फर्जी व्यक्ति ने दिल्ली में रहने वाले विनोद तुली का सुभाष कालोनी स्थित प्लॉट को बेच दिया। इसकी एक नहीं दो-दो रजिस्ट्रियां भी हो गईं। इस बात का खुलासा तहसील कार्यालय द्वारा जारी कराए गए एक विज्ञापन से हुआ।
विज्ञापन जारी होने के बाद गोविन्दपुरा तहसील कार्यालय में प्लॉट के दो मालिक खड़े हो गए। फर्जी व्यक्ति से प्लॉट खरीदने वाले ने तहसील कार्यालय में प्लॉट के नामांतरण के लिए आवेदन दिया। आवेदन दिए जाने के बाद तहसीलदार मुकुल गुप्ता ने प्लॉट का नामांतरण करने से पहले विज्ञापन के जरिए आपत्ति-अनापत्तियां बुलाईं थीं। विज्ञापन जारी होने के बाद असली मालिक सामने आ गया। प्रकरण अब तहसीलदार श्री गुप्ता की कोर्ट में प्रचलान में आ गया है।
-यह है प्लॉट
सेमरा कलां के भीर बनी सुभाष नगर कालोनी में खसरा नंबर २३३, २४०, २४२ पर ५४०० वर्ग फीट का प्लॉट सी-१ नई दिल्ली निवासी विनोद तुली के नाम दर्ज है। जांच में पता चला कि इस प्लॉट की २०१२ में ही दो बार रजिस्ट्रियां हो गईं। पहली रजिस्ट्री २४ फरवरी २०१२ को हबीब खान के नाम से हुई। इस प्लॉट को २० लाख ७ हजार ४०० रुपए बेचा गया था। इसके बाद २६ जुलाई २०१२ को हबीब खान ने प्रखर तिवारी और सोनाली तिवारी के नाम पर रजिस्ट्री कराई। तिवारी ने इसे ३८ लाख ६५ हजार में खरीदा।
-सिफारिशें कराईं
प्रखर तिवारी ने रजिस्ट्री कराने के बाद गोविन्दपुरा तहसील कार्यालय में नामांतरण के लिए आवेदन किया। नामांतरण जल्द से जल्द हो जाए, इसको लेकर प्रखर ने तहसीलदार को कुछ राजनेताओं व अन्य बड़े ओहदो पर बैठे व्यक्तियों से सिफारिशें कराईं। तहसीलदार ने प्रखर से नियमानुसार नामांतरण से पहले आपत्तियां बुलाने लिए विज्ञापन जारी करने को कहा। इस दौरान प्रखर ने दबाव बनाया की विज्ञापन जारी न किया जाए, लेकिन नियमानुसार विज्ञापन जारी किया गया। इसके बाद सच्चाई सामने आ गई।
-मामला संदिग्ध
विज्ञापन के प्रकाशित होने के बाद इस प्लॉट के एक नहीं दो विनोद तुली सामने आ गए। दोनों ने ही तहसीलदार को आपत्तियां दी हैं कि वह प्लॉट के हकदार हैं और दिल्ली में रहते हैं। दोनों ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी को प्लॉट नहीं बेचा, अत: प्लॉट उनके नाम से ही किया जाए। रजिस्ट्री को भी उनके नाम कराने की मांग की। मामले को देखते हुए तहसीलदार ने नोटिस जारी कर दोनों विनोद तुली को तलब किया, किन्तु पेशी पर कोई नहीं आया। मामले को तहसीलदार ने संदिग्ध माना है।
-सरकारी भी हो सकती है जमीन
इस प्रकरण में २४ जनवरी अंतिम तारीख लगाई गई। तहसीलदार मुकुल गुप्ता ने बताया अब तक इस मामल में दोनों तुली सामने नहीं आए। न ही किसी ऐसे व्यक्ति आवेदन प्रस्तुत किया है, जिससे यह सत्यापित हो सके कि उक्त प्लाट उसी का है। हालांकि दोनों विनोद तुली और अन्य संबंधितों को न्यायालय में प्रस्तुत होने कहा गया है। यदि दोनों विनोद तुली फर्जी मिलते हैं तो भू-राजस्व संहिता की धारा १७६ के तहत इस जमीन को शासकीय घोषित किया जाएगा।
