-निर्माण में सारे नियम दरकिनार, अफसरों और नेताओं की साजिश
-बिना नोटीफिकेशन किया रूट चेंज और राष्ट्रीय राजमार्ग में निकाली डेडीकेटेड लेन
भोपाल।
बीआरटीएस का संचालन केंद्र सरकार नियम और कानूनों को ताक पर रख कर किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग में ही डेडीकेटेड लेन निकाल डाली। ताज्जुब की बात यह है कि बीआरटीएस के निर्माण से पूर्व क्षेत्रीय विधायकों एवं सांसदों की कमेटी बनाकर उनकी सहमति तक नहीं ली गई। और करोड़ों का प्रोजेक्ट जनता के सिर पर थोंप दिया गया।
डिजाइन और गाइड लाइन का पालन न होने के चलते अब तक 102 एक्सीडेंट हो चुके हैं, जोकि लगातार बढ़ रहे हैं। यह आरोप वॉच लीग की चंदना अरोडा, दिलीप सिंह और प्रकाश सक्सेना ने लगाए। यह बुधवार को मीडिया चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा, अब बीआरटीएस के खिलाफ कोर्ट जाएंगे। उन्होेंने बताया कि बीआरटीएस संचालन के लिए नगर निगम प्रशासन, नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर, प्रमुख सचिव और मुख्य सचिव तक को ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अवाम की जान से खिलवाड़ बंद नहीं हुआ है। सक्सेना ने कहा कि ऐसे में अब हाईकोर्ट में याचिका पेश करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। भोपाल एवं इंदौर नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों और जनता को अंधेरे में रखते हुए बीआरटीएस प्रोजेक्ट पर काम शुरु करके लो फ्लोर बसों का संचालन शुरु कर दिया है।
-ताक पर रखे नियम
-बीसीएलएल (भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड) एआईसीटीएसएल (अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड) का गठन और बसों का संचालन पूर्णत: अवैध है।
-बोर्ड आफिस से मिसरोद तक नेशनल हाईवे में डेडीकेटेड लेन बनाने और स्वरुप चेंज करने के लिए एनएच अथॉरिटी से एनओसी तक नहीं ली गई।
-माय बस का संचालन एवं रुट निर्धारण के लिए मोटर वीकल एक्ट के सेक्शन 115 के तहत गजट नोटीफिकेशन नहीं किया गया, इसके बिना संचालन नहीं हो सकता।
-नगर निगम ने केंद्र से मिले बजट को सीवेज, सफाई और पेयजल आपूर्ति जैसे मूलभूत जरुरतों के बजाय बीआरटीएस में झोंक दिया, जिससे शहर में जनता समस्याओं से घिरी है।
-सड़को का चौडीकरण करने से पहले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अनुमति नहीं ली गई, जबकि मास्टर प्लान-2005 के प्रकाश में अनुमति लेना आवश्यक था।
बीआरटीएस के कारण हैं परेशानियां
-बीआरटीएस से यातायात सुलभ, सस्ता और सुचारु होने का दावा किया गया था, लेकिन यातायात जाम की समस्या बढती जा रही है और आए दिन एक्सीडेंट हो रहे हैं। किराया दो बार बढाने के बाद तीसरी बार बढाने का प्रस्ताव तैयार हो चुका है।
-ट्रैफिक लाइट नहीं लगी हैं और नगर निगम के ट्रैफिक कर्मचारी गायब हो चुके हैं। हर रोज करीब 50 हजार लोगोें को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जरुरत है, जबकि माय बसों से अभी 5 हजार यात्री ही सफर कर रहे हैं।
-बिना नोटीफिकेशन किया रूट चेंज और राष्ट्रीय राजमार्ग में निकाली डेडीकेटेड लेन
भोपाल।
बीआरटीएस का संचालन केंद्र सरकार नियम और कानूनों को ताक पर रख कर किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग में ही डेडीकेटेड लेन निकाल डाली। ताज्जुब की बात यह है कि बीआरटीएस के निर्माण से पूर्व क्षेत्रीय विधायकों एवं सांसदों की कमेटी बनाकर उनकी सहमति तक नहीं ली गई। और करोड़ों का प्रोजेक्ट जनता के सिर पर थोंप दिया गया।
डिजाइन और गाइड लाइन का पालन न होने के चलते अब तक 102 एक्सीडेंट हो चुके हैं, जोकि लगातार बढ़ रहे हैं। यह आरोप वॉच लीग की चंदना अरोडा, दिलीप सिंह और प्रकाश सक्सेना ने लगाए। यह बुधवार को मीडिया चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा, अब बीआरटीएस के खिलाफ कोर्ट जाएंगे। उन्होेंने बताया कि बीआरटीएस संचालन के लिए नगर निगम प्रशासन, नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर, प्रमुख सचिव और मुख्य सचिव तक को ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अवाम की जान से खिलवाड़ बंद नहीं हुआ है। सक्सेना ने कहा कि ऐसे में अब हाईकोर्ट में याचिका पेश करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। भोपाल एवं इंदौर नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों और जनता को अंधेरे में रखते हुए बीआरटीएस प्रोजेक्ट पर काम शुरु करके लो फ्लोर बसों का संचालन शुरु कर दिया है।
-ताक पर रखे नियम
-बीसीएलएल (भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड) एआईसीटीएसएल (अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड) का गठन और बसों का संचालन पूर्णत: अवैध है।
-बोर्ड आफिस से मिसरोद तक नेशनल हाईवे में डेडीकेटेड लेन बनाने और स्वरुप चेंज करने के लिए एनएच अथॉरिटी से एनओसी तक नहीं ली गई।
-माय बस का संचालन एवं रुट निर्धारण के लिए मोटर वीकल एक्ट के सेक्शन 115 के तहत गजट नोटीफिकेशन नहीं किया गया, इसके बिना संचालन नहीं हो सकता।
-नगर निगम ने केंद्र से मिले बजट को सीवेज, सफाई और पेयजल आपूर्ति जैसे मूलभूत जरुरतों के बजाय बीआरटीएस में झोंक दिया, जिससे शहर में जनता समस्याओं से घिरी है।
-सड़को का चौडीकरण करने से पहले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अनुमति नहीं ली गई, जबकि मास्टर प्लान-2005 के प्रकाश में अनुमति लेना आवश्यक था।
बीआरटीएस के कारण हैं परेशानियां
-बीआरटीएस से यातायात सुलभ, सस्ता और सुचारु होने का दावा किया गया था, लेकिन यातायात जाम की समस्या बढती जा रही है और आए दिन एक्सीडेंट हो रहे हैं। किराया दो बार बढाने के बाद तीसरी बार बढाने का प्रस्ताव तैयार हो चुका है।
-ट्रैफिक लाइट नहीं लगी हैं और नगर निगम के ट्रैफिक कर्मचारी गायब हो चुके हैं। हर रोज करीब 50 हजार लोगोें को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जरुरत है, जबकि माय बसों से अभी 5 हजार यात्री ही सफर कर रहे हैं।
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