शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

बिल बुनियादी सिद्धांतों और संविधान के विपरीत : चौहान

-मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
भोपाल।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को शीतकालीन सत्र में लाए जा रहे प्रस्तावित साम्प्रदायिक हिंसा निवारण विधेयक-2013 को बुनियादी सिद्धांतों एवं संविधान के विपरीत बताया। एक पत्र लिख उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा, इस विधेयक के माध्यम से राज्य सरकारों की विधायी शक्तियों को छिना ही नहीं जा रहा है, बल्कि आपराधिक न्याय शास्त्रों के बुनियादी सिद्धांतों को भी कुचला जा रहा है। यह विधेयक एक ऐसे खतरनाक पूर्वाग्रह ग्रसित है, जिसमें साम्प्रदायिक हिंसा की स्थिति में राज्य की कानून प्रवर्तनकारी शक्ति को ही संदेह के घेरे में लगाया जा रहा है। केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकार के अधिकारों पर अतिक्रमण कर कानून बना रही है। इसमें भू-अर्जन, कृषि, जैव सुरक्षा विधेयक, कृषि उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य विधेयक इसमें उदाहरण स्वरूप देखे जा सकते हैं। उन्होंने पत्र में लिखा, यह प्रवृत्ति संविधान के बुनियादी स्तंभ, परिसंघीय ढ़ांचे को कमजोर करना है। प्रस्ताविक विधेयक के अनुच्छेद-5 और 6 के जरिए वस्तुत: राज्य सरकार की शक्तियों को राष्ट्रीय एवं राज्य मानवाधिकार आयोग को सौंपा जा रहा है। राज्य सरकार की संप्रभु शक्तियों एवं प्रशासनिक अधिकारों को छीनकर इन आयोग को ऐसी कार्यकारी शक्ति दी जा रही हैं। 

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