हाईकोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद भी नगर निगम कमर्चारियों ने लगाई आग
कमिश्नर के आग नहीं लगने देने के निर्देश के चौबीस घंटे बार ही धधक ी खंती
भानपुर कचरा खंती से निकलने वाले जहरीले धुएं से छा गया दिन में ही अंधेरा
भोपाल।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के कडेÞ निर्देशों के बाद भी भानपुर कचरा खंती में गुरुवार दोपहर आग लग गई। नतीजे में भूरा-काला जहरीला धुआं आस पास की बस्तियों में भरने लगा और लाखों लोगों की सांसे देर रात तक घुटती रहीं। दूसरी ओर, नगर निगम कमर्चारियों पर जानबूझकर खंती में आग लगाकर हाईकोर्ट और एनजीटी के आदेशों की खुली अवहेलना करने के विरोध में जलती खंती के सामने और पुराना भानपुर गांव में प्रदर्शन किया।
भानपुर कचरा खंती में गुरुवार दोपहर लगी आग के बाद जहरीला धुआं भानपुर, माहोली, सेमरा गांव की ओर बहने लगा। भानपुर से अयोध्या की ओर जाने वाले वाहन चालकों को रेलवे ओवर ब्रिज के ऊपर पहुंचते ही सांसे घुटने लगती थी। खंती के आसपास की डेढ़ दर्जन बस्तियों में जहरीले धुएं के कारण हाहाकार मच गया और लोग सड़कों पर उतर आए। कई लोगों ने नगर निगम में फोन करके खंती में आग लगने की जानकारी दी, इसके बाद भी शाम तक आग बुझाने के लिए कोशिश तक शुरु नहीं हो सकी थी। खंती से निकलने वाले धुएं के कारण आंखों में तेज जलन के कारण दिखाई देना तक बंद हो गया था। इससे आक्रोशित लोगों ने भानपुर कचरा खंती हटाओ अभियान समिति के बैनर तले ठीक खंती के सामने खडे होकर प्रदर्शन किया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में भानपुर कचरा खंती हटाओ अभियान समिति के अध्यक्ष अशफाक अहमद, उपाध्यक्ष तुलसीराम गौर, मोहम्मद अफजल खान, विवेक साहू, जाहिद अली, वाहिद खान, प्रतापभानू शर्मा, ताहिर अली, इकबाल पटेल, शेख अबरार, आशीष ठाकुर, अजय यादव और दिनेश अहिरवार आदि थे।
एनीजीटी के आदेश की नाफरमानी
भानपुर कचरा खंती हटाओ अभियान समिति के अध्यक्ष अशफाक अहमद और उपाध्यक्ष तुलसीराम गौर ने बताया कि खंती में नगर निगम कमर्चारियों के जानबूझकर आग लगाने के नतीजे में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सामने पर्यावरण को हो रहे घातक नुकसान के बारे में सच्चाई पेश करेंगे। समिति ने कहा कि, एनजीटी ने एक विशेषज्ञ टीम को मौके पर जांच के लिए भेजने का भी निर्णय किया था, ऐसे में विशेषज्ञ टीम को बस्तियों में फैली बीमारियों के साथ ही भूजल प्रदूषित होने और फसलें बबार्द हो जाने का ब्यौरा पेश किया जाएगा। एनजीटी को बताया जाएगा कि, खंती में शहरभर का कचरा खुले में अवैज्ञानिक तरीके से फेंका जा रहा है। कचरे में मेडिकल और इंडस्ट्रीयल वेस्ट के अलावा बीमारियों के कारण मरने वाले जानवरों के शव भी होते हैं। इनके सड़ने पर भयंकर दुर्गंध फैलती है और बीमारियों के वाइरस हवा के साथ वातावरण में फैल जाते हैं, जिससे आस पास के रहवासी गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में आ चुके हैं।
एक्सपर्ट व्यू--
नगर निगम अफसरों की जिम्मेदारी तय होकर कारर्वाई की जाए
-कृपाशंकर शर्मा, पूर्व मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन
बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि, घनी बस्ती के बीच कचरा खंती है, जिसमें आग लगने के बाद आस पास की आबादी को जहरीला धुआं और बदबू की यंत्रणा भुगतनी पड़ती है। नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि, हाईकोर्ट और एनजीटी के निर्देशों का पालन हर हालत में करवाए, ताकि खंती में आग नही लग सके। हालांकि, भानपुर कचरा खंती में आग लगना बंद नहीं हुई है। यह कंटेम्ट आॅफ कोर्ट है, जिसके लिए जिम्मेदारी तय करके संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कारर्वाई होनी चाहिए। वैसे भी सालभर से ज्यादा हो गया है, आदमपुर छावनी में नई लैंडफिल साइट के लिए भूमि आंवटन हुए और एक करोड़ रुपया मिले हुए। ऐसे में अब तक खंती शिफ्टिंग की प्रक्रिया को काफी आगे बढ़ जाना चाहिए था, लेकिन लापरवाही के चलते प्रक्रिया शुरु तक नहीं हो सकी है। अकाउंटेबिलिटी तय नहीं होने से गैरजिम्मेदार अधिकारियों के हौंसले बढ़ते हैं। कचरा खंती के कारण लाखों लोगों के कष्ट सहने और शिफ्टिंग नहीं होने के लिए क्षेत्रीय पार्षद, महापौर और विधायक से लेकर नगर निगम के संबंधित अधिकारी जिम्मेदार हैं, जिनके खिलाफ कारर्वाई होनी चाहिए।
