शनिवार, 14 सितंबर 2013

शामियाने की दरें तय, जनरेटर का किराया 10 हजार

-झंडे बैनर को लेकर भी प्रतिनिधियों ने दर्ज कराई आपत्ति 
-चुनाव आयोग को भेजे जाएंगे सुझाव और आपत्तियां
भोपाल। 
विधानसभा सीटों पर मैदान में उतरने वाले प्रत्याशी को कितना खर्च करना है? इस चुनावी खर्चे की गाइडलाइन बनाने पर राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों ने अपने आपत्ति और सुझाव दे दिए हैं। मुख्य रूप से शामियाने (टेंट) और जनरेटर का किराया तय किया गया। जनरेटर के लिए प्रतिदिन 10 हजार रुपए रखे जाने पर प्रतिनिधियों ने एतराज जताया। वहीं वाहन, जनरेटर व झंडे-बैनर को लेकर भी प्रतिनिधियों ने आपत्तियां दर्ज करार्इं। 
यह आपत्त्तियां और सुझाव लिखित व मौखिक दोनों ही तौर पर दिए गए हैं। दूसरी तरफ आयोग ने भी साफ कर दिया है कि गाइडलाइन में जो दरें तय की गई हैं उसमें नाम मात्र का ही बदलाव किया जाएगा। बदलाव से पहले ही यह देखा जाएगा कि यह बदलाव कितना उचित है। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों स्टेंडिंग कमेटी की बैठक में कलेक्टर निशांत वरवड़े ने जिला स्तर पर समिति को सामग्री की कीमते तैयर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे थे। इसके लिए तीन दिन का समय दिया गया था। इसमें सभी प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दे दिए हैं। 

कांग्रेस व बसपा के प्रतिनिधियों ने जिला निर्वाचन आयोग को प्रस्तुत आपत्ति में जनरेटर का प्रतिदिन का किराया 10 हजार रुपए लगाए जाने का विरोध किया। वे बोले इसे कम किया जाए। उन्होंने पंपलेट्स व बैनर झंडे की कीमतों को लेकर भी आपत्ति दर्ज की है। हालांकि उन्होंने वाहनों की दरों का विरोध नहीं किया, लेकिन वाहनों को लेकर सुझाव अवश्य दिया। उनका कहना है कि प्रत्याशियों के रिश्तेदार या मित्र अगर वाहन लगाते हैं, तो उसे आयोग द्वारा तय की गई दरों से दूर र ाा जाए। इधर अन्य सदस्यों ने भी आयोग के समक्ष यह भी सुझाव रखा है कि प्रत्याशियों को अगर उनके करीबी द्वारा बाजार से कम कीमत में झंडे-बैनर दिए जाते हैं तो इन्हें आयोग द्वारा तय की गई दरों से न जोड़ा जाए। भाजपा के प्रतिनिधियों ने कहा, कार्यकर्ताओं द्वारा जो झंडे बैनर दिए जाते हैं उन्हें चुनावी खर्च में शामिल न किया जाए।  

-शामियाने की दरें 
पाईप वाला पंडाल - 300 रुपए प्रति 10 वर्गफीट प्रतिदिन
 पंडाल 15 बाई 30 के शामियाने के साथ - 2.50 रुप्

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