अफसर ले रहे चुनावी ट्रेनिंग, बाबू कर रहे मौज
भोपाल।
कोई अपनी जरूरत के मुताबिक प्रमाणपत्रों के लिए पहुंचा था तो किसी को अपनी पेशी देनी थी,कोई यहां अपने जमीन संबंधी कामों के लिए आया था लेकिन टेबलों पर साहब की गैरमौजूदगी थी। नतीजतन बाबुओं का भी ज्यादा वक्त अपनी कुर्सी के बजाए चाय-दुकानों पर गुजर रहा है।
यह हालात देखने को मिल रहे है कलेक्टोरेट कार्यालय में। अगले एक-दो दिन भी यहीं स्थिति रहने की संभावना है। वजह राजस्व और नजूल से जुड़े अधिकारियों को दिया जा रहा निर्वाचन प्रशिक्षण है। प्रशासन अकादमी में दिए जाने वाले इस प्रशिक्षण में राजस्व वृत्त के करीब 28 अधिकारियों को शामिल किया गया है। इनमें एसडीएम,तहसीलदार,नायब तहसीलदार,भू-अभिलेख अधिकारी शामिल हैं।
कलेक्टोरेट में यह काम हो रहे प्रभावित
अधिकारियों की गैर-मौजूदगी के चलते क्लेक्टोरट में होने वाले राजस्व संबंधी सारे काम प्रभावित है। इधर यहां होने वाली विभिन्न पेशियों को भी आगामी तारीखें जारी कर दी गई है। अधिकारियों के दस्तखत न होने के चलते यहां के बाबुओं ने भी किसी तरह के नए काम को हाथ में लेने से इंकार कर दिया है।
मुश्किल से आए,खाली हाथ गए
ग्राम गुनगा से आए जय विश्वकर्मा ने बताया कि वे अपनी जमीन की लीज का रिन्यूवल कराने आए थे। सुबह घर से निकलकर दो-तीन वाहन बदल वे क्लेक्टोरट कार्यालय पहुंचे हैं। यहां साहब लोग ही नहीं है। बाबू ने कह दिया कि अब काम अगले सप्ताह ही हो पाएगा। जमीन संबंधी मामले की पेशी पर आए नजीर अहमद ने कहा कि अगली तारीख थमा दी गई है। बार-बार आने में जहां समय खराब हो रहा है, वहीं पैसा भी खर्च हो रहा है।
मिल जाता है बहाना
ऑल इंडिया इस्लामी त्योहार कमेटी के अध्यक्ष रईस आजम ने कहा कि कलेक्टर ऑफिस में अधिकारी-कर्मचारी लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए चक्कर लगवाते है। कोई शासकीय काम,प्रशिक्षण या डयूटी मिल जाने पर यह स्थिति और बदतर हो जाती है।
इनका कहना
निर्वाचन आयोग द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। अधिकारियों की उसमें शामिल होने की अनिवार्यता है। काम लंबित न हो, ऐसे प्रयास किए जा रहे है। निशांत वरवड़े, कलेक्टर
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