अगर आपने बैरागढ़, गोविन्दपुरा, टीटी नगर, एमपी नगर और शहर वृत्त (तहसील) कार्यालय से कोई दस्तावेज बनवाया है तो इसे पूर्ण वैधानिक प्रमाण-पत्र न माने। दरअसल, जिले में शासन की नजर में केवल २ तहसीलें (हुजूर व बैरसिया) हैं। इस हिसाब से अन्य सर्किलों द्वारा जारी किए कागजातों को पूर्णत: वैधानिक नहीं माना जा सकता।
इस बात की पुष्टि कमिश्नर भोपाल संभाग प्रवीण गर्ग द्वारा कलेक्टर भोपाल से मांगे गए एक स्पष्टीकरण पत्र से होती है। हालांकि शासन ने इन तहसीलों की स्वीकृति-अस्वीकृति का फैसला अभी नहीं लिया है। सात साल बाद इन्हें शासन द्वारा वैधानिक प्रक्रिया के जरिए अस्तित्व में लाने कलेक्ट्रेट कार्यालय एवं भू-अभिलेख शाखा ने राज्य शासन को पत्र लिखा है।
इन्हें वैध करने शहर में लॉ एण्ड आर्डर व प्रशासनिक व्यवस्था को दुरस्त करने की बात कही जा रही है। अब तक केवल शासन ने दो ही तहसीलों को अपने रिकार्ड में मान्य किया है। जिला प्रशासन ने इन्हें वैध करने प्रमुख सचिव राजस्व मप्र को पत्र लिखा है, जिसमें पांचों वृत्तों को तहसील का दर्जा दिए जाने की अनुशंसा की है।
-ऐसे हुआ विभाजन
वर्ष १९९३ में तत्कालीन कलेक्टर प्रवेश शर्मा ने जन सुविधा को देखते हुए जिले के नगरीय नजूल क्षेत्रों को दो हिस्सों में बांटा था। राजधानी परियोजना दूसरा पुराना शहर भोपाल। 2०/12/2005 में तत्कालीन कलेक्टर संजय शुक्ला मप्र भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 105 व 106 को प्रयोग में लाते हुए जिले में नगरीय नजूल क्षेत्रों को दो से पांच में विभक्त कर दिया। हालांकि इस दौरान भी इसका विरोध हुआ था। इसमें शहरी क्षेत्र के 68 ग्रामों को पांच तहसीलों में शामिल किया। इनसे गोविंदपुरा, बैरागढ़, एमपी नगर, टीटी नगर व शहर वृत्त बने।
हुजूर व बैरसिया अलग हैं।
-यह भी तर्क
शहरी क्षेत्र को पांच नजूल वृत्तों में बांटने के पीछे प्रशासन का तर्क था कि इससे आम जन को फायदा मिलेगा। वहीं इन क्षेत्रों की बहुमूल्य शासकीय भूमियों पर अनाधिकृत कब्जा, अतिक्रमण पर निगरानी रखी जा सकेगी, वहीं इसे तत्काल हटाया जा सकेगा। तत्कालीन कलेक्टर संजय शुक्ला ने शहर के विस्तार और विकास की बात पर पांच वृत्तों में विभाजित कर दिया। दूसरी खुद प्रशासनिक अधिकारी अपने शासन को दिए अपने पत्र में कह चुके हैं कि पांचों वृत्तों के गठन से लाभ से ज्यादा हानि हुई।
-७ साल बाद आया होश
बीते सात साल से यह वृत्त बिना शासन की मान्यता से चल रहे हैं। इन सात साल में जिला प्रशासन ने कभी भी इन वृत्तों को तहसीलों का दर्जा दिलाने शासन से पत्र व्यवहार नहीं किया। अब पीपीपी (पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप) के तहत तीन लोक सेवा केंद्र शुरू किए जाने के बाद खासी दिक्कतें सामने आईं। अब जिला प्रशासन ने इन्ळें मान्य करने आनन-फानन में शासन को पत्र लिखा है। यह पत्र 30/8/2012 को कार्यालय के शासकीय पत्र क्रमांक-1663 /राज.स्था./2012 के द्वारा प्रमुख राजस्व आयुक्त मप्र के नाम लिखा गया। इसमें हुजूर व बैरसिया के स्वीकृत पदों के साथ शहर नजूल क्षेत्र की पांच तहसीलों के पुर्नगठन एवं इन तहसीलों में पदों की स्वीकृति देने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि पीपीपी के तहत संचालित तीनों में राजस्व विभाग की सेवाओं के लिए केवल एक ही अधिकारी है। यह तहसील हुजूर के तहसीलदार हैं, जबकि अन्य नजूल वृत्तों के तहसीलदार सहायक की भूमिका में हैं।
-मुझे पता नहीं
भोपाल जिले में दो तहसीलें हैं। पांच वृत्तों की जानकारी मुझे नहीं हैं। वहीं किसी प्रकार की कोई नोटशीट आई हो तो वह विभागीय अधिकारियों के पास होगी, मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।
कन्हैयालाल अग्रवाल, राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन विभाग
-जानकारी लूंगा
