-प्रशासन ने कहा पर्याप्त लाभ होगा
-तैयार की योजना, मंत्रणा के बाद बनी कमेटी
भोपाल।
कलेक्टोरेट में गुरुवार को प्रशासन और मिनी बस आपरेटर्स यूनियन के बीच हुई बैठक हुई। इसमें स्पष्ट हो गया कि अब बीआरटीएस मार्ग पर ओवरलेप की स्थिति बना रही मिनी बसों को बंद किया जाएगा। प्रशासन ने लो-फ्लोर बस चलाने को कहा, तो पदाधिकारियों ने तो टूक कह दिया हमें लाभ नहीं होगा तो क्यों बस दौड़ाएं। इन्होंने बकायदा अधिकारियों को खर्च का ब्यौवरा दिया।
बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों ने मिनी बस आपरेटर्स को विकास में भागीदार होने को कहा, जैसे ही यह सवाल किया। वैसे ही आपरेटर्स ने सवालों की झड़ी लगा दी। आपरेटरों का कहना था, फिलहाल जो कमाई हो रही है, वह भविष्य में होगी इसकी क्या गारंटी? लो-फ्लोर बसों के रखरखाव पर कई प्रकार के खर्चे आएंगे। इस पर कलेक्टर निशांत वरवड़े ने तत्काल आयुक्त नगर निगम विशेष गढ़पाले और पुलिस अधीक्षक श्री सक्सेना सहित अन्य अधिकारियों को शामिल करते हुए कमेटी गठित करने को कहा। यह कमेटी लो-फ्लोर बसों के संचालन और इनके इकॉनामिक मॉडल से मिनी बस आपरेटर्स को परिचित कराएगी। उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक अफसरों ने मिलकर संचालन को लेकर एक योजना तैयारी की है। इसमें पांच मिनी बस आपरेटर्स के बीच में एक लो-फ्लोर बस दी जाएगी। इससे होने वाली आय को इन पांचों आपरेटरों के बीच बांटा जाएगा। इस दौरान प्रशासनिक, पुलिस व नगर निगम, यूनियन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
आखिर में कलेक्टर ने कहा, आप हमारे साथ विकास में पार्टनर बनें नई व्यवस्था ये उन्हें लाभ होगा। इससे घाटा नहीं होगा, बल्कि पहले की अपेक्षा ज्यादा लाभ ही मिलेगा। आप केवल काम में जुट जाएं। इस पर आपरेटर्स ने सैधांतिक सहमति दी है7
उठे जो सवाल
- लो-फ्लोर बसों का मैंटेनेंस मिनी बसों की अपेक्षाकृत ज्यादा आएगा।
- एक टायर ही 40 हजार का आता है लो-फ्लोर बस का। यह १० हजार किमी पर बदलना महंगा पड़ेगा।
-आखिरकार कैसे पांच मिनी बस आपरेटर्स के बीच मुनाफा वितरित किया जाएगा। इसके हिसाब में कभी कोई गड़बड़ी नहीं यह कैसे संभव।
-मुनाफा नहीं हुआ तो क्या किया जाएगा?
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