गुरुवार, 11 जुलाई 2013

कांग्रेस का टूटा भाजपा का बढ़ा ‘विश्वास’

 
या

कांग्रेस का राकेश से  गुरुवार को सदन से 
‘विश्वास’ खत्म 
भोपाल। 
मध्य प्रदेश की राजनीति में पासा ऐसा पल्टा कि दो ‘विश्वास’ एक साथ खत्म हो गए। पहला मप्र कांग्रेस का चौधरी राकेश सिंह से और दूसरा विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने से पहले ही शून्य करार दिए जाने से। 
मप्र विधानसभा में विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पहले उप नेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह ने इसका विरोध जताया। उन्होंने कहा इसमें राघवजी के मंत्री पद पर रहकर किए गए कृत्य और उत्तराखंड में फंसे प्रदेश के 721 लोगों का मुद्दा शामिल नहीं किया गया। मैं इसका विरोध करता हूं। इतना कहते ही कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा ने कहा, अब अविश्वास का कोई औचित्य नहीं रह जाता। विपक्षी दल के उप नेता ने इस पर आपत्ति ली है। ऐसे में प्रस्ताव शून्य हो गया है। इस पर कांग्रेसियों ने आपत्ति ली। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने अध्यक्ष को खड़े हो विश्वास दिलाते हुए अन्य 24 सदस्यों को खड़ा करते हुए कहलवाया हम अविश्वास पर चर्चा चाहते हैं। यह केवल की सरकार मौनो पली है। वह सदन में चर्चा से बचना चाहती है। तिस पर सदन में फिर हंगामा शुरू हो गया और सदन शोर-गुल में डूब गया। अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने स्थिति को देखते हुए सदन की कार्रवाई आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। 
इसके बाद शुरू हुए सदन में भाजपाईयों ने शिवराज के समर्थन में नारे लगाना शुरू कर दिए। भाजपाई गर्भगृह में एकत्र हो गए थे। अध्यक्ष ने सदस्यों को शांत कराया। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने अध्यक्ष से मुखातिब होते हुए कहा, सरकार को सुनने की हिम्मत नहीं है। भाजपा ने डील कर ली है। एक व्यक्ति के विरोध में होने से अविश्वास प्रस्ताव खत्म नहीं होता। सरकार सदन में जवाब देने से बच रही है और डर गई है। भाजपा विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। संसदीय कार्यमंत्री नरोेत्तम मिश्रा ने स्थिति संभालते हुए माहौल शांत कराया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, जब सदन में ही नेता प्रतिपक्ष के प्रस्ताव पर ही उनके सदस्य का अविश्वास है। सदन में इसकी चर्चा का कोई औचित्य नहीं है। अब वे चाहे तो जनता के सामने अविश्वास लाएं। जनता के सामने लड़ाई लड़ने को हम भी तैयार हैं। इसी बीच कांग्रेस से विधायक नर्मदाप्रसाद प्रजापति ने कहा, सूटकेस देकर डील हुई। उन्होंने भाजपा सदस्यों से सीधे कहा, जिससे डील हुई उससे बात करो। हंगामा होने के करीब 7 मिनट बाद अध्यक्ष ने संसदीय व्यवस्था के तहत अविश्वास प्रस्ताव को शून्य करार देते हुए विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। 

- पार्टी जो कहेगी वो करेंगे
चौधरी राकेश सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद जब भिंड सीट से भाजपा के टिकट पर लड़े नरेंद्र सिंह कुशवाह से यह पूछा कि अब वे कहा से चुनाव लड़ेंगे? इस पर श्री कुशवाह ने कहा, पार्टी का निर्णय है उसे ही माना जाएगा। भाजपा में राकेश का स्वागत है। उसका परिवार पहले से ही भाजपा, बल्कि जनसंघ के समय से जुड़ा हुआ है। 1990 में परिस्थितियां बदली थीं। इसके बाद वह कांग्रेस से लड़े। चौधरी के पिता भाजपा से विधायक थे। उल्लेखनीय है कि चौधरी राकेश ने भिंड में नरेंद्र को 16 हजार 700 वोटों से हरा कब्जा जमाया था। 

-दल नहीं दिल की सुनी : शिव
प्रदेश भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा, चौधरी राकेश सिंह जैसे लोग विरले ही होते हैं। वे अपने सिद्धांत और संस्कृति पर अढिग रहे। उनके संसदीय ज्ञान से लोग पहले ही परिचित हैं, इस बारे में बताने की जरूरत नहीं है। सिद्धांत व संस्कृति की जब बात आई तो उन्होंने दल नहीं, दिल की सुनी। मैं उनका पार्टी की तरफ से स्वागत करता हूं। शिव ने उनसे भाजपा में आने का आग्रह किया। चौधरी राकेश बोले, ऐसे वक्त पर भाजपा के भाईयों और शिवराज ने ढांढस बंधाया। मैं सदस्यता स्वीकारता हूं। अब मैं आजीवन भाजपा में रहते हुए जनता की सेवा करूंगा। वे बोले, बच्चा-बच्चा राम का, राघवजी के काम का ? ये क्या बयान है। अगर राम के बारे में ऐसा कहा जाएगा तो बर्दाश्त नहीं कर सकते। राम के पुत्र लव-कुश थे। हम उन्हीं की संतान हैं। मैं भी हिंदू हूं। सिद्धांतों के विपरीत नहीं जा सकता। 
इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा के साथ चौधरी राकेश सिंह को लेकर भाजपा कार्यालय पहुंचे। 

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