-व्यावसायिक बहुमंजिला इमारत के फ्लेट पर मिलेगी अधिक छूट
भोपाल।
अगर आप फ्लेट लेने का मन बना रहे हैं तो दो महीने रुकना आपके लिए थोड़े फायदे का सौदा हो सकता है। वर्ष 2014-15 कलेक्टर गाइडलाइन में यह प्रावधान किया जा रहा है यदि व्यावसायिक बहुमंजिला इमारत में बना फ्लेट लिया जाता है तो उसके टैक्सों में अधिक छूट मिलेगी। यही छूट बिना लिफ्ट वालीं बहुमंजिला इमारतों में भी होगा।
प्राथमिक तौर पर यह मसौदा की बात समाने आ रही हैं।
व्यावसायिक भवन में जैसे जैसे मंजिल की संख्या बढ़ती जाएगी यह छूट 60 प्रतिशत तक पहुंची जाएगी। जबकि आवासीय में यह छूट केवल 15 प्रतिशत तक रहेगी। छूट के लिए अन्य किस प्रकार के प्रावधान या नीतियां तय की जा रही हैं, यह गाइडलाइन अंतिम होने पर ही तय हो पाएगा। इससे एक बात तो तय है कि देश के मेट्रो शहरों की तर्ज पर शहर में फ्लेट का कलचर बढ़ाने यह सब किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार प्रथम माले पर बने फ्लेट पर 25 प्रतिशत छूट होगी, द्वितीय पर 40, तृतीय पर 50 व चौथे और उससे उपर के लिए 60 प्रतिशत छूट का प्रावधान किया जा रहा है। बताया जाता है इसे आईजी आईजी पंजीयन दीपाली रस्तोगी ने हाल ही में गाइडलाइन के उपबंधों में दर्शाया है। इससे बहुमंजिला इमारतों का माहौल शहर में बढ़ेगा।
-इसलिए छूट
पंजीयन कार्यालय के अधिकारियों की माने तो व्यावसायिक बहुमंजिला भवनों में ग्राउंड लोर, बेसमेंट व प्रथम लोर तक दुकानें होने की संभावना होती है। उनकी बिक्री हो ही जाती है। यदि वहां तक छूट कम हो या न हो तो चलता है, लेकिन इससे उपर की मंजिलों पर व्यापार की संभावना कम ही होती है ऐसे में यहां की दुकानों व लैटों को कम ही खरीदा जाता है। इसलिए उपरी मंजिलों की प्रापर्टी में छूट दी गई है, जबकि आवासीय ावनों में यह छूट कम रखी गई है। वह भी बिना लि ट वाले भवनों में। जिल भवनों में लि ट है वहां यह छूट नहीं रखी गई है। पिछले वर्ष की तरह वर्ष 2014-15 में भी इस उपबंध में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इसका कारण है कि लि ट वाली बिल्डिंगों में लोगों को सीढि?ां नहीं चढ?ा पड़ता है, और उपर की मंजिल तक पहुंचना आसाना होता है। इसलिए उसमें कोई छूट नहीं दी जा रही है।
भोपाल।
अगर आप फ्लेट लेने का मन बना रहे हैं तो दो महीने रुकना आपके लिए थोड़े फायदे का सौदा हो सकता है। वर्ष 2014-15 कलेक्टर गाइडलाइन में यह प्रावधान किया जा रहा है यदि व्यावसायिक बहुमंजिला इमारत में बना फ्लेट लिया जाता है तो उसके टैक्सों में अधिक छूट मिलेगी। यही छूट बिना लिफ्ट वालीं बहुमंजिला इमारतों में भी होगा।
प्राथमिक तौर पर यह मसौदा की बात समाने आ रही हैं।
व्यावसायिक भवन में जैसे जैसे मंजिल की संख्या बढ़ती जाएगी यह छूट 60 प्रतिशत तक पहुंची जाएगी। जबकि आवासीय में यह छूट केवल 15 प्रतिशत तक रहेगी। छूट के लिए अन्य किस प्रकार के प्रावधान या नीतियां तय की जा रही हैं, यह गाइडलाइन अंतिम होने पर ही तय हो पाएगा। इससे एक बात तो तय है कि देश के मेट्रो शहरों की तर्ज पर शहर में फ्लेट का कलचर बढ़ाने यह सब किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार प्रथम माले पर बने फ्लेट पर 25 प्रतिशत छूट होगी, द्वितीय पर 40, तृतीय पर 50 व चौथे और उससे उपर के लिए 60 प्रतिशत छूट का प्रावधान किया जा रहा है। बताया जाता है इसे आईजी आईजी पंजीयन दीपाली रस्तोगी ने हाल ही में गाइडलाइन के उपबंधों में दर्शाया है। इससे बहुमंजिला इमारतों का माहौल शहर में बढ़ेगा।
-इसलिए छूट
पंजीयन कार्यालय के अधिकारियों की माने तो व्यावसायिक बहुमंजिला भवनों में ग्राउंड लोर, बेसमेंट व प्रथम लोर तक दुकानें होने की संभावना होती है। उनकी बिक्री हो ही जाती है। यदि वहां तक छूट कम हो या न हो तो चलता है, लेकिन इससे उपर की मंजिलों पर व्यापार की संभावना कम ही होती है ऐसे में यहां की दुकानों व लैटों को कम ही खरीदा जाता है। इसलिए उपरी मंजिलों की प्रापर्टी में छूट दी गई है, जबकि आवासीय ावनों में यह छूट कम रखी गई है। वह भी बिना लि ट वाले भवनों में। जिल भवनों में लि ट है वहां यह छूट नहीं रखी गई है। पिछले वर्ष की तरह वर्ष 2014-15 में भी इस उपबंध में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इसका कारण है कि लि ट वाली बिल्डिंगों में लोगों को सीढि?ां नहीं चढ?ा पड़ता है, और उपर की मंजिल तक पहुंचना आसाना होता है। इसलिए उसमें कोई छूट नहीं दी जा रही है।
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