देश के पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. शंकरदयाल शर्मा की गैर शासकीय संस्था (एनजीओ) 'मप्र महिला कल्याण समिति' ने ३५० से अधिक महिलाओं को बेरोजगार कर दिया है। महिलाओं को नौकरी से निकालने के बाद उन्हें न वेतन दिया गया और न ही एक साल पहले समिति से रिटायर्ड हुई महिलाओं को फंड व ग्रेज्युएटी दी जा रही है। यह सब किया है समिति की महाप्रबंधक शोभना पाटिल ने। यह आरोप समिति के जुड़ी महिलाओं ने लगाए।रविवार को बेरोजगार हुई महिलाओं ने लिली टॉकिज स्थित नीलम पार्क में शोभना और भेल प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रहीं प्रभा उपाध्याय व हेमलता ठाकुर ने बताया शोभना पाटिल ने समिति की महिलाओं को छोड़ स्व:हित में फैसले लिए। इस साल भी समिति को भेल से टेंडर मिला, लेकिन श्रीमती पाटिल ने मिली भगतकर पंजाब की एक संस्था के कर्ताधर्ता शिवाराणा को यह टेंडर दे दिया। यह टेंडर 10 लाख रुपए में शोभना दे शिवाराणा को दिया है। शोभना ने इसके बाद एक-एक कर महिलाओं को बिना किसी पूर्व सूचना के काम के लिए मना कर दिया। श्रीमती उपाध्याय ने बताया कि संस्था ने अगस्त, सितंबर और अक्टूबर कार्यरत ३० महिलाओं को मात्र १५ दिन का वेतन ३ हजार रुपए दिए, जबकि यह महिलाएं नियमित काम कर रही हैं। जबकि ३०० महिलाओं को पैमेंट नहीं दी गई।
समिति की महाप्रबंधक शोभना पाटिल और महासचिव निर्मला चतुर्वेदी ने महिलाओं को अश्वासन दिया था कि आप अभी कहीं भी अपनी मर्जी से काम कर लें। जैसे ही काम समिति के पास आएगा, तो हम आपको रख लेंगे। अब दोनों ही कह रहीं हैं- आप लोग अपनी मर्जी से काम छोड़कर गई हैं, इसलिए न ग्रेज्युएटी दी जाएगी न फंड दिया जाएगा। इस तरह महिलाओं को प्रताडि़त किया जा रहा है।
-रोका फंड, नहीं दी राशि
एक साल पहले करीब ११ महिलाएं समिति से रिटायर्ड हुई थीं। इन्हें न ग्रेज्युएटी दी गई न फंड। महिलाएं जब भविष्य निधि संगठन के कार्यालय गईं तो वहां कमिश्नर ने बताया कि मार्च-२०१२ के बाद से उनके खाते में कोई राशि ही जमा नहीं की गई है। इसलिए इन महिलाओं का फंड रोक दिया गया है। समिति द्वारा महिला मैंबर शिप के नाम एक निश्चित राशि काटी जाती है। यह राशि करीब २० हजार रुपए प्रति महिला होता है। यह राशि रिटायर्ड महिलाकर्मचारी को दी जाती है, लेकिन ११ में से किसी भी महिला को समिति ने राशि नहीं दी।
-रिश्वत लेता है शर्मा
शोभना पाटिल के साथ समिति स्टॉफ के अन्य सुपरवाइजर भी मिली भगत कर रहे हैं। इसमें प्रमोद शर्मा, सुमंगला नायर और ममता शर्मा शामिल हैं। प्रमोद शर्मा इंडियन ओवर सीज बैंक से महिलाकर्मचारियों को लोन दिलाता है। इसके लिए वह १८०० से २००० तक रिश्वत लेता था। प्रमोद पीएफ ऑफिस से पीएफ भी निकलवाता है। उसके बिना वहां अधिकारी काम ही नहीं करते, इसके काम के बदले में प्रमोद को करीब एक हजार रुपए देना पड़ते हैं।
-तुम कुछ नहीं बिगाड़ सकती
यहां उपस्थित महिलाओं ने बताया कि समिति के कुछ लोग कहते हैं- तुम चंद महिलाएं समिति का कुछ नहीं बिगाड़ सकती क्योंकि यह समिति पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा की है। इसकी संरक्षक अभी भी श्रीमती शर्मा खुद हैं। समिति के कुछ लोग कहते हैं- महिलाओं को समिति प्रबंधन के बारे में बोलने से पहले दस बार सोचना चाहिए। हम न्याय पाने कलेक्टर, कमिश्नर, महिला आयोग और भेल प्रबंधन से भी गुहार लगा चुके हैं। बावजूद इसके किसी ने भी न्याय नहीं किया।
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