-राजस्व बढ़ाने लिया फैसला, पंजीयक महानिरीक्षक ने किया बदलाव
-उपबंध की कंडिका चार में संशोधन
भोपाल।
एक बार फिर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि पर प्लॉटों की रजिस्ट्री सस्ती होने का रास्ता खुल गया है। पंजीयक महानिरीक्षक के कलेक्टर गाइडलाइन उपबंधों में कृषि भूमि के लिए बनाए गए उपबंध की कंडिका 4 में संशोधन करने के बाद यह स्थिति बनी है। इसे राजस्व बढ़ाने का तरीका भी कहा जा सकता है।
ऐसी भूमियों पर प्लॉट सस्तें मिलते हैं, वहीं रजिस्ट्री पर भी छूट मिल रही थी, लेकिन लेकिन वर्ष 2013-14 की नई कलेक्टर गाइडलाइन में यह छूट खत्म कर दी गई थी। इसके बाद कृषि भूमि के निर्धारित मूल्य का डेढ़ गुना स्टॉम्प ड्यूटी वसूली जा रही थी। इस कारण रजिस्ट्रियां होना भी न के बराबर हो गया था। यह अव्यपवर्तित (बिना डायवर्शन) कृषि भूमि पर होगी। 1 हजार वर्गमीटर तक तो आवासीय भूखंड की दर से ही स्टॉम्प ड्यूटी लगेगी, लेकिन शेष या इससे अधिक के लिए कृषि भूमि की निर्धारित दर ही लागू होगी, जिस पर स्टॉम्प ड्यूटी तय होगी। पंजीयक महानिरीक्षक ने कृषि भूमि के उपबंध में संशोधन कर लोगों को स्टॉम्प ड्यूटी में थोड़ी राहत दी है। इससे रजिस्ट्रियां बढ़ेेंगी। वहीं ये राहत व्यपवर्तित (डायवर्टेड) भूखंड के लिए नहीं होगी।
-संशोधन जो किया
१० जून को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक हुई। इसमें वर्ष 2013-14 की नई कलेक्टर गाइडलाइन उपबंधों में कृषि भूमि के लिए उपबंध की कंडिका 4 को संशोधित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने 1 जून इस संशोधन आदेश को लागू करने के निर्देश दिए। संशोधन के अनुसार अब लोगों को व्यपवर्तित व अव्यपवर्तित कृषि भूमि, जो नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत व उससे लगे गांवों की होगी। उस पर अलग-अलग स्टॉम्प ड्यूटी अदा करनी होगी। वहीं नई गाइडलाइन के उपबंधों में व्यपवर्तित व अव्यपवर्तित कृषि भूमियों का प्रदर्शित नहीं किया गया था। दोनों प्रकार की भूमियों को व्यपवर्तित ही मानकर स्टॉम्प ड्यूटी ली जा रही थीं। अब संशोधन के आधार पर यदि कृषि भूमि अव्यपवर्तित है और कोई व्यक्ति 1000 वर्गमीटर अथवा इससे कम का भूखंड खरीदता है तो उसे निर्धारित आवासीय भूखंड की दर से स्टॉम्प ड्यूटी देनी होगी। दूसरी ओर यदि प्लाट 1000 वर्गमीटर से बड़ा है तो प्रथम 1000 वर्गमीटर तक तो स्टॉम्प ड्यूटी पूर्व निर्धारित देय होगी। शेष भूमि पर प्रारूप-3 के तहत कृषि भूमि की दर से ही स्टॉम्प ड्यूटी लगेगी। यह परिवर्तन नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत व उससे लगे गांवों की कृषि भूमि के लिए भी मान्य होंगे।
-ये था पूर्व उपबंध -
