-मंडी बोर्ड में प्रतिनियुक्त अधिकारियों से लटके एक दशक से मसले पर फैसला
भोपाल।
विधानसभा में मामला उठने और जबलपुर हाईकोर्ट डबल बेंच की जवाबदेही के बाद राज्य शासन ने मंगलवार को मप्र राज्य कृषि उपज (विपणन) मंडी बोर्ड में बीते एक दशक से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत आला अधिकारियों का मंडी बोर्ड में संविलयन आदेश जारी कर दिया है। आदेश में शासन ने भी माना कि इन अधिकारियों की आवश्यकता मंडी बोर्ड में प्रमुख है।
उल्लेखनीय है कि मंडी बोर्ड में करीब एक दर्जन से अधिक उच्च पदों पर दुग्ध संघ और तिलहन संघ से आए आला अधिकारियों का कब्जा था, जिसे वर्ष 2004 में प्रशासन ने वैध करार न देते हुए संविलयन को निरस्त कर दिया था, 12 मार्च को उसी मामले में प्रशासन के ही कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के चलते इन प्रतिनियुक्ति वाले अधिकारियों को संविलयन की सौगात मिल गई। बताया जाता है कि संविलयन आदेश के बाद मंडी बोर्ड के मूल पदस्थापना वाले अधिकारियों को उपेक्षा का दंश झेलना पड़ेगा, जिसकी आशंका से ही वे मायूस हो गए हैं।
मामले पर एक नजर
मप्र राज्य कृषि उपज विपणन (मंडी) बोर्ड के मलाईदार उच्च पदों पर वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी जमे हुए हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार 2003 में कांग्रेस के शासनकाल में जब कालूखेड़ा कृषिमंत्री थे, तब उनके सगे भाई केके सिंह जो संयुक्त संचालक पद कार्यरत हैं। इन्होंने भाईचारे का लाभ उठाते हुए इन सभी का वर्ष 2003 में संविलयन मंडी बोर्ड में कराया। हालांकि इसे मंडी के ही अन्य अधिकारियों द्वारा चुनौती दी गई और शासन ने वर्ष 2004 में संविलियन को निरस्त कर दिया था। इसके बाद इन अफसरों ने हाईकोर्ट की शरण ली, लेकिन उच्च न्यायालय ने भी अपने फैसले में प्रदेश शासन द्वारा संविलयन को निरस्त किया जाना सही ठहराया था। इसके उपरांत वर्ष 2008 में इन अफसरों ने हाईकोर्ट की डबलबेंच अदालत में अपील दायर की, जहां मंडी बोर्ड के ओआईसी श्री पवांर ने सत्यापित करते हुए जवाब पेश किया कि शासन द्वारा जो संविलयन निरस्त किया गया, वह सही है। उधर विभागीय सूत्र बताते हैं कि प्रदेश ार में अपर संचालक, ज्वाइंट डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर सहित सचिव व अन्य विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर प्रतिनियुक्ति पर आए अफसरों का ही कब्जा है।
वर्जन
तिलहन संघ व दुग्ध संघ से आए प्रतिनियुक्ति वाले अधिकारियों के संविलयन के आदेश मंगलवार शाम को प्रदेश शासन ने जारी कर दिए हैं।
महेन्द्रज्ञानी, एमडी, मंडी बोर्ड
भोपाल।
विधानसभा में मामला उठने और जबलपुर हाईकोर्ट डबल बेंच की जवाबदेही के बाद राज्य शासन ने मंगलवार को मप्र राज्य कृषि उपज (विपणन) मंडी बोर्ड में बीते एक दशक से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत आला अधिकारियों का मंडी बोर्ड में संविलयन आदेश जारी कर दिया है। आदेश में शासन ने भी माना कि इन अधिकारियों की आवश्यकता मंडी बोर्ड में प्रमुख है।
उल्लेखनीय है कि मंडी बोर्ड में करीब एक दर्जन से अधिक उच्च पदों पर दुग्ध संघ और तिलहन संघ से आए आला अधिकारियों का कब्जा था, जिसे वर्ष 2004 में प्रशासन ने वैध करार न देते हुए संविलयन को निरस्त कर दिया था, 12 मार्च को उसी मामले में प्रशासन के ही कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के चलते इन प्रतिनियुक्ति वाले अधिकारियों को संविलयन की सौगात मिल गई। बताया जाता है कि संविलयन आदेश के बाद मंडी बोर्ड के मूल पदस्थापना वाले अधिकारियों को उपेक्षा का दंश झेलना पड़ेगा, जिसकी आशंका से ही वे मायूस हो गए हैं।
मामले पर एक नजर
मप्र राज्य कृषि उपज विपणन (मंडी) बोर्ड के मलाईदार उच्च पदों पर वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी जमे हुए हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार 2003 में कांग्रेस के शासनकाल में जब कालूखेड़ा कृषिमंत्री थे, तब उनके सगे भाई केके सिंह जो संयुक्त संचालक पद कार्यरत हैं। इन्होंने भाईचारे का लाभ उठाते हुए इन सभी का वर्ष 2003 में संविलयन मंडी बोर्ड में कराया। हालांकि इसे मंडी के ही अन्य अधिकारियों द्वारा चुनौती दी गई और शासन ने वर्ष 2004 में संविलियन को निरस्त कर दिया था। इसके बाद इन अफसरों ने हाईकोर्ट की शरण ली, लेकिन उच्च न्यायालय ने भी अपने फैसले में प्रदेश शासन द्वारा संविलयन को निरस्त किया जाना सही ठहराया था। इसके उपरांत वर्ष 2008 में इन अफसरों ने हाईकोर्ट की डबलबेंच अदालत में अपील दायर की, जहां मंडी बोर्ड के ओआईसी श्री पवांर ने सत्यापित करते हुए जवाब पेश किया कि शासन द्वारा जो संविलयन निरस्त किया गया, वह सही है। उधर विभागीय सूत्र बताते हैं कि प्रदेश ार में अपर संचालक, ज्वाइंट डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर सहित सचिव व अन्य विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर प्रतिनियुक्ति पर आए अफसरों का ही कब्जा है।
वर्जन
तिलहन संघ व दुग्ध संघ से आए प्रतिनियुक्ति वाले अधिकारियों के संविलयन के आदेश मंगलवार शाम को प्रदेश शासन ने जारी कर दिए हैं।
महेन्द्रज्ञानी, एमडी, मंडी बोर्ड
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें