्री की सिफारिश अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए। इसके बाद भी मार्कफेड को उपार्जन एजेंसी बनाए जाने पर गत 15 मार्च को कांग्रेस विधायक यादवेद्र सिंह व राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने यह मामला सदन में उठाया व निगम को खरीदी सौंपे जाने की मांग की। बताया जाता हैएकि सदन में यह मामला उठते ही गत 15 मार्च को ही मार्कफेड ने जिला सहकारी बैंक को करीब 72 लाख रुपए का भुगतान किया लेकिन समितियों के ब्याज व भंडारण खर्च की लाखों रुपए की राशि फिर भी अदा नहीं की गई। बताया जाता हैएकि ब्याज व भंडारण की यह रकम करीब 70लाख रुपए है। इसे लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। 

-ब्याज का गोरखधंधा
 सूत्रो के मुताबिक जिले में इस साल खरीदी के लिए नागरि क आर्पूिर्त निगम ने उपार्जन शुरु होने से तीन दिन पहले गत 15 मार्च को ही साढे 22 करोड रुपए का भुगतान मार्कफेड मुख्यालय को किया था लेकिन मार्कफेड ने जिला सहकारी बैंक बैतूल को अब तक केवल  बीस करोड रुपए ही जारी किए गए। यह रकम भी एक  सप्ताह के अंतराल से दो किश्तों में दी गई। इसी तरह की गडबडी बीते रबी सीजन में भी की गई थी। बल्कि बीते साल का तीन सोसायटीज की बकाया ख रुपए तो गत मार्च को तब  लाख रुपए की राशि तो गत जारी किए गए जब मामला सदन में  मार्च को तब जारी की गई जब यह मामला राज्य विधानसभा में गंूजा। मार्कफेड में व्याप्त इस गडबडी के कारण संबंधित सोसायटीज को लाखों रुपए का ब्याज भुगतना पडा और सहकारी बैंक ब्याज की भरपाई करने को इसलिए राजी नहीं क्योंकि मार्कफेड ने ही उसे करीब एक साल के  बिलंब से भुगतान किया। जानकारों के मुताबिक, मार्कफेड के अधिकारी सरकार से उपार्जन के लिए मिली रकम को अकारण रोक कर रखते हैं और इस पर मिलने वाले ब्याज की राशि को हडप लिया जाता है। बताया जाता है कि सोसायटीज के भुगतान में विलंब कर ब्याज राशि हडपने का यह खेल केवल बैतूल ही नहीं बल्कि मार्कफेड की खरीदी वाले अन्य जिलों में भी जारी है।  मार्कफेड की ओर से की जा रही इस गडबडी के कारण किसान अब इन जिलों में सरकारी केंद्रो पर अपनी उपज बेचने से बच रहे हैं। इसके चलते बैतूल जिले में ही अब तक केवल 6 हजार मीट्रिक टन गेहूं की  खरीदी हो सकी है।
 
-परिवहन में भी  गड़बड़ी
 सूत्रों के मुताबिक,मार्कफेड द्वारा गेहंू के परिवहन में भी लापरवाही बरती जा रही है। इससे मौसम के मिजाज में आए दिन आ रहे बदलाव के चलते एक बार फिर उपार्जित गेहूं खराब होने की आशंका बनी हुई है। ज्ञात हो कि बीते साल उपार्जित गेहूं खुले में रखे जाने व समय पर इसका परिवहन कर भंडारण नहीं किए जाने से बड़ी मात्रा में खरीदा गया गेहूं खराब हो गया था। ट्रांसपोर्टर व जिले के मार्कफेड अधिकारियों की मिलीभगत के चलते अब एक बार फिर ऐसे ही हालात बन रहे हैं। 


 ...वर्ष 2012.13 के बकाया भुगतान की करीब 72 लाख रुपए की राशि गत 15मार्च को ही मिली है। इसका भुगतान संबंधित सहकारी समितियों को कर दिया गया हैएलेकिन ब्याज व भंडारण की राशि को लेकर विवाद की स्थिति है। बैंक को भुगतान ही विलंब से मिला तो ब्याज बैंक क्यों भुगते  
 बाबूराव लिखितकर महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक बैतूल

 ..... कुछ सहकारी समितियों का बीते रबी सीजन की खरीदी का भुगतान बकाया था। यह अब कर दिया गया है। ब्याज व भंडारण राशि की गणना सोसायटीज की ओर से प्राप्त नहीं होने के  कारण इस रकम का भुगतान नहीं हो सका। जहां तक इस साल की खरीदी की बात है तो बीस करोड़ की जो राशि सीधे बैंक को मिली है। यह भुगतान बैंक को करना है।   
आर के शुक्ला डीएमओ मार्क फेड बैतूल 

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