-एनजीटी की टीम करेगी जांच
भोपाल।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गुरुवार को भानपुर खंती और बड़े तालाब कैचमेंट एरिए को लेकर अफसरों की क्लॉस ली। भानपुर खंती को लेकर एनजीटी ने कहा, पर्यावरण को किसी भी कीमत पर नुकासन पहुंचने नहीं दिया जाएगा। एनजीटी की विशेषज्ञों की टीम मौके पर जांच करेगी। वहीं तालाब के कैचमेंट एरिए में अतिक्रमण और अवैधानिक निर्माण को सख्ती से रोकने अधिकारियों से कहा।
इधर मंत्रालय में भानपुर कचरा खंती हटाओ अभियान समिति के अध्यक्ष अशफाक अहमद और उपाध्यक्ष तुलसीराम गौर मुख्य सचिव एंटोनी डिसा से मिले। उन्होंने बताया, करीब डेढ़ साल से खंती शिफ्टिंग की फाइल नगरीय प्रशासन विभाग में लंबित पड़ी हुई है। धुएं और बदबू के कारण यहां के रहवासी नारकीय जिंदगी जी रहे हैं। इससे हजारों एकड़ कृषि भूमि तबाह हो चुकी है। श्री डीसा ने जांच करवाने के साथ ही खंती को जल्द से जल्द आदमपुर छावनी में शिफ्ट करवाने का आश्वासन दिया। साथ ही कहा, खंती अब तक क्यों नहीं हटाई गई, इसको लेकर भी अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। दोनो ने बताया, खंति शिफ्टिंग को लेकर राज्य सरकार ने एक करोड़ रुपए नगर निगम को दिए थे और इसके साथ ही राजस्व विभाग ने भी आदमपुर छावनी में 64 एकड़ जमीन का आवंटन भी किया जा चुका है। पर किसी प्रकार का कोई काम शुरू ही नहीं हुआ। नगर निगम के अधिकारियों ने जानबूझकर खंती की शिफ्टिंग को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
-गलत तरीके से फैंक रहे कचरा
कचरा खंती में 1974-75 से कचरा डंप किया जा रहा है। नगर निगम हर रोज शहर में पैदा होने वाले 700 टन कचरे में से 400 टन से ज्यादा कचरा बटोर कर इस खंती में अवैज्ञानिक तरीके से फेंक रहा है। कचरे में मेडिकल वेस्ट, इंडस्ट्रीयल वेस्ट, मरे और सड़े हुए जानवर के साथ ही प्लास्टिक होती हैं। इनको डिस्पोज करने का कोई विशेषज्ञ दल या संसाधन नहीं होने के नतीजे में नगर निगम कर्मचारी आग लगाते हैं।
महीनेभर से नहीं बुझी है खंती की आग
हाईकोर्ट के 15 मार्च,2009 को दिए गए कडेÞ आदेशों के बाद भी खंती में नगर निगम कमर्चारी आग लगा रहे हैं, नतीजे में महीनेभर से खंती में आग लगी है। जहरीले धुएं का कोहरा इलाके में छाया रहता है। गहरे काले धुएं के कारण दस-पंद्रह कदम आगे का कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। खंती के जहरीले धुएं के कारण आस पास की 40 से ज्यादा बस्तियों के रहवासियों, विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं, कई अस्पताल में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं एंव बीमार रोगियों के स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ा है। कचरा खंती के जहरीले धुएं के कारण आस पास के गांवों के किसान बर्बाद हो चुके हैं, क्योंकि खेतों में खंती के कचरे में आने वाली प्लास्टिक पन्नियां भर जाती हैं। इससे न तो जुताई हो पाती है और न ही फसल पैदा हो पा रही है। खंती की आग से निकलने वाली चिंगारियों के कारण खेतों में खड़ी फसलें जल रही हैं।
भोपाल।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गुरुवार को भानपुर खंती और बड़े तालाब कैचमेंट एरिए को लेकर अफसरों की क्लॉस ली। भानपुर खंती को लेकर एनजीटी ने कहा, पर्यावरण को किसी भी कीमत पर नुकासन पहुंचने नहीं दिया जाएगा। एनजीटी की विशेषज्ञों की टीम मौके पर जांच करेगी। वहीं तालाब के कैचमेंट एरिए में अतिक्रमण और अवैधानिक निर्माण को सख्ती से रोकने अधिकारियों से कहा।
इधर मंत्रालय में भानपुर कचरा खंती हटाओ अभियान समिति के अध्यक्ष अशफाक अहमद और उपाध्यक्ष तुलसीराम गौर मुख्य सचिव एंटोनी डिसा से मिले। उन्होंने बताया, करीब डेढ़ साल से खंती शिफ्टिंग की फाइल नगरीय प्रशासन विभाग में लंबित पड़ी हुई है। धुएं और बदबू के कारण यहां के रहवासी नारकीय जिंदगी जी रहे हैं। इससे हजारों एकड़ कृषि भूमि तबाह हो चुकी है। श्री डीसा ने जांच करवाने के साथ ही खंती को जल्द से जल्द आदमपुर छावनी में शिफ्ट करवाने का आश्वासन दिया। साथ ही कहा, खंती अब तक क्यों नहीं हटाई गई, इसको लेकर भी अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। दोनो ने बताया, खंति शिफ्टिंग को लेकर राज्य सरकार ने एक करोड़ रुपए नगर निगम को दिए थे और इसके साथ ही राजस्व विभाग ने भी आदमपुर छावनी में 64 एकड़ जमीन का आवंटन भी किया जा चुका है। पर किसी प्रकार का कोई काम शुरू ही नहीं हुआ। नगर निगम के अधिकारियों ने जानबूझकर खंती की शिफ्टिंग को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
-गलत तरीके से फैंक रहे कचरा
कचरा खंती में 1974-75 से कचरा डंप किया जा रहा है। नगर निगम हर रोज शहर में पैदा होने वाले 700 टन कचरे में से 400 टन से ज्यादा कचरा बटोर कर इस खंती में अवैज्ञानिक तरीके से फेंक रहा है। कचरे में मेडिकल वेस्ट, इंडस्ट्रीयल वेस्ट, मरे और सड़े हुए जानवर के साथ ही प्लास्टिक होती हैं। इनको डिस्पोज करने का कोई विशेषज्ञ दल या संसाधन नहीं होने के नतीजे में नगर निगम कर्मचारी आग लगाते हैं।
महीनेभर से नहीं बुझी है खंती की आग
हाईकोर्ट के 15 मार्च,2009 को दिए गए कडेÞ आदेशों के बाद भी खंती में नगर निगम कमर्चारी आग लगा रहे हैं, नतीजे में महीनेभर से खंती में आग लगी है। जहरीले धुएं का कोहरा इलाके में छाया रहता है। गहरे काले धुएं के कारण दस-पंद्रह कदम आगे का कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। खंती के जहरीले धुएं के कारण आस पास की 40 से ज्यादा बस्तियों के रहवासियों, विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं, कई अस्पताल में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं एंव बीमार रोगियों के स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ा है। कचरा खंती के जहरीले धुएं के कारण आस पास के गांवों के किसान बर्बाद हो चुके हैं, क्योंकि खेतों में खंती के कचरे में आने वाली प्लास्टिक पन्नियां भर जाती हैं। इससे न तो जुताई हो पाती है और न ही फसल पैदा हो पा रही है। खंती की आग से निकलने वाली चिंगारियों के कारण खेतों में खड़ी फसलें जल रही हैं।
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