वर्ष 2013-14 की नई कलेक्टर गाइडलाइन में कई उपबंधों में परिवर्तन किए गए थे। इसमें शहरी क्षेत्र या मास्टर प्लान में शामिल गांवों की कृषि या नजूल भूमि के भूखंडों के मूल्यांकन के उपबंध की कंडिका चार भी शामिल थी। इन उपबंधों में नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और उससे लगी हुई सीमा से लगे गांवों में 1000 वर्गमीटर या इससे कम के प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए भूमि का मूल्यांकन आवासीय विकसित भूखंड के हिसाब से किया जाएगा। यदि प्लॉट का क्षेत्रफल 1000 वर्ग मीटर से अधिक होता है तो एक हजार वर्ग मीटर तक आवासीय भूखंड की दर और शेष भूखंड के लिए सिंचित कृषि भूमि के बाजार मूल्य का डेढ़ गुना मूल्यांकन किया जाएगा। यही डेढ़ गुना राशि कृषि भूमि के भूखंड कराने वाले लोगों को भारी पड़ रही थी। इसके चलते लोग रजिस्ट्रियां नहीं करा रहे थे। हालांकि पूर्व में यह दर पहले 1000 वर्गमीटर या उससे कम के प्लाट खरीदने पर आवासीय विकसित भूखंड की दर का 90 प्रतिशत थी, जबकि नगर पंचायत क्षेत्र में आवासीय विकसित भूखंड की दर की 80 प्रतिशत राशि के आधार पर स्टॉ प ड्यूटी तय की जाती थी।
-इसे ऐसे समझें
आपने अयोध्या नगर क्षेत्र में 4000 वर्गमीटर का कृषि भूमि का प्लाट करीदा। यहां जमीन की कीमत 10 हजार रुपए प्रतिवर्ग मीटर है। इस पर नई गाइडलाइन के हिसाब से 1000 वर्गमीटर तक तो 1000 गुणा 10 हजार रुपए मतबल 1 करोड़ रुपए लगेंगे। वहीं शेष बची हुई 3000 वर्गमीटर भूमि के लिए कृषिभूमि का डेढ़ गुना यानी करीब 45 लाख रुपए। इस तरह1 करोड़ 45 लाख रुपए पर स्टॉम्प ड्यूटी देनी होगी। कंडिका-4 में हुए संशोधन से अब यह राशि 1 करोड़ 30 लाख रुपए हो जाएगी। कुल मिलाकर ेसीधे तौर पर 15 लाख रुपए की राहत मिलेगी।
संशोधन किया है
पंजीयक महानिरीक्षक ने कंडिका-4 के नियमों में संशोधन किया है। उम्मीद है इससे कृषि भूमि के प्लाटों की रजिस्ट्री में तेजी आएगी।
एनएस तोमर, वरिष्ठ जिला पंजीयक, भोपाल
-उपबंध की कंडिका चार में संशोधन
भोपाल।
एक बार फिर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि पर प्लॉटों की रजिस्ट्री सस्ती होने का रास्ता खुल गया है। पंजीयक महानिरीक्षक के कलेक्टर गाइडलाइन उपबंधों में कृषि भूमि के लिए बनाए गए उपबंध की कंडिका 4 में संशोधन करने के बाद यह स्थिति बनी है। इसे राजस्व बढ़ाने का तरीका भी कहा जा सकता है।
ऐसी भूमियों पर प्लॉट सस्तें मिलते हैं, वहीं रजिस्ट्री पर भी छूट मिल रही थी, लेकिन लेकिन वर्ष 2013-14 की नई कलेक्टर गाइडलाइन में यह छूट खत्म कर दी गई थी। इसके बाद कृषि भूमि के निर्धारित मूल्य का डेढ़ गुना स्टॉम्प ड्यूटी वसूली जा रही थी। इस कारण रजिस्ट्रियां होना भी न के बराबर हो गया था। यह अव्यपवर्तित (बिना डायवर्शन) कृषि भूमि पर होगी। 1 हजार वर्गमीटर तक तो आवासीय भूखंड की दर से ही स्टॉम्प ड्यूटी लगेगी, लेकिन शेष या इससे अधिक के लिए कृषि भूमि की निर्धारित दर ही लागू होगी, जिस पर स्टॉम्प ड्यूटी तय होगी। पंजीयक महानिरीक्षक ने कृषि भूमि के उपबंध में संशोधन कर लोगों को स्टॉम्प ड्यूटी में थोड़ी राहत दी है। इससे रजिस्ट्रियां बढ़ेेंगी। वहीं ये राहत व्यपवर्तित (डायवर्टेड) भूखंड के लिए नहीं होगी।
-संशोधन जो किया