कमिश्नर के आग नहीं लगने देने के निर्देश के चौबीस घंटे बार ही धधक ी खंती
भानपुर कचरा खंती से निकलने वाले जहरीले धुएं से छा गया दिन में ही अंधेरा
भोपाल।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के कडेÞ निर्देशों के बाद भी भानपुर कचरा खंती में गुरुवार दोपहर आग लग गई। नतीजे में भूरा-काला जहरीला धुआं आस पास की बस्तियों में भरने लगा और लाखों लोगों की सांसे देर रात तक घुटती रहीं। दूसरी ओर, नगर निगम कमर्चारियों पर जानबूझकर खंती में आग लगाकर हाईकोर्ट और एनजीटी के आदेशों की खुली अवहेलना करने के विरोध में जलती खंती के सामने और पुराना भानपुर गांव में प्रदर्शन किया।
भानपुर कचरा खंती में गुरुवार दोपहर लगी आग के बाद जहरीला धुआं भानपुर, माहोली, सेमरा गांव की ओर बहने लगा। भानपुर से अयोध्या की ओर जाने वाले वाहन चालकों को रेलवे ओवर ब्रिज के ऊपर पहुंचते ही सांसे घुटने लगती थी। खंती के आसपास की डेढ़ दर्जन बस्तियों में जहरीले धुएं के कारण हाहाकार मच गया और लोग सड़कों पर उतर आए। कई लोगों ने नगर निगम में फोन करके खंती में आग लगने की जानकारी दी, इसके बाद भी शाम तक आग बुझाने के लिए कोशिश तक शुरु नहीं हो सकी थी। खंती से निकलने वाले धुएं के कारण आंखों में तेज जलन के कारण दिखाई देना तक बंद हो गया था। इससे आक्रोशित लोगों ने भानपुर कचरा खंती हटाओ अभियान समिति के बैनर तले ठीक खंती के सामने खडे होकर प्रदर्शन किया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में भानपुर कचरा खंती हटाओ अभियान समिति के अध्यक्ष अशफाक अहमद, उपाध्यक्ष तुलसीराम गौर, मोहम्मद अफजल खान, विवेक साहू, जाहिद अली, वाहिद खान, प्रतापभानू शर्मा, ताहिर अली, इकबाल पटेल, शेख अबरार, आशीष ठाकुर, अजय यादव और दिनेश अहिरवार आदि थे।
एनीजीटी के आदेश की नाफरमानी
भानपुर कचरा खंती हटाओ अभियान समिति के अध्यक्ष अशफाक अहमद और उपाध्यक्ष तुलसीराम गौर ने बताया कि खंती में नगर निगम कमर्चारियों के जानबूझकर आग लगाने के नतीजे में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सामने पर्यावरण को हो रहे घातक नुकसान के बारे में सच्चाई पेश करेंगे। समिति ने कहा कि, एनजीटी ने एक विशेषज्ञ टीम को मौके पर जांच के लिए भेजने का भी निर्णय किया था, ऐसे में विशेषज्ञ टीम को बस्तियों में फैली बीमारियों के साथ ही भूजल प्रदूषित होने और फसलें बबार्द हो जाने का ब्यौरा पेश किया जाएगा। एनजीटी को बताया जाएगा कि, खंती में शहरभर का कचरा खुले में अवैज्ञानिक तरीके से फेंका जा रहा है। कचरे में मेडिकल और इंडस्ट्रीयल वेस्ट के अलावा बीमारियों के कारण मरने वाले जानवरों के शव भी होते हैं। इनके सड़ने पर भयंकर दुर्गंध फैलती है और बीमारियों के वाइरस हवा के साथ वातावरण में फैल जाते हैं, जिससे आस पास के रहवासी गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में आ चुके हैं।
एक्सपर्ट व्यू--
नगर निगम अफसरों की जिम्मेदारी तय होकर कारर्वाई की जाए
-कृपाशंकर शर्मा, पूर्व मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन
बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि, घनी बस्ती के बीच कचरा खंती है, जिसमें आग लगने के बाद आस पास की आबादी को जहरीला धुआं और बदबू की यंत्रणा भुगतनी पड़ती है। नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि, हाईकोर्ट और एनजीटी के निर्देशों का पालन हर हालत में करवाए, ताकि खंती में आग नही लग सके। हालांकि, भानपुर कचरा खंती में आग लगना बंद नहीं हुई है। यह कंटेम्ट आॅफ कोर्ट है, जिसके लिए जिम्मेदारी तय करके संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कारर्वाई होनी चाहिए। वैसे भी सालभर से ज्यादा हो गया है, आदमपुर छावनी में नई लैंडफिल साइट के लिए भूमि आंवटन हुए और एक करोड़ रुपया मिले हुए। ऐसे में अब तक खंती शिफ्टिंग की प्रक्रिया को काफी आगे बढ़ जाना चाहिए था, लेकिन लापरवाही के चलते प्रक्रिया शुरु तक नहीं हो सकी है। अकाउंटेबिलिटी तय नहीं होने से गैरजिम्मेदार अधिकारियों के हौंसले बढ़ते हैं। कचरा खंती के कारण लाखों लोगों के कष्ट सहने और शिफ्टिंग नहीं होने के लिए क्षेत्रीय पार्षद, महापौर और विधायक से लेकर नगर निगम के संबंधित अधिकारी जिम्मेदार हैं, जिनके खिलाफ कारर्वाई होनी चाहिए।
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