विज्ञापन जारी होने के बाद गोविन्दपुरा तहसील कार्यालय में प्लॉट के दो मालिक खड़े हो गए। फर्जी व्यक्ति से प्लॉट खरीदने वाले ने तहसील कार्यालय में प्लॉट के नामांतरण के लिए आवेदन दिया। आवेदन दिए जाने के बाद तहसीलदार मुकुल गुप्ता ने प्लॉट का नामांतरण करने से पहले विज्ञापन के जरिए आपत्ति-अनापत्तियां बुलाईं थीं। विज्ञापन जारी होने के बाद असली मालिक सामने आ गया। प्रकरण अब तहसीलदार श्री गुप्ता की कोर्ट में प्रचलान में आ गया है।
-यह है प्लॉट
सेमरा कलां के भीर बनी सुभाष नगर कालोनी में खसरा नंबर २३३, २४०, २४२ पर ५४०० वर्ग फीट का प्लॉट सी-१ नई दिल्ली निवासी विनोद तुली के नाम दर्ज है। जांच में पता चला कि इस प्लॉट की २०१२ में ही दो बार रजिस्ट्रियां हो गईं। पहली रजिस्ट्री २४ फरवरी २०१२ को हबीब खान के नाम से हुई। इस प्लॉट को २० लाख ७ हजार ४०० रुपए बेचा गया था। इसके बाद २६ जुलाई २०१२ को हबीब खान ने प्रखर तिवारी और सोनाली तिवारी के नाम पर रजिस्ट्री कराई। तिवारी ने इसे ३८ लाख ६५ हजार में खरीदा।
-सिफारिशें कराईं
प्रखर तिवारी ने रजिस्ट्री कराने के बाद गोविन्दपुरा तहसील कार्यालय में नामांतरण के लिए आवेदन किया। नामांतरण जल्द से जल्द हो जाए, इसको लेकर प्रखर ने तहसीलदार को कुछ राजनेताओं व अन्य बड़े ओहदो पर बैठे व्यक्तियों से सिफारिशें कराईं। तहसीलदार ने प्रखर से नियमानुसार नामांतरण से पहले आपत्तियां बुलाने लिए विज्ञापन जारी करने को कहा। इस दौरान प्रखर ने दबाव बनाया की विज्ञापन जारी न किया जाए, लेकिन नियमानुसार विज्ञापन जारी किया गया। इसके बाद सच्चाई सामने आ गई।
-मामला संदिग्ध
विज्ञापन के प्रकाशित होने के बाद इस प्लॉट के एक नहीं दो विनोद तुली सामने आ गए। दोनों ने ही तहसीलदार को आपत्तियां दी हैं कि वह प्लॉट के हकदार हैं और दिल्ली में रहते हैं। दोनों ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी को प्लॉट नहीं बेचा, अत: प्लॉट उनके नाम से ही किया जाए। रजिस्ट्री को भी उनके नाम कराने की मांग की। मामले को देखते हुए तहसीलदार ने नोटिस जारी कर दोनों विनोद तुली को तलब किया, किन्तु पेशी पर कोई नहीं आया। मामले को तहसीलदार ने संदिग्ध माना है।
-सरकारी भी हो सकती है जमीन
इस प्रकरण में २४ जनवरी अंतिम तारीख लगाई गई। तहसीलदार मुकुल गुप्ता ने बताया अब तक इस मामल में दोनों तुली सामने नहीं आए। न ही किसी ऐसे व्यक्ति आवेदन प्रस्तुत किया है, जिससे यह सत्यापित हो सके कि उक्त प्लाट उसी का है। हालांकि दोनों विनोद तुली और अन्य संबंधितों को न्यायालय में प्रस्तुत होने कहा गया है। यदि दोनों विनोद तुली फर्जी मिलते हैं तो भू-राजस्व संहिता की धारा १७६ के तहत इस जमीन को शासकीय घोषित किया जाएगा।
हेमंत भाई, प्रकरण रोचक भी है और जनहित का भी है। २४ जनवरी के बाद क्या हुआ ये भी लिखें। लगता है इसी प्रकरण के मद्देनज़र रजिस्ट्री का सारा काम एक दिन में निपटाने के सरकारी आदेश जारी हुए हैं। धन्यवाद।
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