१० जून को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक हुई। इसमें वर्ष 2013-14 की नई कलेक्टर गाइडलाइन उपबंधों में कृषि भूमि के लिए उपबंध की कंडिका 4 को संशोधित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने 1 जून इस संशोधन आदेश को लागू करने के निर्देश दिए। संशोधन के अनुसार अब लोगों को व्यपवर्तित व अव्यपवर्तित कृषि भूमि, जो नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत व उससे लगे गांवों की होगी। उस पर अलग-अलग स्टॉम्प ड्यूटी अदा करनी होगी। वहीं नई गाइडलाइन के उपबंधों में व्यपवर्तित व अव्यपवर्तित कृषि भूमियों का प्रदर्शित नहीं किया गया था। दोनों प्रकार की भूमियों को व्यपवर्तित ही मानकर स्टॉम्प ड्यूटी ली जा रही थीं। अब संशोधन के आधार पर यदि कृषि भूमि अव्यपवर्तित है और कोई व्यक्ति 1000 वर्गमीटर अथवा इससे कम का भूखंड खरीदता है तो उसे निर्धारित आवासीय भूखंड की दर से स्टॉम्प ड्यूटी देनी होगी। दूसरी ओर यदि प्लाट 1000 वर्गमीटर से बड़ा है तो प्रथम 1000 वर्गमीटर तक तो स्टॉम्प ड्यूटी पूर्व निर्धारित देय होगी। शेष भूमि पर प्रारूप-3 के तहत कृषि भूमि की दर से ही स्टॉम्प ड्यूटी लगेगी। यह परिवर्तन नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत व उससे लगे गांवों की कृषि भूमि के लिए भी मान्य होंगे।
-ये था पूर्व उपबंध -
वर्ष 2013-14 की नई कलेक्टर गाइडलाइन में कई उपबंधों में परिवर्तन किए गए थे। इसमें शहरी क्षेत्र या मास्टर प्लान में शामिल गांवों की कृषि या नजूल भूमि के भूखंडों के मूल्यांकन के उपबंध की कंडिका चार भी शामिल थी। इन उपबंधों में नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और उससे लगी हुई सीमा से लगे गांवों में 1000 वर्गमीटर या इससे कम के प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए भूमि का मूल्यांकन आवासीय विकसित भूखंड के हिसाब से किया जाएगा। यदि प्लॉट का क्षेत्रफल 1000 वर्ग मीटर से अधिक होता है तो एक हजार वर्ग मीटर तक आवासीय भूखंड की दर और शेष भूखंड के लिए सिंचित कृषि भूमि के बाजार मूल्य का डेढ़ गुना मूल्यांकन किया जाएगा। यही डेढ़ गुना राशि कृषि भूमि के भूखंड कराने वाले लोगों को भारी पड़ रही थी। इसके चलते लोग रजिस्ट्रियां नहीं करा रहे थे। हालांकि पूर्व में यह दर पहले 1000 वर्गमीटर या उससे कम के प्लाट खरीदने पर आवासीय विकसित भूखंड की दर का 90 प्रतिशत थी, जबकि नगर पंचायत क्षेत्र में आवासीय विकसित भूखंड की दर की 80 प्रतिशत राशि के आधार पर स्टॉ प ड्यूटी तय की जाती थी।
-इसे ऐसे समझें
आपने अयोध्या नगर क्षेत्र में 4000 वर्गमीटर का कृषि भूमि का प्लाट करीदा। यहां जमीन की कीमत 10 हजार रुपए प्रतिवर्ग मीटर है। इस पर नई गाइडलाइन के हिसाब से 1000 वर्गमीटर तक तो 1000 गुणा 10 हजार रुपए मतबल 1 करोड़ रुपए लगेंगे। वहीं शेष बची हुई 3000 वर्गमीटर भूमि के लिए कृषिभूमि का डेढ़ गुना यानी करीब 45 लाख रुपए। इस तरह1 करोड़ 45 लाख रुपए पर स्टॉम्प ड्यूटी देनी होगी। कंडिका-4 में हुए संशोधन से अब यह राशि 1 करोड़ 30 लाख रुपए हो जाएगी। कुल मिलाकर ेसीधे तौर पर 15 लाख रुपए की राहत मिलेगी।
संशोधन किया है
पंजीयक महानिरीक्षक ने कंडिका-4 के नियमों में संशोधन किया है। उम्मीद है इससे कृषि भूमि के प्लाटों की रजिस्ट्री में तेजी आएगी।
एनएस तोमर, वरिष्ठ जिला पंजीयक, भोपाल
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