शहर की पांच वृत्त(तहसीलें) नियम विरुद्ध कैसे चलीं और चल रहीं हैं। इस बारे में जरूर पूरी जानकारी शासन से लूंगा।
आरिफ अकील, विधायक, कांग्रेस
इस बात की पुष्टि कमिश्नर भोपाल संभाग प्रवीण गर्ग द्वारा कलेक्टर भोपाल से मांगे गए एक स्पष्टीकरण पत्र से होती है। हालांकि शासन ने इन तहसीलों की स्वीकृति-अस्वीकृति का फैसला अभी नहीं लिया है। सात साल बाद इन्हें शासन द्वारा वैधानिक प्रक्रिया के जरिए अस्तित्व में लाने कलेक्ट्रेट कार्यालय एवं भू-अभिलेख शाखा ने राज्य शासन को पत्र लिखा है।
इन्हें वैध करने शहर में लॉ एण्ड आर्डर व प्रशासनिक व्यवस्था को दुरस्त करने की बात कही जा रही है। अब तक केवल शासन ने दो ही तहसीलों को अपने रिकार्ड में मान्य किया है। जिला प्रशासन ने इन्हें वैध करने प्रमुख सचिव राजस्व मप्र को पत्र लिखा है, जिसमें पांचों वृत्तों को तहसील का दर्जा दिए जाने की अनुशंसा की है।
-ऐसे हुआ विभाजन
वर्ष १९९३ में तत्कालीन कलेक्टर प्रवेश शर्मा ने जन सुविधा को देखते हुए जिले के नगरीय नजूल क्षेत्रों को दो हिस्सों में बांटा था। राजधानी परियोजना दूसरा पुराना शहर भोपाल। 2०/12/2005 में तत्कालीन कलेक्टर संजय शुक्ला मप्र भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 105 व 106 को प्रयोग में लाते हुए जिले में नगरीय नजूल क्षेत्रों को दो से पांच में विभक्त कर दिया। हालांकि इस दौरान भी इसका विरोध हुआ था। इसमें शहरी क्षेत्र के 68 ग्रामों को पांच तहसीलों में शामिल किया। इनसे गोविंदपुरा, बैरागढ़, एमपी नगर, टीटी नगर व शहर वृत्त बने।
हुजूर व बैरसिया अलग हैं।
-यह भी तर्क
शहरी क्षेत्र को पांच नजूल वृत्तों में बांटने के पीछे प्रशासन का तर्क था कि इससे आम जन को फायदा मिलेगा। वहीं इन क्षेत्रों की बहुमूल्य शासकीय भूमियों पर अनाधिकृत कब्जा, अतिक्रमण पर निगरानी रखी जा सकेगी, वहीं इसे तत्काल हटाया जा सकेगा। तत्कालीन कलेक्टर संजय शुक्ला ने शहर के विस्तार और विकास की बात पर पांच वृत्तों में विभाजित कर दिया। दूसरी खुद प्रशासनिक अधिकारी अपने शासन को दिए अपने पत्र में कह चुके हैं कि पांचों वृत्तों के गठन से लाभ से ज्यादा हानि हुई।
-७ साल बाद आया होश
बीते सात साल से यह वृत्त बिना शासन की मान्यता से चल रहे हैं। इन सात साल में जिला प्रशासन ने कभी भी इन वृत्तों को तहसीलों का दर्जा दिलाने शासन से पत्र व्यवहार नहीं किया। अब पीपीपी (पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप) के तहत तीन लोक सेवा केंद्र शुरू किए जाने के बाद खासी दिक्कतें सामने आईं। अब जिला प्रशासन ने इन्ळें मान्य करने आनन-फानन में शासन को पत्र लिखा है। यह पत्र 30/8/2012 को कार्यालय के शासकीय पत्र क्रमांक-1663 /राज.स्था./2012 के द्वारा प्रमुख राजस्व आयुक्त मप्र के नाम लिखा गया। इसमें हुजूर व बैरसिया के स्वीकृत पदों के साथ शहर नजूल क्षेत्र की पांच तहसीलों के पुर्नगठन एवं इन तहसीलों में पदों की स्वीकृति देने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि पीपीपी के तहत संचालित तीनों में राजस्व विभाग की सेवाओं के लिए केवल एक ही अधिकारी है। यह तहसील हुजूर के तहसीलदार हैं, जबकि अन्य नजूल वृत्तों के तहसीलदार सहायक की भूमिका में हैं।
-मुझे पता नहीं
भोपाल जिले में दो तहसीलें हैं। पांच वृत्तों की जानकारी मुझे नहीं हैं। वहीं किसी प्रकार की कोई नोटशीट आई हो तो वह विभागीय अधिकारियों के पास होगी, मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।
कन्हैयालाल अग्रवाल, राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन विभाग
-जानकारी लूंगा
शहर की पांच वृत्त(तहसीलें) नियम विरुद्ध कैसे चलीं और चल रहीं हैं। इस बारे में जरूर पूरी जानकारी शासन से लूंगा।
आरिफ अकील, विधायक, कांग्रेस
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