गुरुवार, 12 सितंबर 2013

कलेक्टर ने कहा- एसडीएम देंखे ‘क्या और कितना सही है फैसला’

-अधिवक्ताओं ने सौंपा ज्ञापन, बोले तहसीलदार ने किया अभद्र व्यवहार
-रैगिंग का दोषि मान 15 छात्रों को तहसीलकोर्ट ने हुए भेजा था जेल 
-आज वकील घेरेंगे गोविंदपुरा सर्किल 
भोपाल। 
मंगलवार को गोविंदपुरा तहसील कोर्ट ने इंजीनियरिंग के 15 छात्रों को रैगिंग का दोषि मानते हुए ‘न दलील न अपील’ की तर्ज पर जेल भेज दिया था। कोर्ट ने इनके माता-पिता को भी उपस्थित होने को कहा था, लेकिन बुधवार को मामले में नया पेंच आ गया। वकीलों ने कलेक्टर निशांत वरवड़े को ज्ञापन सौंप गलत निर्णय बता जांच की मांग कर डाली। कलेक्टर ने भी तत्काल एसडीएम गोविंदपुरा को ‘मामला क्या है और क्या उचित है’ देखने को कह दिया। 
सीधे तौर पर तहसीलदार गोविंदपुरा मुकुल गुप्ता का सिर्दद बढ़ता दिखाई दे रहा है। मामला गुरुवार को जितना उछला, उससे ज्यादा शुक्रवार को गरमा सकता है। राजस्व अधिवक्ता कल्याण परिषद ने गोविंदपुरा सर्किल को घेरने का एलान कर दिया। विवाद गुरुवार को मसले में वकील व तहसीलदार के बीच बात चीत और फिर में हॉट टॉक के साथ विवाद में तब्दील हुआ। इसके बाद परिषद के बैनर तले वकीलों ने कलेक्टर से मुलाकात की और तहसीलदार गोविदपुरा के खिलाफ एक शिकायती आवेदन दिया। आवेदन में वकीलों ने कहा, सै. खालिद कैस उक्त मामले में 11/09/2013 को बतौर अधिवक्ता उपस्थित थे। इसमें श्री गुप्ता ने रिहाई आदेश जारी करने से इंकार कर दिया था। जब वकील ने आवेदन के संबंध में जवाब मांगा तो उनसे से गया कि इसमें अधिवक्ता की आवश्यकता नहीं है। गुरुवार को तहसीलदार श्री गुप्ता ने अभद्र व्यवहार किया। साथ ही कहा-मेरी मर्जी होगी वह मैं करूंगा। ज्यादा बोलोगे तो थाना कोहेफिजा में बंद करवा दूंगा। वकालत करना भूल जाओगे। 

-यह दिया था कोर्ट ने फैसला 
तहसीलदार गोविंदपुरा कोर्ट ने 10 सितंबर को पिपलानी थाना द्वारा पेश किए गए। कोर्ट ने धारा -151, 107-116 के एक प्रकरण में आपसी रंजिश के चलते झगड़ रहे 15 छात्रों को जेल भेजने का आदेश दिया था। तहसीलदार कोर्ट ने इसे रैगिंग का मामला माना था। साथ ही सभी छात्रों के माता-पिता के आने के बाद ही छोड़ने को कहा था। इसके लिए उन्होंने माता-पिता को सूचना कर उपिस्थत होने को कहा था। बुधवार 11 सितंबर को एडवोकेट साजिद सिद्दीकी व वकील खालिद कैस इन छात्रों को छुड़वाने जमानत के दस्तावेजों लेकर तहसील कोर्ट पहुंचे। जमानत में 6 एकड़ जमीन के दस्तावेज लगे हुए थे। तहसीलदार ने वकीलों द्वारा प्रस्तुत की गई जमानत को न तो स्वीकारा और न ही अस्वीकार। इसके बाद गुरुवार को तहसीलदार ने बिना मुचलके ही सभी 15 छात्रों को छोड़ दिया। वकीलों का आरोप है कि उन्होंने बुधवार को उनके द्वारा सौंपे गए जमानत के दस्तावेजों का निराकरण नहीं किया। तहसीलदार ने इन छात्रों के मित्रों से एक सादे कागज पर आवेदन लिखवाया और छोड़ने की कार्रवाई की। इसी को लेकर पैरवी कर रहे दोनों वकीलों ने जमानत के तौर पर दिए दस्तावेजों के साथ आवेदन के निराकरण की मांग की। इसके बाद मौखिक रूप से शुरू हुआ विवाद बढ़ गया। 

-आयोग से शिकायत की तैयारी 
वकील व सोशल डेमेक्रेटिक पार्टी आॅफ इंडिया के सदस्य साजिद सिद्दीकी ने संपर्क करने पर कहा, इस पूरे प्रकरण की शिकातय चुनाव आयोग व मानवाधिकार आयोग और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से की जाएगी। इतना ही नहीं अब हम चुनाव आयोग से श्री गुप्ता के चार साल से भोपाल में जमे रहने की भी शिकायत करेंगे। मानवाधिकार आयोग को शिकायत में बताएंगे कि 15 छात्रों को जेल भेजने के निर्णय दिए जाने से उन्होंने मीडिया के वाह-वाही तो लूट ली, लेकिन विद्यार्थियों का भविष्य गर्त में डाल दिया। वह 107-116 के मामले में छात्रों को छोड़ सकते थे। 

-मामला देखने को कहा है
मैंने एसडीएम गोविंदपुरा को मामला देखने को कहा है। प्रकरण में क्या अनुचित हुआ और क्या उचित था। यह देखने के बाद ही पता चलेगा। 
निशांत वरवड़े, कलेक्टर, भोपाल

-गलतफैमी हुई है 
किसी प्रकार के विवाद की स्थिति निर्मित नहीं हुई। अधिवक्ताओं को गलतफैमी हुई है। 
मुकुल गुप्ता, तहसीलदार, गोविंदपुरा सर्किल 

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