-पिछड़ा वर्ग उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने निरस्त किया सर्टिफिकेट
-निगम कमिश्नर, कलेक्टर को पत्र लिख कहा-दर्ज कराएं आपराधिक प्रकरण
भोपाल।
वार्ड -29 से भाजपा पार्षद संध्या जाट की पार्षदी खतरे में पड़ गई है। पिछड़ा वर्ग उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने संध्या का जाति प्रमाण-पत्र फर्जी करार दिया है। संध्या को पार्षद के तौर पर दी गई सारी सुविधाएं नगर निगम कमिश्नर और कलेक्टर से वापस लेने को कहा है।
छानबीन समिति ने इसके लिए बकायदा पत्र लिखा है। समिति ने सिफारिश की है कि श्रीमती जाट की पार्षदी की सविधाएं लिए जाने के साथ उन पर खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कराएं। समिति ने संध्या जाट के विरुद्ध सामने आए साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष दिया है। संध्या जाट मप्र राज्य की पिछड़ा वर्ग की सूची के क्रमांक-90 पर दर्ज जाट जाति, जिसका पर परंपरागत व्यवसाय कृषि और मजदूरी दर्ज है। लेकिन श्रीमती जाट अंतिम सुनवाई में भी यह प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकीं। इसके बाद समिति ने पार्षद की सुविधाएं वापस लेने को कहा है।
-क्या है पूरा मामला
2009 में नगर निगम के चुनाव हुए। इसमें वार्ड 29 से भाजपा की तरफ से संध्या जाट मैदान में थी। पिछड़ा वर्ग की सीट होने के चलते इन्होंने ओबीसी समाज का जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था। कांग्रेस की तरफ से लड़ रहीं गीता राठौर को पटखनी दी थी। इधर चुनाव हारने के बाद गीता राठौर ने श्रीमती जाट के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने की शिकायत स्वरूप याचिका जिला अदालत में लगाई। लेकिन समय-सीमा में जवाब नहीं दे पाने के कारण अदालत ने गीता राठौर के आवेदन को निरस्त कर दिया था। इसके बाद श्रीमती राठौर ने नवंबर 2010 में कलेक्टर की जनसुनवाई में श्रीमती जाट के जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती दी। शिकायत के साथ बाकायदा सक्ष्य भी दिए। साथ ही श्रीमती राठौर ने पिछड़ा वर्ग में भी शिकायत की। जनसुनवाई में तत्कालीन कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रकरण अनुसूचित जाति को भेज दिया। प्रकरण पर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जांच शुरू कर दी और छानबीन समिति गठित कर दी। समिति का अध्यक्ष विभाग के अपर मुख्य सचिव को बनाया। साथ ही समिति में विभाग के सचिव, आयुक्त, कार्यालय संचालक आदिम जाति अनुसंधान संस्थान को शामिल किया। इसमें 4 दिसंबर 2013 को प्रकरण की अंतिम सुनवाई हुई। सुनवाई में सभी साक्षों के साथ श्रीमती जाट को उपस्थित होने को कहा गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुई। उनके स्थान पर उनके पति गोविंद सिंह अपने अधिवक्त के साथ आए। सुनवाई के दौरान दोनों ही जाति प्रमाण-पत्र के लिए कोई नया साक्ष्य समिति को प्रस्तुत नहीं कर सके।
-यह है निर्णय
समिति को मिले साक्ष्य और श्रीमती जाट के अधिवक्ता के वहीं पुराने बयानों का किनारे करते हुए निर्णय लिया। समिति ने संध्या का जाति प्रमाण-पत्र राज्य की पिछड़ा वर्ग की सूची के क्रमांक-90 पर दर्ज जाट जाति, जिसका पर परागत व्यवसाय कृषि व मजदूरी के आधार पर नहीं बना है। अत: अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व टीटी नगर द्वारा जारी पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण-पत्र 17 नवंबर 2009 को निरस्त करते हुए राजसात किया जाता है। समिति ने संभागायुक्त, कलेक्टर, एसपी व नगर निगम आयुकत को निर्देश दिए कि इस जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर जो सुविधाएं दी गई हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लें। साथ ही संध्या पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करें।
-अब पाषर्दी पर संकट
जाति प्रमाण पत्र खारिज होने से अब श्रीमती जाट की पाषर्दी पर भी संकट के बादल मंडराने लग हैं। समस्त सुविधाओं के साथ साथ उनकी पाषर्दी भी जाएगी, क्योंकि वार्ड 29 ओबीसी के लिए आरक्षित है और श्रीमती जाट समिति के निर्णय के बाद ओबीसी जाति की नहीं रह गई है। इसके चलते उनकी पाषर्दी खतरे में पड़ गई है।
