भूतपूर्व सैनिकों के सम्मेलन में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल डीसी गोयल ने बताया, भूतपूर्व सैनिकों की पेंशन में 6 जनवरी, 06 से बढ़ोतरी की गई है। इसका एरियर्स दिया गया है। अगर एरियर्स नहीं मिला है तो इस सिलसिले में उस बैंक से संपर्क किया जाए जहां से पेंशन ली जा रही है। इसी तरह उन्होंने भूतपूर्व सैनिकों से कहा कि पता बदल जाने की स्थिति में इसकी जानकारी जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में अवश्य दी जाए, जिससे कार्यालय में पता दुरुस्त किया जा सके।
राजधानी की लाईफ लाइन बड़ी झील को लेकर जिला प्रशासन ने जिस तरह की लापरवाही बरती है, उससे इस बात की आशंका बढ़ गई है कि इस मानूसन में झील का पेट पूरी तरह भर पाएगा। झील में पानी के बड़े
स्त्रोतों की तरफ प्रशासन से लेकर पंचायत तक ने पूरी तरह लापरवाही बरती। न तो जलाभिषेक अभियान कहीं दिखा और न ही उन रास्तों, नालों की सफाई की जिनके रास्ते झील में पानी पहुंचता है। जिन रास्तों और नालों से सीहोर जिले में बहने वाली कोलांस नदी का पानी बड़ी झील में पहुंचता है, वे मिट्टी से पटे पड़े हैं। न तो नालों की सफाई करके मिट्टी निकाली गई और न ही कैचमेंच एरिया में फैले अतिक्रमण को हटाया गया। स्थिति यह है कि नालों को दफन कर लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिससे नदी का रास्ता कहीं दिखाई नहीं दे रहा। हालांकि प्रशासनिक अफसर इस बात को सिरे से नकार रहे हैं। उनका कहना है कि यह रूटीन प्रक्रिया है, जो साल ार चलती है।
गांवों में पीने के पानी और जल संरक्षण के लिए सरकार का महत्वाकांक्षी जला िाषेक अ िायान इस साल ाोपाल जिले में शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में बड़े तालाब तक पानी आने के मु य जल स्त्रोत कोलांस नदी की सफाई और गहरीकरण का काम मानसून आने के पहले होता नजर नहीं आ रहा है। साथ ही कैचमेंट क्षेत्र से आने वाला पानी भी तालाब तक पहुंचने में दिक्कत होगी।
-बड़े तालाब को होगा नुकसान
बड़े तालाब को ाोपाल की लाइफ लाइन माना जाता है। इसकी वजह नर्मदा जल आपूर्ति शुरू होने के बाद भी बड़े तालाब के पानी को पीने के लिए सप्लाई किया जा रहा है। तालाब में कोलांस नदी का पानी आता है, जो सीहोर से आकर बड़े तालाब में मिलती है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में नदी किनारे की सफाई और गहरीकरण का काम हर साल किया जाता है ताकि पानी बिना किसी रूकावट के तालाब तक पहुंच सके। साथ ही स्टापडैम में पानी रोककर जल संरक्षण की कवायद की जाती रही है। लेकिन इस बार कहीं ाी ऐसा नहीं दि ाा। स्टाप डैम जर्जर स्थिति में आ गए हैं। नालों में बड़ी-बड़ी झाडिय़ों ने जगह ले ली है, वहीं मिट्टी के टीले जगह-जगह
अवरोध ाड़ा कर रहे हैं।
यह होता है जला िाषेक अ िायान में
पंचायत एवं ग्रामीण विकास वि ााग के निर्देश पर हर साल मार्च से जून के बीच जल अ िाषेक अ िायान गांवों में चलता है। इसका उद्देश्य जल संरचनाओं को तैयार करके पानी का संग्रहण और जलाशयों तक पानी पहुंचाना है। बीते सालों में इसके लिए प्र ाारी मंत्री, सांसद विधायक तथा सत्ता पक्ष के नेता गांवों में जाकर ाूमिपूजन और कलश यात्रा निकालने में सहयोगी बनते रहे हैं।
इनका कहना है
तालाबों का गहरीकरण व सफाई अ िायान एक रूटीन प्रक्रिया है। यह
साल भर चलता है। इसमें ऐसे नहीं है कि कोई ाास माह निर्धारित
किए जाते हैं।
राकेश श्रीवास्तव, सीईओ जिपं
प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही के चलते इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में
