बजट में इस बार किसान, महिला और युवा खास
-टैक्स और वेट में राहत देने की तैयारी
-बजट सत्र आज से, 22 मार्च चलेगा
हेमन्त पटेल, भोपाल।
मध्यप्रदेश का त्रयोदश विधानसभा बजट सत्र सोमवार को शुरू हो रहा है। शुरुआत राज्यपाल रामनरेश यादव के अभिभाषण के साथ होगी। वर्तमान राज्य सरकार का यह आखिरी सत्र है। सरकार के मुखिया जहां बजट एक लाख करोड़ होने की बात पहले ही कह चुके हैं। वहीं किसान, महिला और युवाओं को रिझाने सरकार ने पूरी तैयारी की गई है।
वित्तमंत्री राघवजी २२ फरवरी को प्रदेश का बजट प्रस्तुत करेंगे। इससे पहले तीन दिन तक सदन में अभिभाषण पर चर्चा होगी। वित्तमंत्री और उनकी टीम ने आगीम ९ माह बाद होने वाले विधानसभा को ध्यान में रख इसकी ड्राफटिंग की है। चुनाव में विपक्ष को मुद्दा देने के मूड में सरकार ने टैक्स और वेट में राहत देने की तैयारी भी कर ली है। मप्र बजट विशेषज्ञों की माने तो इसी साल विधानसभा चुनावों में किसान, महिला और युवाओं के दम पर ही सरकार बनेगी, इसलिए इन वर्गों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है प्रदेश सरकार ने १६ जनवरी को युवामहा पंचायत आयोजित कर मंशा जाहिर कर दी थी कि उसको युवाओं का खयाल है। इसी के चलते सरकार ने युवाओं के लिए खजाने के पट खोले। फिर 3 फरवरी को किसान पंचायत में अन्नदाताओं का मजमा लगा, उन्हें विश्वास दिलाने का भरपूर प्रयास किया गया। बीते साल सरकार का बजट 80 हजार करोड़ रुपए था। इस बार बजट का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपए को पार कर सकता है। तीनों वर्गों की मांग अनुसार सरकार का जोर इस बार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी के संतुलित विकास पर है।
-शक्ति को साधने का प्रयास
चुनावी पंडितों और बजट विशेषज्ञों की माने तो सरकारें महिलाओं को खास महत्व नहीं देती, जबकि चुनाव लिस्ट में अब आधी आबादी उनकी है। सरकार ने शक्ति को साधने की तैयारी की है। भूमि, भवन, प्लॉट की रजिस्ट्री में कुछ प्रतिशत की छूट और बढ़ाई जाएगी। वहीं घर की मुखिया महिला होने पर भी टेक्स में विशेष छूट का प्रावधान किए जाने की संभावना है। महिलाओं को अपने पक्ष में रखने कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती। हालांकि महिला अपराध के आंकड़ों से सरकार की बदनामी हुई है, लेकिन महिला अपराध से जुड़े अपराधियों पर कार्रवाई करने और उन्हें सजा दिलाने में भी प्रदेश देश में नंबर एक स्थान पर है। इसका श्रेय भी मप्र सरकार लेना चाहती है। महिलाओं से जुड़े गंभीर अपराधों की सुनवाई विशेष न्यायालय करने और चालान शीट 45 दिन में दाखिल करने का प्रस्ताव बनाया है। पुलिस की अलग से महिला सेल एवं हेल्पलाइन नंबर जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं। सरकार महिला वर्ग को साधने चौतरफा प्रयास कर रही है।
-टैक्स और वेट में राहत देने की तैयारी
-बजट सत्र आज से, 22 मार्च चलेगा
हेमन्त पटेल, भोपाल।
मध्यप्रदेश का त्रयोदश विधानसभा बजट सत्र सोमवार को शुरू हो रहा है। शुरुआत राज्यपाल रामनरेश यादव के अभिभाषण के साथ होगी। वर्तमान राज्य सरकार का यह आखिरी सत्र है। सरकार के मुखिया जहां बजट एक लाख करोड़ होने की बात पहले ही कह चुके हैं। वहीं किसान, महिला और युवाओं को रिझाने सरकार ने पूरी तैयारी की गई है।
वित्तमंत्री राघवजी २२ फरवरी को प्रदेश का बजट प्रस्तुत करेंगे। इससे पहले तीन दिन तक सदन में अभिभाषण पर चर्चा होगी। वित्तमंत्री और उनकी टीम ने आगीम ९ माह बाद होने वाले विधानसभा को ध्यान में रख इसकी ड्राफटिंग की है। चुनाव में विपक्ष को मुद्दा देने के मूड में सरकार ने टैक्स और वेट में राहत देने की तैयारी भी कर ली है। मप्र बजट विशेषज्ञों की माने तो इसी साल विधानसभा चुनावों में किसान, महिला और युवाओं के दम पर ही सरकार बनेगी, इसलिए इन वर्गों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है प्रदेश सरकार ने १६ जनवरी को युवामहा पंचायत आयोजित कर मंशा जाहिर कर दी थी कि उसको युवाओं का खयाल है। इसी के चलते सरकार ने युवाओं के लिए खजाने के पट खोले। फिर 3 फरवरी को किसान पंचायत में अन्नदाताओं का मजमा लगा, उन्हें विश्वास दिलाने का भरपूर प्रयास किया गया। बीते साल सरकार का बजट 80 हजार करोड़ रुपए था। इस बार बजट का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपए को पार कर सकता है। तीनों वर्गों की मांग अनुसार सरकार का जोर इस बार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी के संतुलित विकास पर है।
-शक्ति को साधने का प्रयास
चुनावी पंडितों और बजट विशेषज्ञों की माने तो सरकारें महिलाओं को खास महत्व नहीं देती, जबकि चुनाव लिस्ट में अब आधी आबादी उनकी है। सरकार ने शक्ति को साधने की तैयारी की है। भूमि, भवन, प्लॉट की रजिस्ट्री में कुछ प्रतिशत की छूट और बढ़ाई जाएगी। वहीं घर की मुखिया महिला होने पर भी टेक्स में विशेष छूट का प्रावधान किए जाने की संभावना है। महिलाओं को अपने पक्ष में रखने कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती। हालांकि महिला अपराध के आंकड़ों से सरकार की बदनामी हुई है, लेकिन महिला अपराध से जुड़े अपराधियों पर कार्रवाई करने और उन्हें सजा दिलाने में भी प्रदेश देश में नंबर एक स्थान पर है। इसका श्रेय भी मप्र सरकार लेना चाहती है। महिलाओं से जुड़े गंभीर अपराधों की सुनवाई विशेष न्यायालय करने और चालान शीट 45 दिन में दाखिल करने का प्रस्ताव बनाया है। पुलिस की अलग से महिला सेल एवं हेल्पलाइन नंबर जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं। सरकार महिला वर्ग को साधने चौतरफा प्रयास कर रही है।
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