-निगम कमिश्नर, कलेक्टर को पत्र लिख कहा-दर्ज कराएं आपराधिक प्रकरण
भोपाल।
वार्ड -29 से भाजपा पार्षद संध्या जाट की पार्षदी खतरे में पड़ गई है। पिछड़ा वर्ग उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने संध्या का जाति प्रमाण-पत्र फर्जी करार दिया है। संध्या को पार्षद के तौर पर दी गई सारी सुविधाएं नगर निगम कमिश्नर और कलेक्टर से वापस लेने को कहा है।
छानबीन समिति ने इसके लिए बकायदा पत्र लिखा है। समिति ने सिफारिश की है कि श्रीमती जाट की पार्षदी की सविधाएं लिए जाने के साथ उन पर खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कराएं। समिति ने संध्या जाट के विरुद्ध सामने आए साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष दिया है। संध्या जाट मप्र राज्य की पिछड़ा वर्ग की सूची के क्रमांक-90 पर दर्ज जाट जाति, जिसका पर परंपरागत व्यवसाय कृषि और मजदूरी दर्ज है। लेकिन श्रीमती जाट अंतिम सुनवाई में भी यह प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकीं। इसके बाद समिति ने पार्षद की सुविधाएं वापस लेने को कहा है।
-क्या है पूरा मामला
2009 में नगर निगम के चुनाव हुए। इसमें वार्ड 29 से भाजपा की तरफ से संध्या जाट मैदान में थी। पिछड़ा वर्ग की सीट होने के चलते इन्होंने ओबीसी समाज का जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था। कांग्रेस की तरफ से लड़ रहीं गीता राठौर को पटखनी दी थी। इधर चुनाव हारने के बाद गीता राठौर ने श्रीमती जाट के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने की शिकायत स्वरूप याचिका जिला अदालत में लगाई। लेकिन समय-सीमा में जवाब नहीं दे पाने के कारण अदालत ने गीता राठौर के आवेदन को निरस्त कर दिया था। इसके बाद श्रीमती राठौर ने नवंबर 2010 में कलेक्टर की जनसुनवाई में श्रीमती जाट के जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती दी। शिकायत के साथ बाकायदा सक्ष्य भी दिए। साथ ही श्रीमती राठौर ने पिछड़ा वर्ग में भी शिकायत की। जनसुनवाई में तत्कालीन कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रकरण अनुसूचित जाति को भेज दिया। प्रकरण पर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जांच शुरू कर दी और छानबीन समिति गठित कर दी। समिति का अध्यक्ष विभाग के अपर मुख्य सचिव को बनाया। साथ ही समिति में विभाग के सचिव, आयुक्त, कार्यालय संचालक आदिम जाति अनुसंधान संस्थान को शामिल किया। इसमें 4 दिसंबर 2013 को प्रकरण की अंतिम सुनवाई हुई। सुनवाई में सभी साक्षों के साथ श्रीमती जाट को उपस्थित होने को कहा गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुई। उनके स्थान पर उनके पति गोविंद सिंह अपने अधिवक्त के साथ आए। सुनवाई के दौरान दोनों ही जाति प्रमाण-पत्र के लिए कोई नया साक्ष्य समिति को प्रस्तुत नहीं कर सके।
-यह है निर्णय
समिति को मिले साक्ष्य और श्रीमती जाट के अधिवक्ता के वहीं पुराने बयानों का किनारे करते हुए निर्णय लिया। समिति ने संध्या का जाति प्रमाण-पत्र राज्य की पिछड़ा वर्ग की सूची के क्रमांक-90 पर दर्ज जाट जाति, जिसका पर परागत व्यवसाय कृषि व मजदूरी के आधार पर नहीं बना है। अत: अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व टीटी नगर द्वारा जारी पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण-पत्र 17 नवंबर 2009 को निरस्त करते हुए राजसात किया जाता है। समिति ने संभागायुक्त, कलेक्टर, एसपी व नगर निगम आयुकत को निर्देश दिए कि इस जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर जो सुविधाएं दी गई हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लें। साथ ही संध्या पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करें।
-अब पाषर्दी पर संकट
जाति प्रमाण पत्र खारिज होने से अब श्रीमती जाट की पाषर्दी पर भी संकट के बादल मंडराने लग हैं। समस्त सुविधाओं के साथ साथ उनकी पाषर्दी भी जाएगी, क्योंकि वार्ड 29 ओबीसी के लिए आरक्षित है और श्रीमती जाट समिति के निर्णय के बाद ओबीसी जाति की नहीं रह गई है। इसके चलते उनकी पाषर्दी खतरे में पड़ गई है।
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