नदी किनारे की सफाई और गहरीकरण के कार्य नहीं हो सके
हैं। जिसके चलते राजधानी की लाईफ लाइन बड़ी झील का पेट ारना
मुश्किल है। हद तो यह है कि अ ाी ाी जि मेदार नींद से नहीं जाग
रहे हैं।
अनोखी मानसिंह पटेल, जनपद अध्यक्ष फंदा
राजधानी की लाईफ लाइन बड़ी झील को लेकर जिला प्रशासन ने जिस तरह की लापरवाही बरती है, उससे इस बात की आशंका बढ़ गई है कि इस मानूसन में झील का पेट पूरी तरह भर पाएगा। झील में पानी के बड़े
स्त्रोतों की तरफ प्रशासन से लेकर पंचायत तक ने पूरी तरह लापरवाही बरती। न तो जलाभिषेक अभियान कहीं दिखा और न ही उन रास्तों, नालों की सफाई की जिनके रास्ते झील में पानी पहुंचता है। जिन रास्तों और नालों से सीहोर जिले में बहने वाली कोलांस नदी का पानी बड़ी झील में पहुंचता है, वे मिट्टी से पटे पड़े हैं। न तो नालों की सफाई करके मिट्टी निकाली गई और न ही कैचमेंच एरिया में फैले अतिक्रमण को हटाया गया। स्थिति यह है कि नालों को दफन कर लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिससे नदी का रास्ता कहीं दिखाई नहीं दे रहा। हालांकि प्रशासनिक अफसर इस बात को सिरे से नकार रहे हैं। उनका कहना है कि यह रूटीन प्रक्रिया है, जो साल ार चलती है।
गांवों में पीने के पानी और जल संरक्षण के लिए सरकार का महत्वाकांक्षी जला िाषेक अ िायान इस साल ाोपाल जिले में शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में बड़े तालाब तक पानी आने के मु य जल स्त्रोत कोलांस नदी की सफाई और गहरीकरण का काम मानसून आने के पहले होता नजर नहीं आ रहा है। साथ ही कैचमेंट क्षेत्र से आने वाला पानी भी तालाब तक पहुंचने में दिक्कत होगी।
-बड़े तालाब को होगा नुकसान
बड़े तालाब को ाोपाल की लाइफ लाइन माना जाता है। इसकी वजह नर्मदा जल आपूर्ति शुरू होने के बाद भी बड़े तालाब के पानी को पीने के लिए सप्लाई किया जा रहा है। तालाब में कोलांस नदी का पानी आता है, जो सीहोर से आकर बड़े तालाब में मिलती है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में नदी किनारे की सफाई और गहरीकरण का काम हर साल किया जाता है ताकि पानी बिना किसी रूकावट के तालाब तक पहुंच सके। साथ ही स्टापडैम में पानी रोककर जल संरक्षण की कवायद की जाती रही है। लेकिन इस बार कहीं ाी ऐसा नहीं दि ाा। स्टाप डैम जर्जर स्थिति में आ गए हैं। नालों में बड़ी-बड़ी झाडिय़ों ने जगह ले ली है, वहीं मिट्टी के टीले जगह-जगह
अवरोध ाड़ा कर रहे हैं।
यह होता है जला िाषेक अ िायान में
पंचायत एवं ग्रामीण विकास वि ााग के निर्देश पर हर साल मार्च से जून के बीच जल अ िाषेक अ िायान गांवों में चलता है। इसका उद्देश्य जल संरचनाओं को तैयार करके पानी का संग्रहण और जलाशयों तक पानी पहुंचाना है। बीते सालों में इसके लिए प्र ाारी मंत्री, सांसद विधायक तथा सत्ता पक्ष के नेता गांवों में जाकर ाूमिपूजन और कलश यात्रा निकालने में सहयोगी बनते रहे हैं।
इनका कहना है
तालाबों का गहरीकरण व सफाई अ िायान एक रूटीन प्रक्रिया है। यह
साल भर चलता है। इसमें ऐसे नहीं है कि कोई ाास माह निर्धारित
किए जाते हैं।
राकेश श्रीवास्तव, सीईओ जिपं
प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही के चलते इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में
नदी किनारे की सफाई और गहरीकरण के कार्य नहीं हो सके
हैं। जिसके चलते राजधानी की लाईफ लाइन बड़ी झील का पेट ारना
मुश्किल है। हद तो यह है कि अ ाी ाी जि मेदार नींद से नहीं जाग
रहे हैं।
अनोखी मानसिंह पटेल, जनपद अध्यक्ष फंदा
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