शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

निजी घोषित हो गई सरकारी जमीन


-भूत पूर्व सैनिक की पत्नी ने की थी शिकायत, जांच में आया मामला सामने 
भोपाल। 
सरकारी जमीन को कैसे निजी कराया जाता है। वह भी जिला प्रशासन को घट घरे में खड़ा करके, जबकि इसकी जानकारी प्रशासन को है ही नहीं। भूमाफिया ने इस पर पर निर्माण भी शुरू कर दिया। यह सब सामने आया, भूत पूर्व सैनिक की पत्नी द्वारा की गई एक शिकायती की जांच में। 
गौर करें, पहले तो किसी प्रकार की शासकीय भूमि निजी नहीं हो सकती। वहीं कानूनी लड़ाई लड़ी भी जाए तो उसमें शासन को पक्षकार बनाया जाता। जबकि इस मामले में राजस्व महकमे के कुछ लोगों ने मिलीभगत मुकद्मा चलाया और इसकी भनक तक आला अधिकारी को नहीं लगी। यह शिकायत बैरागढ़ कलां निवासी शारदा मीना ने कलेक्टर निकुंज कुमार श्रीवास्तव को मय दस्तावेजों के की थी। शारदा मीना का पति बारेलाल मीना भूतपूर्व सैनिक हैं। यहां इनके पिता लीलाकिशन मीना पटवारी हलका नंबर 23 खसरा नंबर 113 रकबा 1.0488 हेक्टेयर पर सालों से खेती करते रहे। इसी आधार पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल दिनेशचंद्र गोयल ने भी कलेक्टर को यह जमीन विधिवत पूर्व सैनिक को आवंटित करने के लिए लिख चुके हैं। दूसरी ओर, फौजी को जमीन आवंटन की प्रक्रिया विचाराधीन रहते बारेलाल के रिश्तेदार दौलतरात मीना इस जमीन पर कब्जा करके राजस्व महकमे की मिलीभगत से फसल काट रहे हैं। जमीन सरकारी होने से दौलतराम मीना का दावा है कि, कब्जे के आधार पर जमीन का मालिकाना हक मिल गया है। 

शासन को पता ही नहीं 
दौलतरात मीना ने 21वें व्यवहार न्यायाधीश, वर्ग-2 के सामने याचिका पेश करके अपने पक्ष में जमीन का मालिकाना हक घोषित करने और बारेलाल, शारदा मीना और उनके बेटों करण एवं प्रमोद मीणा से 24 हजार रुपए बतौर फसल नुकसानी दिलाने की मांग की थी। इस मुकद्में शासन को पक्षकार नहीं बनाया गया। हालांकि, न्यायालय ने इस मुकद्में को वर्ष 2011 में ही खारिज कर दिया, लेकिन मालिकाना हक का सवाल अभी भी उलझा हुआ है। दूसरी ओर, इसकी शिकायत होने के बाद भी राजस्व महकमे ने अभी तक कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में बीते 30 साल कब्जा बताकर जमीन को निजी घोषित कराने के लिए फिर से चालें चली जा रही हैं। 

दौलतराम ने किया कब्जा 
शारदा और बारेलाल मीना का परिवार खसरा नंबर 158, रकबा 24 डेसीमल में मकान बनाकर रहता है। इसके 10 डेसीमल हिस्से पर इनका मकान और कब्जा है। बाकी 90 प्रतिशत जमीन को दौलतराम मीना ने अपनी निजी बताकर परसराम नामक व्यक्ति को बेच दी है। परसराम इस पर मकान बना रहा है, जिससे फौजी परिवार का जीना हराम हो गया है। अब इस सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त भी होने लगी है। 

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