-सिफारिशों से असंतुष्ट आवेदक-अनावेदकों ने हाईकोर्ट में लगाई याचिका
-मानवाधिकार आयोग पर लगे पक्षपात के आरोप
भोपाल।
राज्य मानव अधिकार आयोग पर अब एक पक्षीय निर्णय व पक्षपात करने के आरोप लगने लगे हैं। बीते दो सालों में आयोग के खिलाफ ४६ लोगों ने हाईकोर्ट याचिका लगाई है। याचिका लगाने वालों में आवेदन और अनावेदक दोनों ही शामिल हैं, इन्होंने आयोग से किसी प्रकार की राहत न मिलने की बात कही है।
यह सभी आयोग की सिफारिश से असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट पहुंचे हैं। अधिकांश लोगों का कहना है कि आयोग ने उनके पक्ष को सुने-समझे बिना ही एक पक्षीय निर्णय लेते हुए सिफारिश कर दी है। अब तक हाईकोर्ट में वे लोग अपील करते थे, जिनके खिलाफ सिफारिश की जाती थी या फिर आयोग ही शासन द्वारा जनहित के मुद्दे में की गई सिफारिशों के न मानने पर हाईकोर्ट में अपील करता था। बावजूद इसके अब स्थितियां विपरित दिखाई दे रहीं हैं। पिपलानी थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी आरआर बंसल ने कहा, मैंने संदिग्ध गतिविधियों के संबंध में आनंद सिंह सेंगर को गिरफ्त में लिया है। इस पर सेंगर ने आयोग में शिकायत कर दी, जबकि थाने में सेंगर के विरुद्ध प्रकरण दर्ज था। इसके बावजूद आयोग ने एक भी नहीं सुनी। इससे बतौर शासकीय कर्मचारी होने के चलते मैं आहत था, जिस कारण हाईकोर्ट में अपील की।
-ऐसे हैं कुछ मामले
सराफा व्यवसायी संजय अग्रवाल, इन्होंने बहुचर्चित जिला बदर के मामले में आयोग के खिलाफ अपील की है। संजय अग्रवाल ने आयोग पर आरोप लगाए हैं कि आयोग ने अपने ही अनुसंधान दल की रिपोर्ट को अनदेखा किया है। रिपोर्ट को देखा नहीं, जबकि रिपोर्ट में विस्तृत जानकारी थी। तीन साल बाद भी आयोग ने इस पर किसी प्रकार का फैसला नहीं दिया।
...और कर दिया दरकिनार
आयोग के खिलाफ ऐशबाग थाने के तत्कालीन थाना निरीक्षक कुबेर सिंह, एमएल चौधरी सहित अन्य चार पुलिस कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में अपील की है। आयोग में ऐशबाग निवासी नगीना खान ने शिकायत की थी कि उसके पति शाहवर आलम को थाने में बंद कर मारपीट की गई है। इस पर आयोग ने तत्कालीन थाना निरीक्षक सहित चार पुलिस कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच करने और क्षतिपूर्ति की राशि सभी से वसूलने के निर्देश दिए थे।
श्री सिंह का कहना है कि आयोग ने उनका पक्ष सुना तो लेकिन इसे दर किनार कर दिया। हमारे पास संबंधित व्यक्ति के खिलाफ साक्ष्य थे। बावजूद इसके आयोग ने हमारी एक न सुनी। उन्होंने कहा, पुलिस यदि अपराधियों को हिरासत में लेकर पूछताछ नहीं करेंगी तो क्या किया जाए। अपराधियों से जानकारी और सच्चाई भी तो उगलवाना है। ऐसे में क्या हम अपने कर्तव्य से मुंह मोड़ लें।
-हां असंतुष्ट हैं कई
यह बात सही है, आयोग की सिफारिशों से असंतुष्ट हो करीब 46 लोगों ने कोर्ट याचिका दायर की है। कोर्ट में कई मामले ऐसे आए हैं, जिसमें हाईकोर्ट ने आयोग की सिफारिशों से असहमति जताई है। कोर्ट में अपील करने वाले के पक्ष में निर्णय दिया है।
कुलदीप जैन, उप सचिव, मानव अधिकार आयोग
-इसलिए जाते हैं कोर्ट
हाईकोर्ट में अपील करने वालों में उन लोगों की सं या अधिक है जिन्हें आयोग की सिफारिशों के बावजूद सरकार की तरफ से कोई राहत प्रदान नहीं की गई है। जहां तक पुलिस से संबंधित सिफारिशों की बात है तो वे पुलिस अधिकारी जिनके खिलाफ आयोग द्वारा सिफारिश की जाती है वे इन सिफारिशों से होने वाले नुकसान से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण में जाते है।
रोहित मेहता
संयुक्त संचालक,जनसंपर्क
राज्य मानवाधिकार आयोग
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