बुधवार, 5 जून 2013

अटल योजना से 'ज्योति' गायब, विभाग को करंट की दरकार

-ग्रामीण क्षेत्र में हालत ज्यादा खराब 
भोपाल। 
ग्रामीणों का गर्मी में गला तर नहीं हो पा रहा है। ऐसा नहीं पानी के संसाधन नहीं है। हर खेत में ट्यूबवेल है, लेकिन बिजली के तारों में करंट नहीं। आलम यह है कि जिले से सटे कई ग्रामीण इलाकों में पानी के बर्तन दिन भर खाली पड़े रहते हैं। 
मंगलवार भी ऐसा ही नजारा रहा। सुबह करीब साढ़े सात बजे सीहोर रोड स्थित ग्राम खजूरी सड़क की बिजली गई। इससे सटे गांव बिजली थी पर ग्राम आबादी क्षेत्र में लाइट अचानक चले जाने से रहवासी चौंक गए। उनका साफ कहना था, अब दोपहर 12 बजे ही लाइट आएगी। यह लाईट भी कितनी देर रहेगी, यह भी अब तक पहेली ही है। क्योंकि बिजली विभाग के अधिकारी अपनी मर्जी से बिजली कटौती करते हैं। इसी गांव से करीब आधा किमी दूर किसान नारायणसिंह मेवाड़ा के खेत में लगे ट्यूबवेल पर मोटर चलाकर पानी की टैंकर भरा जा रहा था, तभी गांव से पैदल, साइकिल और मोटर सायकिल पर कुप्पे टांगकर लोग उसी ट्यूबवेल की ओर दौड़ पड़े। किसानों का कहना था, अटल ज्योति केवल नाम की ही रह गई है। अनायस समय बिजली कटौती होने से तो लोगों को प्यासे ही मर जाएंगे। इस बारे में खजूरी सड़क स्थित विद्युत सबस्टेशन के अधिकारियों से भी जानकारी लेनी चाही, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। 

-अधर में लटके काम 
ग्रामीण इलाकों में अटल ज्योति केवल नाम की साबित हो रही है। बिजली न मिल पाने से पानी नहीं मिल पा रहा है। इसी के साथ सड़कों के भी काम अधर में लटके पड़े हैं। केवल कोरा प्रचार-प्रसार किया है। 
विष्णु विश्वकर्मा, सदस्य, जिला पंचायत 

-ग्रामीण भुगदते हैं
किसी से भी कोई भी शिकायत करलो, बिजली अधिकारी से लेकर ऊपर लेवल के अधिकारियों तक सब अपनी मन की करते हैं। केवल ग्रामीण ही इसे भुगदता है। 
अनोखी मानसिंह पटेल, जनपद अध्यक्ष, फंदा

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