बुधवार, 11 सितंबर 2013

अभाविप देश-प्रदेश को दे रहा प्रशासक

 -शर्मा के बाग को सींच रहे उपाध्याय 
भोपाल।
महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में आक्रोशित छवि के मिथक को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद तोड़ती दिखाई दे रही है। दरअसल, अभाविप की ईकाई विद्यार्थी कल्याण न्यास देश और प्रदेश को प्रशासनिक अफसर दे रही है। न्यास से वर्ष 2012-13 में मुख्य परीक्षा के लिए 22 छात्र-छात्राएं चयनित हुए हैं। प्रदेश को 4 डिप्टी कलेक्टर रैंक के अधिकारी दिए हैं। 
एक वर्ष के अल्प समय में देश भर में न्यास ने परचम फहराया है। इस न्यास को सींच रहे हैं अजय उपाध्याय। हालांकि इसकी कल्पना कर मूर्त रूप दिया विष्णुदत्त शर्मा ने। अजय यहां देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी के साथ एमपीपीएसी की तैयारी करा रहे हैं। इसके अलावा अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में भी यहां के विद्यार्थी चयनित हो रहे हैं। शुरुआती साल, 2012 में शुरू हुर्इं अलग-अलग कक्षाओं में अब 395 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है प्रतिभागियों को यह कक्षाएं नि:शुल्क दी जा रही हैं। 


-अब साकार करेंगे विजन-50
छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करा रहे अजय उपाध्याय कहते हैं, इस अध्ययन केंद्र की कल्पना विष्णुदत्त ने 25 साल पहले की थी। जिसे अब जाना जा रहा है। वे कहते हैं, जिस प्रकार बिहार में विजन-30 चल रहा है। दिल्ली यूपीएससी की तैयारी का जो माहौल है। उसी माहौल को मैं भोपाल में देखना चाहता हूं। इसके लिए विजन-50 पर काम शुरू हो गया है। हालांकि इसे असल में मूर्त रूप लेने में 2 साल लगेंगे। लेकिन मैं प्रदेश हर उस जिज्ञासु को पढ़ाना चाहता हूं, जिसमें आईएएस, आईपीएस, आईएफएस बनने की जिज्ञासा है। इन्हीं कर्मठों में से 50 वे छात्र-छात्राएं होंगे, जो देश-प्रदेश के कुशल प्रशासक होने के नाते स्वस्थ्य समाज गढ़ेंगे। 

-कहना पड़ा अब जगह नहीं 
अजय उपाध्याय ने बताया, सभी बैचों को मिलाकर कुल 395 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। आलम यह है अब किसी भी बैच में छात्र को लेने की जगह नहीं है। उन्होंने कहा, मुझे मजबूरन नवीन छात्र-छात्राओं को यह कहना पड़ा कि अब जगह नहीं है। हालांकि तैयारी की चाह रखने वालों के लिए हम अध्ययन के तरीके बता रहे हैं। दूसरा वेबसाइट भी तैयार की जा रही है, जिस पर पेपर सॉल्व करने के तरीके, प्रश्नोत्तरी और किसी प्रतियोगिता के लिए क्या पढ़ना है। यह एक क्लिक पर मिल सकेगा। इसके अलावा परीक्षा के लिहाज से अपडेट रहने के लिए प्रतियोगी नियमित अखबार पढ़े। 

-माता-पिता से लें ऊर्जा
यूपीएससी और पीएससी की तैयारी करने वाले छात्र चयनित न होने पर कुंठित हो जाते हैं। अजय कहते हैं, उस समय वह केवल माता-पिता के बारे में सोचे। क्योंकि जितना त्याग आपने किया है, उतना ही त्याग उन्होंने किया है। इनके अलावा दुनिया में ऊर्जा का दूसरा विकल्प नहीं है। क्या आप अधिकारी नहीं बनना चाहते हैं, इसके जवाब में अजय ने कहा, मैं हिमालय की चौटी छूना चाहता हूं, लेकिन घर नहीं बनाना चाहता। कुछ पदों के लिए सिलेक्शन हुआ है। किसी ज्वॉइन करना है इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें