-ग्राम मोरदा में 10 एकड़ भूमि पर बिना अनुमति काट रहे थे प्लाट
-खरीदी-बिक्री और नामांतरण भी बंद
-विधायकों के हस्तक्षेप बाद हरकत में आया जिला प्रशासन
भोपाल।
शीतल समूह के ग्राम मोरगा के प्रोजेक्ट शीतल नाथ पर रोक लगा दी है। अनुविभागीय अधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने यह आदेश शुक्रवार को जारी किए। हुजूर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह 10.54 एकड़ भूमि पर बिना अनुमति व डायर्वसन के प्लाट काटे जा रहे थे।
बिल्डर ने इस जमीन पर रोड निर्माण व अन्य कंस्ट्रक्शन कर दिया है, जबकि बिल्डर को यहां वैधानिक रूप से एसडीएम कार्यालय से प्लाट काटने की अनुमति नहीं मिली है। वहीं बिल्डर ने इसके लिए आवेदन भी नहीं किया था। इसी के साथ एसडीएम ने खरीदी-बिक्री, रजिस्ट्री व नामांतरण पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। हुजूर क्षेत्र के तारासेवनिया के पास ग्राम मोरगा में बिल्डर द्वारा प्लाट काटे जा रहे थे। यहां शीतल समूह 4.27 हेक्टेयर, 10.5469 एकड़ पर प्लाट काट विक्रय कर रहा है। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि 5 अप्रैल को नेमीचंद जैन नामक व्यक्ति ने इस संबंध में शिकायत की थी। इसकी जांच में पता चला कि कि यह जमीन शीतलनाथ बिल्डर्स प्रायवेट लिमिटेड कंपनी के नाम पर है। पटवारी ने इसकी रिपोर्ट तैयार की, इस आधार पर शीतल नाथ बिल्डर्स प्रायवेट लिमिटेड कंपनी के इस प्रोजेक्ट पर पूरी तरह रोक लगा दी है। एसडीएम हुजूर ने ग्राम मोरगा स्थित खसरा क्र.-182, 184/2, 184/2/1, 184/1/1ख , 184/1/2, 192, 195/2ख, 194, 197, 198 की कुल 4.27 हेक्टेयर (10.54 एकड़) जमीन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। बिल्डर ने इस कृषि भूमि का डायर्वसन नहीं कराया है। वहीं निर्माण सहित अन्य अनुमतियां भी नहीं ली है। बिल्डर कंस्ट्रक्शन के आधार पर प्लॉट काटकर बेच रहा था। इसे ध्यान में रखते हुए जमीन की खरीदी-बिक्री, रजिस्ट्री व नामांतरण पर भी रोक लगा तत्काल प्रभाव से लगा दी है।
-मुख्यमंत्री से शिकायत
जिला प्रशासन के सूत्रों की माने तो नेमीचंद जैन जो शीतलनाथ बिल्डर्स के एमडी मुकेश जैन के भाई है। इन्होंने कलेक्टर, विधायक और मुख्यमंत्री से इस प्रोजेक्ट के संबंध में शिकायत की थी। इसके बाद कुछ विधायकों ने इसको लेकर आश्वासन दिया था। इन्हीं में से कुछ विधायकों ने कलेक्टर को तत्काल संज्ञान लेने को कहा था। इसके बाद कलेक्टर ने एसडीएम हुजूर को मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
-पुरानी दरों से शुल्क जमा है
डायर्वसन शुल्क को लेकर रोक लगाई है। हमने व्यापवर्तन की पुरानी दरों के हिसाब से शुल्क जमा कर रखा है, जबकि जिला प्रशासन नई दर पर शुल्क की मांग कर रहा है। ऐसा अकेले मप्र के भोपाल जिले में ही है। इसके चलते प्रोजेक्ट भी महंगे हो रहे हैं।
मुकेश जैन, एमडी, शीतल नाथ ग्रुप
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